खा गए शक्कर, पी गए तेल...', 90 के दशक के नारे की याद दिलाकर मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना
महंगाई के मुद्दे पर मुखर कांग्रेस, शक्कर के बढ़ते दाम पर प्रदर्शन से पहले स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया पलटवार

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 24, 2026 at 2:10 PM IST
रायपुर: खा गए शक्कर, पी गए तेल, वाह रे... तेरा खेल. 90 के दशक में महंगाई को लेकर लगाया जाने वाला यह नारा अब एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में है. छत्तीसगढ़ में दाल, चावल, गेहूं और शक्कर के बढ़ते दामों को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार को घेर रही है. लेकिन कांग्रेस के हमले के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इसी पुराने नारे को हथियार बनाकर कांग्रेस पर पलटवार किया है.
कांग्रेस महंगाई के मुद्दे पर मुखर
छत्तीसगढ़ में खाद्य सामग्रियों के बढ़ते दामों को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार पर हमला कर रही है. कांग्रेस का आरोप है कि दाल, चावल, गेहूं और शक्कर की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कालाबाजारी और कमीशनखोरी जिम्मेदार है. कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है.
मंत्री ने पुराने दौर की दिलाई याद
लेकिन कांग्रेस के इस हमले पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ऐसा पलटवार किया कि बहस सीधे पुराने दौर की महंगाई तक पहुंच गई. श्याम बिहारी जायसवाल ने राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहने के समय का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब उस दौर में शक्कर के दाम बढ़ रहे थे, तब क्या महंगाई नहीं बढ़ रही थी?
मंत्री ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए 90 के दशक में लगाए जाने वाले नारे की याद दिलाई. खा गए शक्कर, पी गए तेल, वाह रे... तेरा खेल. इस नारे के जरिए उन्होंने कांग्रेस के पुराने शासनकाल पर सवाल खड़े किए और मौजूदा महंगाई को लेकर कांग्रेस के हमले को उसी के पुराने दौर से जोड़ने की कोशिश की.
स्वर्गीय राजीव गांधी के समय तो एथेनॉल प्लांट नहीं था तब कैसे शक्कर के दाम बढ़े थे. उस समय भी नारा चला था, मैं नाम नहीं लूंगा लेकिन कहते थे कि खा गए शक्कर, पी गए तेल, वाह रे... तेरा खेल: श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री
मांग और आपूर्ति को बताया महंगाई की वजह
श्याम बिहारी जायसवाल ने यह भी कहा कि महंगाई केवल छत्तीसगढ़ की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा मुद्दा है. उनके मुताबिक महंगाई मांग और आपूर्ति के संतुलन से प्रभावित होती है. जब मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होती है तो कीमतें बढ़ती हैं, जबकि आपूर्ति बढ़ने पर दाम नीचे आते हैं.
रसोई के मुद्दे पर सियासी घमासान
यानी एक तरफ कांग्रेस आज की महंगाई को मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा पुराने दौर के महंगाई वाले नारों की याद दिलाकर कांग्रेस पर पलटवार कर रही है.

