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अफ्रीका से आया मानसून का पोस्टमैन जैकोबिन, बारिश शुरु करा अंडे छोड़ लौटता है दूसरे महादेश

छिंदवाड़ा में दिखा मानसून अलार्म के नाम से फेमस दुर्लभ पक्षी जैकोबिन कुकू, अफ्रीका से उड़कर सागर पार करते हुए पहुंचा,भारत में कहते हैं चातक.

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छिंदवाड़ा में दिखा मानसून का पोस्टमैन जैकोबिन कुकू (Photo credit: Manisha Parihar)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : June 26, 2026 at 5:02 PM IST

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Updated : June 26, 2026 at 6:18 PM IST

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छिंदवाड़ा: डाकिया जब घरों के सामने साइकिल की घंटी बजाता था, तो आसानी से समझ लिया जाता था कि कोई चिट्ठी आई है. ऐसा ही एक डाकिया पक्षी अफ्रीका में पाया जाता है. जिसे मानसून का पोस्टमैन कहा जाता है. ये पक्षी छिंदवाड़ा के पोआमा नर्सरी में पहली बार देखा गया है. जिसे जैकोबिन कुकू कहा जाता है. छिंदवाड़ा की समृद्ध जैव-विविधता और न्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है.

मानसून का डाकिया कहलाता है पक्षी

पक्षी विशेषज्ञ मनीषा परिहार ने बताया कि "जैकोबिन कुकू भारतीय संस्कृति, साहित्य और लोककथाओं में विशेष स्थान रखता है. इसे भारत में चातक कहा जाता है. मान्यता के अनुसार चातक केवल वर्षा की बूंदों का जल ग्रहण करता है. मनीषा परिहार ने बताया कि यह पक्षी मानसूनी हवाओं के साथ अफ्रीका से उड़कर अरब सागर पार करते हुए भारत पहुंचता है. इसकी उपस्थिति को मानसून के सक्रिय होने का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है. इसके आने के बाद माना जाता है कि अब मानसून पूरी तरीके से सक्रिय हो जाएगा और बारिश भी ठीक तरीके से होगी."

छिंदवाड़ा में दिखा जैकोबिन कुकू पक्षी (ETV Bharat)

दूसरों के घोसलों में रखता है अंडे, फिर अफ्रीका लौट जाता है

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार जैकोबिन कुकू ब्रूड पैरासिटिज्म का उत्कृष्ट उदाहरण है. यह पक्षी अपना घोंसला स्वयं नहीं बनाता, बल्कि अपने अंडे दूसरे पक्षियों, विशेषकर बैबलर (सातभाई) जैसे पक्षियों के घोंसलों में देता है. लगभग पांच महीने तक भारत में रहने के बाद सितंबर-अक्टूबर के दौरान यह अपने विकसित हो चुके बच्चों के साथ वापस अफ्रीका लौट जाता है.

जिले में दिखा पहली बार जमीन में नहीं हवा रहने वाला है ये पक्षी

मानसून अलार्म के रूप में प्रसिद्ध दुर्लभ प्रवासी पक्षी जैकोबिन कुकू जिसे उत्तर भारत में चातक के नाम से जाना जाता है, की जिले में पहली बार आधिकारिक रूप से रिकॉर्डिंग की गई है. वन्यजीव फोटोग्राफर्स एवं पक्षी विशेषज्ञों की टीम ने इस दुर्लभ पक्षी को न केवल देखा, बल्कि इसके उच्च गुणवत्ता वाले रिकॉर्ड शॉट्स भी कैमरे में कैद किए हैं. यह दुर्लभ पक्षी वन विभाग द्वारा विकसित व संरक्षित पोआमा नर्सरी परिसर में देखा गया.

विशेषज्ञों के अनुसार नर्सरी में विकसित विविध वनस्पतियां, प्राकृतिक संरचना व सुरक्षित वातावरण इस प्रजाति के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करते हैं. वन विभाग के संरक्षण प्रयासों के परिणामस्वरूप यहां एक संतुलित एवं समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है, जिसने इस दुर्लभ प्रवासी पक्षी को आकर्षित किया. इस पक्षी में एक खास बात और है कि हवा के साथ-साथ पेड़ों पर ही ज्यादा रहता है. यह जमीन पर कम उतरता है. हवा के साथ-साथ ही चलता है.

CHHINDWARA JACOBIN CUCKOO BIRD
अफ्रीकन जैकोबिन कुकू पक्षी (Photo credit: Manisha Parihar)

विशेषज्ञों के अनुसार नर्सरी में विकसित विविध वनस्पतियां, प्राकृतिक संरचना व सुरक्षित वातावरण इस प्रजाति के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करते हैं. वन विभाग के संरक्षण प्रयासों के परिणामस्वरूप यहां एक संतुलित एवं समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है, जिसने इस दुर्लभ प्रवासी पक्षी को आकर्षित किया.

वन विभाग की सरकारी नर्सरी है पोआमा

पक्षी विशेषज्ञ मनीष परिहार ने बताया कि "पोआमा नर्सरी एक सरकारी वन विभाग की नर्सरी है और बहुत अच्छा हैबिटैट है, क्योंकि वहां पर पानी की उपलब्धता है और काफी अच्छा प्लांटेशन है. हम सिटीजन वॉक के लिए कुछ लोगों को पोआमा नर्सरी ले गए थे, जहां ये जैकोबिन कुकू पक्षी हमें दिखा. सबसे बड़ा हाइलाइट यह रहा कि मानसून माइग्रेटरी का ये जैकोबिन कुकू या पाइड कुकू वहां पर मिला जो अफ्रीका से भारत आता है, मानसून के सीज़न में इसके बाद यहीं पर रहकर ब्रीडिंग करता है.

हैबिटैट के बारे में ये है कि एक बहुत बड़ा वाटर पोंड है. वहां पर सूखा था, लेकिन नर्सरी की वजह से जो पानी डाला जा रहा था, वो बोर से सिंचाई हो रही थी. उस वजह से वहां पर काफी नमी थी. उस हैबिटैट में हमें बहुत सारे जंगल बैबलर्स, बुलबुल्स और पराडाइज फ्लाईकटर्स फिर ओरिएंटल हनी बजार और डव्स एक ही जगह पर बहुत सारी प्रजातियां मिलीं. इसके अलावा वहां पर कॉमन आयोरा भी थी, मोर दिख रहे थे तो बहुत अच्छा और रिच डाइवर्सिटी लगी.

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मानसून का डाकिया कहलाता है पक्षी (Photo credit: Manisha Parihar)

उस जगह की एक चीज जो देखने योग्य है या समझने योग्य है, वो यह है कि वहां पर केंचुए के बेड लगे हुए हैं और जैविक खाद बनाई जाती है. ये भी एक वजह है कि भोजन की आसानी से उपलब्धता वहां पर हो जाती है. जिस वजह से इतने सारे बर्ड्स मैगपाय रॉबिन और सिल्वरबिल ये सब भी वहां दिख रहे थे."

Last Updated : June 26, 2026 at 6:18 PM IST