छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: भावना बोहरा ने उठाया गो-वंश और सांस्कृतिक आयोजनों का मुद्दा
विधानसभा में बजट सत्र के पांचवें दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने गो-वंश संरक्षण एवं संवर्धन और सांस्कृतिक आयोजनों के विषय में प्रश्न किया.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 27, 2026 at 4:57 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने प्रदेश में गो-वंश संरक्षण, गौशालाओं की स्थिति और सांस्कृतिक आयोजनों में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने गौशालाओं में चारा, पानी, शेड, पशु-चिकित्सा, टीकाकरण और निराश्रित गो-वंश के संरक्षण की व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगी.
प्रदेश में 189 गौशालाएं संचालित
लिखित जवाब में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि राज्य में अभी 135 पंजीकृत और 54 अपंजीकृत, कुल 189 गौशालाएं संचालित हैं. गौ-वंश संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग द्वारा गौशालाओं और गौधामों का पंजीयन किया जाता है. वर्ष 2024-25 में 135 पंजीकृत गौशालाओं को 1922 लाख रुपये अनुदान दिया गया. वहीं आदर्श गौधाम एवं गोकुल ग्राम झालम (जिला बेमेतरा) के लिए 29.75 लाख रुपये जारी किए गए.
नस्ल सुधार और संवर्धन के लिए योजनाएं
मंत्री ने बताया कि गो-वंश संवर्धन के लिए पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम, कृत्रिम गर्भाधान योजना, 100 प्रतिशत अनुदान पर सांड वितरण योजना और उन्नत मादा वत्सपालन योजना चलाई जा रही हैं. वर्ष 2024-25 में नस्ल सुधार कार्यक्रम के लिए 3 करोड़ 35 लाख 85 हजार रुपये से अधिक, सांड वितरण योजना के लिए 80.50 लाख रुपये और उन्नत मादा वत्सपालन योजना के लिए 249.90 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं.
गौशालाओं में सुविधाओं के लिए विशेष प्रावधान
गौशालाओं में चारा, पानी, शेड निर्माण, पशु-चिकित्सा और टीकाकरण जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आयोग की बैठक में अनुमोदन के बाद अनुदान दिया जाता है. एक संस्था को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 25 लाख रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान है. सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गो-वंश की पहचान के लिए रेडियम पट्टी लगाने और संरक्षण के लिए गौधाम योजना संचालित की जा रही है.
सांस्कृतिक आयोजनों में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता
सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2024-25 में विभाग द्वारा 2662 कार्यक्रम, जिलों द्वारा 52 कार्यक्रम और अशासकीय संस्थाओं द्वारा 504 सांस्कृतिक आयोजन किए गए. इन पर क्रमशः 14,76,50,002 रुपये, 3,78,29,000 रुपये और 9,87,59,000 रुपये खर्च किए गए. विभागीय आयोजनों में 100 प्रतिशत स्थानीय कलाकारों को मौका दिया गया, जबकि जिला और अन्य संस्थाओं के कार्यक्रमों में कुल बजट का 45 प्रतिशत स्थानीय कलाकारों के भुगतान के लिए तय किया गया है.

