Explainer: छत्तीसगढ़ में EV बूम, पर चार्जिंग की रफ्तार सुस्त, बढ़ती बिक्री और सीमित चार्जिंग पॉइंट के बीच बढ़ी चिंता, नई गाइडलाइन से बदलेगा परिदृश्य?
छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक व्हीकल की भरमार के बावजूद चार्जिंग स्टेशन में कमी पर राजनीति हो रही है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 20, 2026 at 2:37 PM IST
प्रवीण सिंह की रिपोर्ट
रायपुर: सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं और बढ़ती जागरूकता के चलते छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री लगातार बढ़ रही है. सड़कों पर ई-स्कूटर, ई-रिक्शा और ई-कार की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उसी रफ्तार से विकसित नहीं हो पाया. अब चार्जिंग स्टेशन और सीएनजी पंप को लेकर पहली बार स्पष्ट गाइडलाइन जारी की गई है. हालांकि विपक्ष का आरोप है कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं और 100 ईवी सिटी बसों की घोषणा आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी.इन्हीं सवालों, ईवी की बढ़ती मांग, सीमित चार्जिंग पॉइंट और सरकार की नई तैयारी पर आधारित है ईटीवी भारत की यह विस्तृत रिपोर्ट.
छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक व्हीकल की वर्तमान स्थिति
छत्तीसगढ़ में अब तक लगभग 1,73,618 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीयन हो चुका है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है. राज्य में करीब 271 से 290 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें अधिकांश बड़े शहरों में स्थित हैं. रायपुर जैसे शहरों में चार्जिंग शुल्क लगभग 18 रुपये प्रति यूनिट है. सरकार ने 1000 नए चार्जिंग स्टेशन लगाने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा 60 हजार से ज्यादा वाहन स्वामियों को 125 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है और आगामी वित्तीय वर्ष में 110 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है.

चार्जिंग स्टेशन की कमी पर सियासत
छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद चार्जिंग पॉइंट सीमित हैं. उपभोक्ताओं को अक्सर चार्जिंग स्टेशन ढूंढने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं. पूर्व में 100 ईवी सिटी बसें चलाने की घोषणा की गई थी, लेकिन उसका अब तक कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आया. विपक्ष का कहना है कि चार्जिंग स्टेशन "ढूंढे से नहीं मिलते."

ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा: नगर निगम आयुक्त
हालांकि सरकार का दावा है कि जरूरत के अनुरूप व्यवस्थाएं लगातार विकसित की जा रही हैं. शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बढ़ती संख्या को देखते हुए रायपुर नगर निगम ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने की दिशा में सक्रिय हो गया है. इस संबंध में नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा कि निगम का पूरा प्रयास जारी है और फाइनेंस डिपार्टमेंट स्तर पर भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं.

आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहर के अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, उन्हें प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने, सुविधाओं को सुलभ बनाने और आधुनिक शहरी ढांचे के अनुरूप योजनाओं को लागू करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
पहली बार बनी स्पष्ट नीति
आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी कर चार्जिंग स्टेशन और सीएनजी पंप के लिए पहली बार स्पष्ट नियम तय किए गए हैं. विभाग का कहना है कि पहले स्पष्ट गाइडलाइन नहीं होने के कारण स्थापना में कई तरह की प्रशासनिक अड़चनें आ रही थीं. अब नई नीति के तहत नियम और शर्तें स्पष्ट कर दी गई हैं. साथ ही आम लोगों से 24 फरवरी तक सुझाव भी मांगे गए हैं. तय समय के बाद आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएंगी.
अपार्टमेंट और कॉम्प्लेक्स में भी खुलेंगे स्टेशन
नई गाइडलाइन के तहत अब निजी अपार्टमेंट, रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स, इंडस्ट्रियल एरिया, शॉपिंग मॉल, विकास केंद्र और स्टेट व नेशनल हाइवे पर भी चार्जिंग स्टेशन खोले जा सकेंगे. पहले यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से जिला प्रशासन और नगर निगम तक सीमित थी, लेकिन अब निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है. सरकार का मानना है कि निजी निवेश बढ़ने से चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार होगा.
जमीन और सुरक्षा से जुड़े प्रावधान
नए नियमों के अनुसार चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए न्यूनतम 13.5 मीटर x 5.5 मीटर भूमि आवश्यक होगी. 30 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर अनुमति नहीं दी जाएगी. साथ ही विस्फोटक विभाग और अग्निशमन विभाग से एनओसी अनिवार्य होगी. सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता भी जरूरी होगी.

सीएनजी पंप के लिए 1080 वर्गमीटर (36x30 मीटर) जमीन की आवश्यकता होगी और 30 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर अनुमति नहीं मिलेगी. स्टेट और नेशनल हाइवे पर प्रत्येक 25 किलोमीटर की दूरी पर सार्वजनिक चार्जिंग केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे. फास्ट चार्जिंग, पार्किंग और रेस्टोरेंट की सुविधा भी अनिवार्य रखी गई है.
इलेक्ट्रिक वाहन नीति के प्रावधान
राज्य सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत प्रत्येक इलेक्ट्रिक वाहन क्रेता को वाहन मूल्य का 10 प्रतिशत या अधिकतम 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है. साथ ही ईवी वाहनों के जीवनकाल कर में 50 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है. सरकार का मानना है कि चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ने से ईवी वाहनों की बिक्री और तेज होगी और चार्जिंग शुल्क में भी कमी आएगी.

चुनौती और उम्मीद
प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को उसी गति से विकसित करना बड़ी चुनौती है. ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क अभी भी सीमित है. हालांकि नई गाइडलाइन और निजी क्षेत्र की भागीदारी से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में चार्जिंग सुविधाएं ज्यादा सुलभ होंगी.
अब देखना होगा कि नई अधिसूचना और तय किए गए नियम जमीन पर कितनी तेजी से लागू होते हैं और क्या सरकार बढ़ती मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच की खाई को पाट पाती है या नहीं.

