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ना खेतों में हल चलाया ना मशीनों का लिया सहारा, छिंदवाड़ा में श्वेता ने बनाया 300 बीजों का सीड बैंक

छिंदवाड़ा की श्वेता भटकर ने 'नो टिलेज मेथड' से शुरु की खेती, बिना हल चलाए बनाया 300 बीजों का सीड बैंक, महिलाओं को मिला रोजगार.

chhindwara Farming without plowing
छिंदवाड़ा में 300 बीजों का सीड बैंक (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : December 12, 2025 at 3:42 PM IST

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Updated : December 12, 2025 at 5:16 PM IST

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रिपोर्ट: महेंद्र राय

छिंदवाड़ा: ना खेतों में हल चलाते हैं और ना ही कोई आधुनिक मशीन का उपयोग किया जाता है. उसके बाद भी करीब 300 पुश्तैनी बीजों का बैंक बनाकर तैयार किया है, ताकि पर्यावरण भी बच सके और इंसान बीमारियों से भी दूर रह सकें. पांढुर्ना जिले के भटकर परिवार की बेटियां अपने साथ इस काम में ग्रामीण महिलाओं को मिलाकर उन्हें रोजगार के साथ साथ पहचान भी दे रही हैं.

बिना जुताई के खेती, 300 से ज्यादा बीजों का बैंक
नागपुर में पढ़ाई लिखाई करने के बाद श्वेता भटकर अपने गांव वापस लौटी और उन्होंने अपनी 16 एकड़ जमीन में नो टीलेज यानि बिना जुताई बिना हल और आधुनिक मशीनों का उपयोग ना करके खेती शुरू की. उनका कहना है कि, ''खेतों में जुताई करने के लिए हल की जरूरत होती है या फिर आधुनिक मशीनों की. इससे जमीन में कई ऐसे पौधे और और जीव जंतु होते हैं जो हमारे और पर्यावरण के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन वे भी नष्ट हो जाते हैं. इसलिए उन्होंने नो टिलेज खेती करना शुरू किया. जिससे कि कई ऐसे बीज भी उन्हें मिलते हैं जो काफी खास होते हैं. इसी के चलते उन्होंने इस पद्धति से देशी और पुश्तैनी करीब 300 बीजों का बैंक तैयार किया है, जिस वे साल दर साल अपने खेतों में लगाती हैं.''

छिंदवाड़ा में श्वेता ने बनाया 300 बीजों का सीड बैंक (ETV Bharat)

कचरे का भी होता है उपयोग, सजावटी सामान हो रहा तैयार
खेतों में यदि जुताई ना की जाए तो खरपतवार का ढेर लग जाता है. ऐसे में फसल उगना मुश्किल होता है जिसके लिए अंधाधुंध खरपतवार नाशक का उपयोग खेतों में किया जाता है. इस पर श्वेता भटकर बताती हैं कि, ''हम खरपतवार का उपयोग भी करते हैं जितनी भी तरह की घास होती है उसे काटकर या तो कागज बनाने में उपयोग करते हैं या फिर मवेशियों को चराने के काम आता है. कुछ घास तो सजावट के काम भी आती है. कुछ ऐसे पेड़ और पौधे भी लगाए जा रहे हैं, जो एक बार लगाने के बाद कई साल तक फल देते हैं और हमारे भोजन के भी काम आते हैं.''

CHHINDWARA no tillage farming
नागपुर में पढ़ाई कर लौटी थी श्वेता (ETV Bharat)
SHWETA BHATKAR READY 300 SEED BANK
छिंदवाड़ा में श्वेता ने बनाया 300 बीजों का सीड बैंक (ETV Bharat)

सालों पहले से चली आ रही बीज सहेजने की प्रक्रिया
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर विजय पराड़कर ने बताया कि, ''जब हाइब्रिड बीज का चलन नहीं हुआ करता था और बाजार में कम उपलब्ध हो पाए थे ऐसे समय में हमारे बुजुर्ग बीज सहजने की प्रक्रिया के तहत ही खेती करते थे. जब फसल पककर आती थी तो उसमें से अच्छी किस्म का बीज साफ सुथरा करके उसे प्राकृतिक तरीके से सुखाकर रखते थे और दूसरे सीजन में फिर उसे खेतों में लगाकर अच्छी उपज लेते थे. यह प्रक्रिया लगातार कई सालों तक चलती रही. लेकिन आधुनिक तकनीक में हाइब्रिड बीज का प्रचलन बढ़ा, क्योंकि इससे खेती करने में उपज ज्यादा मिलती है.''

chhindwara Farming without plowing
बिना हल चलाए 300 तरह के बीज तैयार (ETV Bharat)
CHHINDWARA no tillage farming
जंगली अनाज में भरपूर पोषक (ETV Bharat)

जंगली अनाज में भरपूर पोषक
इस काम में 15 गांव की करीब 40 महिलाएं भी अपना हाथ बटा रही हैं. कई ऐसी बीज भी इकट्ठे किए गए हैं जो जंगल में होते हैं. जैसे जंगली मूंग, उड़द इनमें देशी बीजों से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं, इन्हें करीब 15 गांव की 40 महिलाएं इकट्ठा करती हैं. इनका उद्देश्य है की कई ऐसे पेड़ पौधे भी होते हैं जो साल दर साल हमें फल देते हैं, जरूरी नहीं है कि खेतों में होने वाले अनाज और सब्जियां ही खाने में उपयोग आ सके. जैसे की चिरौंजी महुआ एक बार लगाने से कई सालों तक फल देते हैं और उनके दाम भी काफी अच्छे मिलते हैं. इससे लोगों की आमदनी का जरिया भी बन रहा है.

Last Updated : December 12, 2025 at 5:16 PM IST