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छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान, संस्कृति और विरासत को भी नई पहचान : मंत्री राजेश अग्रवाल

मंत्री ने कहा 2028 तक नई पर्यटन पहचान का लक्ष्य, चित्रकोट सिरपुर से धार्मिक पर्यटन तक व्यापक कार्ययोजना.

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छत्तीसगढ़ पर्यटन मंत्री (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 26, 2026 at 9:11 AM IST

13 Min Read
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रायपुर: रायपुर में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है. चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने, सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में आगे बढ़ाने, निजी निवेश आकर्षित करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने और छत्तीसगढ़ की लोककला-संस्कृति को डिजिटल रूप से संरक्षित करने की व्यापक कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है. यह जानकारी मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में दी.

प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, बस्तर और सरगुजा की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सिरपुर जैसी ऐतिहासिक विरासत और मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों की समृद्ध विरासत प्रदान की है. सरकार का लक्ष्य इन प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं को देश और दुनिया के सामने नई पहचान दिलाना है.

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन द्वारा छत्तीसगढ़ पर्यटन से संबंधित उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की प्रस्तुति से हुई. इस दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम पूनम शर्मा भी उपस्थित रहीं.

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रायपुर में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस (ETV Bharat Chhattisgarh)

पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा

मंत्री ने बताया पिछले लगभग ढाई वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं. फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 350 करोड़ रुपये है.

61 ट्रेनों से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी के दर्शन

रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का सफल संचालन किया जा चुका है. इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए जा चुके हैं. सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को अधिक सुगम, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है.

होमस्टे से स्थानीय परिवारों और युवाओं को मिलेगा लाभ

पर्यटन का वास्तविक लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचाने के लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के अवसर बढ़ेंगे. पर्यटन व्यवसाय के औपचारिक पंजीकरण में भी वृद्धि हुई है. वर्तमान में लगभग 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट और 26 होटल पंजीकृत हैं. पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.

चित्रकोट को बनाया जाएगा विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य

छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल चित्रकोट को केवल जलप्रपात के रूप में नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की तैयारी है.वहीं सिरपुर के विस्तृत पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. मैनपाट और जशपुर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में भी पर्यटक सुविधाओं और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं.

भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 145.99 करोड़ रुपये स्वीकृत

धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने पर जोर दिया जा रहा है. भारत सरकार ने भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145 करोड़ 99 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं. रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों के विकास के प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजे गए हैं.

डिजिटल पर्यटन को मिल रहा विस्तार

आज का पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत मोबाइल फोन से करता है. इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल सूचना और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है. पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से लगभग 6 करोड़ 48 लाख रुपये तथा पर्यटन इकाइयों से लगभग 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है.

2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान का लक्ष्य

राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया के सामने स्थापित करने का लक्ष्य रखा है. मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में कार्य किया जा रहा है. प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी.

18 पर्यटन संपत्तियों के विकास में निजी भागीदारी

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है.इससे लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर होगी छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग

छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे ले जाने की तैयारी है. इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए राज्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी, फिल्म एवं ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच और अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं.

कलाकारों के कल्याण पर विशेष जोर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने संस्कृति विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है. कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के अंतर्गत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को लगभग 30 लाख 3 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15 लाख 30 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है.

लोक कलाकारों और लेखकों को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के माध्यम से नृत्य, संगीत, लोकनाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी भाषा में लेखन तथा अन्य शिल्प एवं लोककलाओं से जुड़े कलाकारों और लेखकों को संरक्षण एवं आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है. पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को लगभग 19 लाख 8 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई है.

407 वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को पेंशन

वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को 82 लाख 12 हजार रुपये की राशि पेंशन के रूप में प्रदान की गई है. वर्तमान वर्ष में अब तक 121 वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को योजना का लाभ दिया जा चुका है.

89 मेला-मड़ई और उत्सवों के जरिए संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल

प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूचीबद्ध 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव एवं समारोहों का आयोजन जिला प्रशासन के सहयोग से पूरे वर्ष किया जा रहा है. एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए स्थानीय परंपराओं, तीज-त्योहार, यात्रा, मेला-मड़ई तथा ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धार्मिक स्थलों पर सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन के लिए ‘आदि पर्व’ पंचांग तैयार किया जा रहा है.

बस्तर पंडुम से जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान

बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक और जिला स्तर पर बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है. इस वर्ष बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों तथा पद्मश्री विभूतियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से आत्मीय भेंट एवं सम्मान का अवसर मिला.

लोककलाओं और लोकवाद्यों के संरक्षण के लिए नए आयोजन

पावस प्रसंग, रंगतरंग, रंगपरब और लोकरंग पर्व जैसे आयोजनों के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य-संगीत, लोकवाद्य, लोकनाट्य तथा पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी पारंपरिक लोकविधाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है. इन आयोजनों का उद्देश्य कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है.

लोकसंस्कृति का तैयार हो रहा डिजिटल आर्काइव

छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विस्तृत डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है. यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोक परंपराओं और विरासत को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने की महत्वपूर्ण पहल है.

सांस्कृतिक संस्थाओं को 7.85 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

कला और संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रही अशासकीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 7 करोड़ 85 लाख 3 हजार रुपये की आर्थिक अनुदान राशि स्वीकृत की गई है.

नई फिल्म नीति तैयार करने की प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म नीति-2021 में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया चल रही है. संशोधनों के साथ नई फिल्म नीति तैयार की जाएगी. इसका उद्देश्य प्रदेश के प्राकृतिक एवं खूबसूरत स्थलों पर फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करना और पात्र फिल्मों को सब्सिडी का लाभ उपलब्ध कराना है.

सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल

पुरातत्व विभाग की उपलब्धियों में सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की पहल प्रमुख है. सिरपुर में बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का अद्भुत सह-अस्तित्व देखने को मिलता है. सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है.

63 संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर काम

प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों का संरक्षण किया जा रहा है. वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 राज्य संरक्षित स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन और पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।सरकार का दृष्टिकोण है कि धरोहर संरक्षण और संवर्धन के साथ पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिले.

रायपुर संग्रहालय में नई रियासत गैलरी

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के उन्नयन के लिए नई रियासत गैलरी की स्थापना तथा वर्तमान गैलरियों के उन्नयन एवं विकास का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. वहीं पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. इसके लिए शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के साथ छत्तीसगढ़ की मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को केंद्र में रखकर स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है.

12 लाख पृष्ठों का डिजिटल अभिलेखीकरण

छत्तीसगढ़ से संबंधित लगभग 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है. इन डिजिटल अभिलेखों को वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए कैटलॉग एवं मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है.

2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण

पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन कराया जा चुका है. रायपुर जिले के आरंग तहसील में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में हुए पुरातात्विक उत्खनन से लगभग 2750 साल पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण सामने आए हैं।उत्खनन में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से लेकर कलचुरी काल तक के अवशेष तथा विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के मिले हैं.

पर्यटन, संस्कृति और रोजगार को एक साथ आगे बढ़ाने का लक्ष्य

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है.उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है.

छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति में अब विकास के साथ विरासत संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और रोजगार को भी केंद्र में रखा जा रहा है. चित्रकोट और सिरपुर से लेकर भोरमदेव और रतनपुर तक, बस्तर की जनजातीय संस्कृति से लेकर लोककलाओं और डिजिटल अभिलेखागार तक सरकार की कोशिश छत्तीसगढ़ की पहचान को राज्य की सीमाओं से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की है. वर्ष 2028 का लक्ष्य इसी व्यापक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.

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