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छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहे जोर

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि मंत्री रामविचार नेताम शामिल हुए. मंत्री ने कहा किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता सर्वाेच्च प्राथमिकता है.

CHHATTISGARH NAVA ANJOR VISION 2047
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : May 30, 2026 at 12:07 PM IST

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रायपुर: केन्द्रीय कृषि विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि महासम्मेलन खरीफ अभियान 2026 का आयोजन शुक्रवार को किया गया. कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम भी शामिल हुए. नेताम ने छत्तीसगढ़ में हो रही खेती के तरीकों के बारे में सम्मेलन में बताया.

कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में बताया कि छत्तीसगढ़ का कृषि ढांचा अब एक बड़े बदलाव की ओर है. उनकी सरकार नवा अंजोर विजन 2047’ के जरिए राज्य के लगभग 40 लाख किसान परिवारों, जिनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत, जिनमें 31 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के किसान शामिल हैं, उनके आर्थिक उत्थान के लिए सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है.

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राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि मंत्री रामविचार नेताम (ETV Bharat Chhattisgarh)

मंत्री ने बताया कि धान के कटोरे के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ अब परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण अनुकूल स्थायी कृषि के एक नए युग में अग्रसर हो रहा है. राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के तहत किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए चौतरफा रणनीति पर काम शुरू हो गया है.

नेताम ने बताया कि दलहन उत्पादन में वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज की गई 76 प्रतिशत की वृद्धि और तिलहन के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से ज्यादा की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ का किसान अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है. वहीं खरीफ सीजन 2026 में अरहर, उड़द और मूंग के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू करने की बात भी मंत्री ने कही.

हमारा लक्ष्य हर हाथ को काम और हर खेत को सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित खाद उपलब्ध कराना है- रामविचार नेताम, कृषि मंत्री, छत्तीसगढ़

राज्य में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और रणनीतिक तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि कृषि तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक प्रबंधन से खेती की तस्वीर बदल रही है. उन्होंने सम्मेलन में कहा कि खरीफ 2026 के लिए हमारी तैयारियां पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित हैं. राज्य के किसानों को कृषि विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है. सीमांत किसानों को जहां एकमुश्त उर्वरक दिया जा रहा है, वहीं यूरिया की कालाबाजारी और अत्यधिक खपत को रोकने के लिए लघु व बड़े किसानों को 20 से 25 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार में यूरिया देने की व्यवस्था की गई है.

आयुक्त ने बताया कि डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा, एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पूरी खरीद और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया गया है.

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नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन (ETV Bharat Chhattisgarh)

कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती के तहत् 23,050 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया जा चुका है, जिसमें 461 क्लस्टर्स और 922 कृषि सखियों की मदद ली जा रही है. सॉइल हेल्थ के तहत् वर्ष 2025-26 में 2.81 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए. साथ ही, नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने के लिए राज्य के 126 पीएम श्री स्कूलों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं (सॉइल टेस्टिंग लैब्स) स्थापित की जा चुकी हैं.

स्मार्ट इरिगेशन के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप‘ के तहत सूक्ष्म सिंचाई और लागत कम करने के लिए ड्रोन तकनीक व ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम’ (फसल + पशुपालन + मत्स्य + केंटकी) को बढ़ावा दिया जा रहा है. पीएम किसान और पीएम फसल बीमा योजना के डेटा को इंटीग्रेट करके जून से जुलाई 2026 तक विशेष केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) अभियान चलाया जाना प्रस्तावित है. वहीं पीएम आशा योजना के अंतर्गत दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करने की तैयारी है.

कृषि मंत्री ने सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मंच के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष कृषि विकास की गति को और तेज करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव और अपेक्षाएं भी रखी हैं. इनमें छत्तीसगढ़ धान प्रधान राज्य होने के कारण, फसल विविधीकरण को गति देने के लिए केंद्र से एक पृथक प्रोत्साहन नीति की मांग की गई है, साथ ही प्राकृतिक उत्पादों का एमएसपी प्राकृतिक और जैविक खेती के उत्पादों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की व्यवस्था की जाए.

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