शास्त्रीय कलाकारों का छिंदवाड़ा में लगा जमावड़ा, दिग्गज कलाकारों ने मंच पर बांधा समां
छिंदवाड़ा में 2 दिवसीय कला संगम, शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत महोत्सव का आयोजन, पद्मश्री कलाकारों ने दी प्रस्तुति. महेंद्र राय की रिपोर्ट

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 2, 2026 at 2:30 PM IST
छिंदवाड़ा: श्री बादल भोई राज्य जनजातीय संग्रहालय ओपन ऑडिटोरियम में 2 दिवसीय कला संगम, शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत महोत्सव का 5वां संस्करण आयोजन किया गया. जिसमें पद्मश्री से लेकर देशभर के दिग्गज कलाकारों ने मंच पर समां बांधा. कला संगम के निर्देशक अमित डोले ने बताया कि "उनका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय कलाओं को बढ़ावा देना और स्थानीय जनता को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना है."
दिग्गज कलाकारों ने एक साथ मंच पर किया प्रदर्शन
यह महोत्सव कलाप्रेमियों के लिए एक दुर्लभ अवसर था, जहां वे एक ही मंच पर विभिन्न शास्त्रीय विधाओं के दिग्गजों एक साथ प्रदर्शन किया. इस वर्ष महोत्सव की शोभा बढ़ाने के लिए देश के कोने-कोने से प्रख्यात कलाकार पधारे थे. पहले दिन दिल्ली के धीरेन्द्र तिवारी ने कथक नृत्य, चेन्नई की श्वेता प्रचांडे ने भरतनाट्यम और छिंदवाड़ा के अमित डोले ने भरतनाट्यम नृत्य में अपनी प्रतिभा दिखाई.
सांसद ने आयोजन को बताया प्रशंसनीय
छिंदवाड़ा सांसद बंटी विवेक साहू ने कहा, "पद्मश्री कलाकारों के द्वारा छिंदवाड़ा में आकर शास्त्रीय नृत्य सहित अन्य विधाओं में प्रस्तुति दिया जाना छिंदवाड़ा के लिए गौरव की बात है. कला संगम द्वारा किया गया यह संगीत महोत्सव का आयोजन प्रशंसनीय है."

पद्मश्री कलाकारों ने दी प्रस्तुति
कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में पद्मश्री डॉ. अरुणा मोहंती और उनके ग्रुप (भुवनेश्वर) ने ओडिसी नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुति देकर दर्शकों को ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से परिचित कराया. उनकी भाव, लय एवं अभिव्यक्ति से परिपूर्ण प्रस्तुति ने सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया.

इसके पश्चात रंजीत बाबू एवं विजिना वासुदेवन चेन्नई ने भरतनाट्यम की युगल प्रस्तुति दी, जिसमें ताल, नृत्य तकनीक एवं भावों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला. दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया. कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति केरल की प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना श्रीलक्ष्मी गोवर्धनन द्वारा दी गई.
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दो दिवसीय इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की विविधता एवं समृद्धि का अद्भुत परिचय दिया. कला संगम ने एक बार फिर छिंदवाड़ा को राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक मंच के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

