मूर्तिकारों का छलका दर्द, बाहर से आकर बिक रही प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां, लगाई जाए रोक
छिंदवाड़ा कुंभकार प्रजापति समाज ने प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत. महेंद्र राय की रिपोर्ट

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 4:43 PM IST
|Updated : August 27, 2026 at 5:02 PM IST
छिंदवाड़ा: गणेशोत्सव और दुर्गापूजा के दौरान लोग बड़े धूमधाम से गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना कर उनकी आराधना करते हैं. लेकिन इन मूर्तियों को बनाने में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और हानिकारक रासायनिक रंगों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. प्रशासन की सख्ती के बावजूद बाजार में प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां खुलेआम बेची जा रही हैं. छिंदवाड़ा के कुंभकार प्रजापति समाज ने कलेक्टर से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बाहर से लाकर बेचने वालों पर लगाम लगाने को लेकर शिकायत की है.
पीओपी से बनी मूर्तियां बनाने और बेचने पर रोक, फिर भी बाजार में आमद
छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने पिछले दिनों एसडीएम की अगवाई में जिले के मूर्ति बनाने और बेचने वालों के साथ बैठक की थी. जिसमें निर्देश दिया गया था कि पर्यावरण और जल प्रदूषण रोकने के मद्देनजर कुंभकार समाज का व्यक्ति ना तो प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति बनाएगा और ना ही बचेगा. इसके साथ ही 10 फीट से ज्यादा ऊंचाई की मूर्तियां बनाने को भी मना किया गया था.
कुंभकार समाज के जिला अध्यक्ष शीतल मालवीय ने बताया "सारा कुंभकार समाज प्रशासन के साथ है और सिर्फ प्राकृतिक मिट्टी से ही मूर्तियां बनाई जा रही हैं. लेकिन कुछ व्यापारी बाहर से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां लाकर बेच रहे हैं. हमें जानकारी लगी है कि अब तक चार ट्रक मूर्तियां छिंदवाड़ा में आ चुकी हैं. ऐसे व्यापारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर मैंने कलेक्टर से शिकायत की है."
4 सालों से कर रहे हैं शिकायत प्रशासन नहीं करता कड़ी कार्रवाई
शीतल मालवीय का कहना है कि प्रशासन के आदेश के अनुसार वे प्राकृतिक और देसी मिट्टी से मूर्ति बनाते हैं. लेकिन छिंदवाड़ा के चार फाटक इलाके के ओवर ब्रिज के नीचे गणेश स्थापना के कुछ दिन पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का बाजार सज जाता है. पिछले 4 सालों से वे लगातार प्रशासन को इसकी शिकायत कर रहे हैं लेकिन प्रशासन कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करता है. ये व्यापारी लगातार प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बेच रहे हैं.
उनका कहना है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां हल्की और कम लागत में बनती हैं. इसलिए ग्राहक उन्हें खरीद लेते हैं. इससे हमारे समाज का व्यापार भी ठप होता है. पूरे साल में सिर्फ एक ही मौका हमें मिलता है लेकिन उसमें भी अब बाहर के व्यापारियों ने कब्जा कर लिया है. बाहर के व्यापारी अगर मिट्टी की मूर्ति बेचते हैं तो हमें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों पर सख्ती होनी चाहिए.
झूठे दावों से रहे सावधान
कुंभकार समाज के जिला अध्यक्ष शीतल मालवीय का कहना है कि जो व्यापारी बाहर से लाकर प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बेचते हैं वे ग्राहकों से झूठ बोलते हैं कि ये चाक मिट्टी या देसी मिट्टी की की बनी हुई है इसलिए हल्की हैं. जबकि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की पहचान बड़ी आसानी से की जा सकती है. ये देखने में काफी चिकनी और वजन में हल्की होती है. ये पानी में घुलती नहीं हैं और उसका केमिकल वाला रंग बहुत खतरनाक होता है. मिट्टी से बनी मूर्तियां में सफाई कम होती है और यह वजनदार होती है.
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति बनाने और बेचने वालों पर होगी कार्रवाई
छिंदवाड़ा एसडीम सुधीर जैन का कहना है कि सभी मूर्तिकारों और विक्रेताओं की बैठक में निर्देश दिया गया है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. बाजार में अगर प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति बिकने आएगी तो उस पर अब कड़ी कार्रवाई होगी. कुंभकार प्रजापति समाज के लोगों ने मामले में शिकायत दर्ज कराई है जिसकी जांच की जाएगी.
मध्य प्रदेश के कई जिलों में प्रतिबंध फिर भी प्लास्टर ऑफ पेरिस पर नहीं लग रहा रोक
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गणेश और दुर्गा स्थापना के दौरान पूरे प्रदेश में प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां बेचने और बनाने पर रोक लगा रखी है. छिंदवाड़ा और इंदौर जिला प्रशासन ने भी इसको लेकर आदेश जारी किए हैं. लेकिन बाजार में इन मूर्तियों की आमद कम नहीं हो रही है. बाजारों में परंपरागत मिट्टी के मूर्तिकारों की मूर्तियां कम और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां ज्यादा दिखाई देती हैं.

