ठगी में हुआ आपके आधार कार्ड का उपयोग, नकली पुलिस ने बुजुर्ग को किया डिजिटल अरेस्ट
छिंदवाड़ा बुजुर्ग हुआ हाउस अरेस्ट का शिकार, नकली पुलिस वालों ने करीब डेढ़ घंटे तक बुजुर्ग को डराकर रखा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 12, 2025 at 10:21 AM IST
छिंदवाड़ा: किशोर भास्कर राव ढोक मंदिर से पूजा कर घर में लौटे ही थे कि एक अनजान वीडियो कॉल ने उनके दिल की धड़कन तेज कर दी. जैसी उन्होंने फोन अटेंड किया सामने वाले ने बीएसएनएल के आधिकारी का हवाला देकर कहा कि, 'आपके मोबाइल नंबर की शिकायत हुई है. आप पुलिस ऑफिसर से बात कीजिए.' फिर नकली पुलिस वाले करीब डेढ़ घंटे तक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करके चकमा देने का प्रयास करते रहे.
नकली पुलिस बोली-आधार कार्ड का हुआ उपयोग जाना होगा जेल
भास्कर राव ने बताया कि, ''वीडियो कॉल में एक एक व्यक्ति पुलिस की ड्रेस में बैठा हुआ था और खुद को बाराखंभा का थानेदार बताते हुए बोला कि आपका आधार कार्ड का उपयोग करके ठगी की गई है. आपका आधार कार्ड के चार अंक बताइए. नकली पुलिस वाला ने कहा कि आपको पुलिस गिरफ्तार करेगी मेरी बात ध्यान से सुनिए आप किसी एकांत जगह या कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लीजिए, ताकि किसी तरह के का डिस्टर्ब ना हो. फिर बुजुर्ग एक कमरे में चले गए और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया उनके साथ कुछ देर तक उनकी पत्नी भी थी.''
रीब डेढ़ घंटे तक जालसाज करते रहा बात
बुजुर्ग भास्कर राव के साथ कुछ देर तक उनकी पत्नी भी रही. जालसाज ने कहा कि, तुम दोनों एक साथ रहो बाहर मत जाना. पत्नी ने कहा कि मेरी तबीयत खराब है तो बोला कि जाकर सो जाइए. लेकिन जब काफी देर तक बुजुर्ग कमरे से बाहर नहीं निकले तो महिला ने पड़ोसियों को बताया. पड़ोसी जब गए तो बुजुर्ग दरवाजा खोलने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे. उन्होंने कहा कि मुझे पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट किया है. इस दौरान जालसाज बुजुर्ग से करीब डेढ़ घंटे तक बात करते रहे और उन्हें डराते धमकाते रहे.

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असली पुलिस को नकली बात कर दी धमकी
पड़ोसियों ने कोतवाली थाना प्रभारी को फोन किया मौके पर पहुंचे. कोतवाली थाना प्रभारी आशीष धुर्वे ने बताया कि, ''जैसे ही हम घर पहुंचे तो बुजुर्ग दरवाजा नहीं खोल रहे थे. हमने बुजुर्ग को समझाइश दी कि पुलिस डिजिटल अरेस्टिंग जैसी कोई कार्रवाई नहीं करी. उसके बाद दरवाजा खोला तो जालसाजों से भी वीडियो कॉल में बात की. पहले तो वह हमें ही नकली पुलिस बता रहे थे फिर बाद में उन्होंने कॉल कट कर दिया.''
क्या होती है डिजिटल अरेस्ट कैसे फंसाते हैं ठग
साइबर एक्सपर्ट आंनद पटेल ने बताया कि, ''डिजिटल अरेस्ट एक तरह की साइबर धोखाधड़ी है, जिसमें ठग खुद को CBI, पुलिस या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल के जरिए आपको डराते हैं और झूठे कानूनी मामलों (जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी) में फंसाने की धमकी देते हैं, फिर आपकी जान बचाने या केस से बचने के बहाने पैसे ऐंठ लेते हैं. इसमें असली कानूनी गिरफ्तारी शामिल नहीं होती, बल्कि डर और धोखे का इस्तेमाल करके आपको ऑनलाइन बंधक बनाया जाता है, ताकि आप पैसे ट्रांसफर कर दें या निजी जानकारी दें.''

