छत्तीसगढ़ में ढाई साल में 9 विधायकों पर FIR, कानून का राज या 'बदलापुर' की राजनीति?, जानिए वजह और कानूनी कार्रवाई
भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में कांग्रेस के 7 विधायकों पर FIR, कानूनी कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोप पर प्रवीण सिंह की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 4, 2026 at 11:11 PM IST
रायपुर: हाल ही में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो पर नायब तहसीलदार से मारपीट के आरोप में FIR हुई है. इसके बाद से छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया आंकड़ा सियासी बहस का केंद्र बन गया है. भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में 9 विधायकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई है.
इनमें कांग्रेस के 7 और भाजपा के 2 विधायक शामिल हैं. कांग्रेस इसे विपक्ष को दबाने और छवि खराब करने की साजिश बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और अपराध करने वालों पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ये कार्रवाई कानून के दायरे में हो रही है या फिर राजनीतिक प्रतिशोध की नई पटकथा लिखी जा रही है?
9 विधायकों पर FIR और उसकी वजह
- रामकुमार टोप्पो (भाजपा विधायक, सीतापुर): तहसीलदार विवाद
मई 2026 में सीतापुर के भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई. इस घटना के विरोध में प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आंदोलन पर उतर आए थे. मामला प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनिधियों के संबंधों को लेकर बड़े विवाद का कारण बना.
- देवेंद्र यादव (कांग्रेस विधायक, भिलाई नगर): दो मामलों में घिरे विधायक
भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ जून 2024 में बलौदाबाजार हिंसा प्रकरण में एफआईआर दर्ज हुई थी. इसके बाद मई 2026 में बेमेतरा जिले की घटना को लेकर दिए गए बयान पर भी उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया. दोनों मामलों ने प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस छेड़ी.

- कवासी लखमा (कांग्रेस विधायक, कोंटा) : शराब घोटाले की जांच
कोंटा से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ कथित शराब घोटाले में एफआईआर दर्ज हुई. आबकारी नीति और शराब कारोबार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई लंबे समय तक राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही.
- भूपेश बघेल (कांग्रेस विधायक, पाटन एवं पूर्व मुख्यमंत्री): महादेव एप मामले में बढ़ी मुश्किलें
पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन से कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल का नाम महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप मामले में सामने आया. जांच एजेंसियों की कार्रवाई और एफआईआर के बाद यह मामला प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच गया.
- व्यास नारायण कश्यप (कांग्रेस विधायक, चांपा): आंदोलन से गिरफ्तारी तक
कांग्रेस विधायक व्यास नारायण कश्यप के खिलाफ फरवरी 2026 में प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान कानून व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था. कांग्रेस ने इसे विपक्षी नेताओं को दबाने की कार्रवाई बताया.
- बालेश्वर साहू (कांग्रेस विधायक, जैजैपुर): सहकारी बैंक मामले में जेल तक पहुंचे
जैजैपुर से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू के खिलाफ सहकारी बैंक से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले में जनवरी 2026 में एफआईआर दर्ज हुई. मामले में कार्रवाई के दौरान उन्हें जेल भी भेजा गया था.
- रायमुनी भगत (भाजपा विधायक, जशपुर): बयान बना विवाद का कारण
जशपुर की भाजपा विधायक रायमुनी भगत के खिलाफ जनवरी 2025 में एक कथित विवादित बयान को लेकर शिकायत दर्ज हुई, जिसके बाद एफआईआर की कार्रवाई हुई. यह मामला सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के विरोध के कारण चर्चा में रहा.
- उत्तरी जांगड़े (कांग्रेस विधायक, सारंगढ़): वायरल वीडियो से बढ़ी मुश्किलें
सारंगढ़ से कांग्रेस विधायक उत्तरी जांगड़े के खिलाफ नवंबर 2024 में एक वायरल वीडियो को लेकर मामला दर्ज किया गया. आरोप था कि उन्होंने भाषण के दौरान कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी की थी. शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की.
- डॉ. चरणदास महंत (कांग्रेस विधायक, सक्ती एवं विधानसभा अध्यक्ष): चुनावी बयान पर कानूनी कार्रवाई
सक्ती से कांग्रेस विधायक और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत के खिलाफ लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दिए गए एक बयान को लेकर एफआईआर दर्ज हुई. भाजपा ने बयान को आपत्तिजनक बताते हुए शिकायत की थी, जिसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा.
कांग्रेस का आरोप- 'बदलापुर मॉडल' पर चल रही सरकार
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर का आरोप है कि भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने के लिए चुन-चुनकर एफआईआर दर्ज करा रही है. उनका कहना है कि कई मामलों में नेताओं को जेल भेजा गया लेकिन बाद में अदालतों से राहत भी मिली. कांग्रेस का दावा है कि यह कानून नहीं बल्कि राजनीतिक बदले की कार्रवाई है.
भाजपा का जवाब- अपराध किया है तो कार्रवाई होगी
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर का कहना है कि सरकार ने किसी दल को देखकर कार्रवाई नहीं की है. उनके अनुसार बलौदाबाजार हिंसा, शराब घोटाला, महादेव एप और अन्य मामलों में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई है.
कानून के सामने न कांग्रेस है और न भाजपा, अपराध करने वाला कोई भी हो कार्रवाई होगी- देवलाल ठाकुर, बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता
वरिष्ठ पत्रकार की राय
राजनीतिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार राम अवतार तिवारी का मानना है कि धरना, प्रदर्शन, घेराव और चक्काजाम जैसे आंदोलनों में दर्ज FIR कई बार नेताओं के लिए राजनीतिक लाभ का कारण बनती हैं क्योंकि उन्हें जनहित के संघर्ष से जोड़ा जाता है. लेकिन भ्रष्टाचार, घोटाले या गंभीर आपराधिक मामलों की FIR किसी भी जनप्रतिनिधि की छवि को नुकसान पहुंचाती है.
क्या राजनीतिक मामलों की FIR वापस हो सकती हैं?
राम अवतार तिवारी के अनुसार राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े मामलों की समय-समय पर समीक्षा कर सरकारें उन्हें वापस भी लेती रही हैं. लेकिन भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और गंभीर आपराधिक मामलों में दर्ज प्रकरणों को वापस लेना आसान नहीं होता और ऐसे मामले सामान्यतः न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ते हैं.
चुनावी हलफनामों से सामने आई तस्वीर
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दाखिल हलफनामों के अनुसार 90 में से 17 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी. इनमें भाजपा के 12 और कांग्रेस के 5 विधायक शामिल थे. इसके बाद भाजपा सरकार के ढाई साल के दौरान 9 और विधायकों के खिलाफ FIR दर्ज हुईं.
कानून, राजनीति और जनता के बीच बड़ा सवाल
छत्तीसगढ़ में नौ विधायकों पर दर्ज एफआईआर केवल कानूनी कार्रवाई का विषय नहीं रह गई है. यह कानून के राज, राजनीतिक प्रतिशोध, विपक्ष की भूमिका और लोकतांत्रिक आंदोलनों की सीमाओं पर भी बहस छेड़ रही है. अब जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये कार्रवाई निष्पक्ष कानून व्यवस्था का प्रमाण हैं या फिर सियासत के नए दौर की 'बदलापुर राजनीति' का हिस्सा?

