असिस्टेंट कमिश्नर पहुंचे स्कूल तो खुली शिक्षा की पोल, हिंदी नहीं पढ़ पाए बच्चे, गणित में भी जीरो
सरकारी स्कूल पहुंचे छिंदवाड़ा के असिस्टेंट कमिश्नर, बच्चों को नहीं आया पढ़ना, स्कूल में मौज करने वाले 2 टीचर पर हुई कार्रवाई.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 9:45 AM IST
|Updated : January 10, 2026 at 11:51 AM IST
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के असिस्टेंट कमिश्नर अचानक आदिवासी इलाकों के स्कूल में पहुंचे. उन्होंने बच्चों से हिंदी की पुस्तक पढ़ने के लिए कहा तो बच्चों को पढ़ना नहीं आया और ना ही गणित के सवाल हल कर पाए. असिस्टेंट कमिश्नर ने इस मामले में शिक्षकों से सवाल जवाब किए की आखिर कैसी पढ़ाई चल रही है जो बच्चे पढ़ नहीं पा रहे. असिस्टेंट कमिश्नर ने शिक्षकों पर कार्रवाई भी की.
बच्चों को नहीं आया पढ़ना, दो टीचर सस्पेंड
जनजातीय कार्य विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सतेन्द्र सिंह मरकाम ने बताया कि, ''विकासखंड परासिया के आदिवासी बालक आश्रम अम्बाड़ा में पदस्थ प्राथमिक शिक्षिका चारूलता ठोम्बरे एवं ऊषा यादव को आश्रम के बच्चों का शैक्षणिक स्तर कमजोर पाए जाने पर दोनों को सस्पेंड किया गया है. क्योंकि उन्होंने विकासखंड परासिया के आदिवासी बालक आश्रम अम्बाड़ा का आकस्मिक निरीक्षण किया था. निरीक्षण के दौरान संस्था में पदस्थ प्राथमिक शिक्षिका चारूलता ठोम्बरे एवं ऊषा यादव उपस्थित पाई गईं.

इस दौरान आश्रम के बच्चों से जब हिंदी की पुस्तक पढ़ाई गई तो वह पढ़ नहीं सके. साथ ही गणित विषय में भी बच्चों का ज्ञान शून्य है. इससे जाहिर होता है कि इन शिक्षक बच्चों को ठीक से पढ़ाई नहीं करवाते हैं. इसलिए मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1965 के विरूद्ध होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है तथा शैक्षणिक कार्य के प्रति उदासीनता को प्रदर्शित करता है.''
निर्माण कामों की सब इंजीनियर से मांगी रिपोर्ट
जनजातीय कार्य विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सतेन्द्र सिंह मरकाम ने आदिवासी बालक आश्रम अंबाड़ा के निरीक्षण के दौरान आश्रम परिसर में चल रहे मरम्मत कामों का निरीक्षण किया. मरम्मत कामों की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की गई, जांच में कामों में अनियमितता एवं गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर सब इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस जारी कर ठेकेदार पर भी कार्रवाई की गई है.

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बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर जाना हकीकत
असिस्टेंट कमिश्नर सत्येंद्र सिंह मरकाम ने आदिवासी आश्रम में छोटे बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर उनसे पढ़ाई के बारे में और आश्रम में मिलने वाले खाना और रहने की व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके बाद सभी छात्रावास अधीक्षक और शिक्षकों को निर्देश दिया है कि जब अगली बार वे निरीक्षण में पहुंचेंगे तो इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

