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पसंदीदा जगह ट्रांसफर मांगने को हाईकोर्ट ने माना अनुचित, कहा पोस्टिंग तय करना प्रशासनिक विषय

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लगातार ट्रांसफर को लेकर फैसला सुनाया है.कोर्ट ने ट्रांसफर का अधिकार सक्षम प्राधिकारी के क्षेत्र में माना है.

High Court on posting matter
ट्रांसफर को हाईकोर्ट ने माना अनुचित (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 19, 2026 at 2:55 PM IST

4 Min Read
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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्थानांतरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण AFR निर्णय में स्पष्ट किया है कि कर्मचारी किसी विशेष स्थान पर पदस्थापना को अपना अधिकार नहीं मान सकता. प्रशासनिक आवश्यकता और विभागीय व्यवस्था के अनुरूप कर्मचारी का स्थानांतरण करना सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है.
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक कर्मचारी ने अपने मूल पदस्थापना स्थल नगर पालिक निगम रायपुर में वापस भेजे जाने की मांग करते हुए बाद में किए गए स्थानांतरण को चुनौती दी थी.

रायपुर से शुरू हुआ स्थानांतरण, राजनांदगांव तक पहुंचा

मामले के अनुसार कर्मचारी की प्रारंभिक नियुक्ति नगर पालिक निगम रायपुर में हुई थी. इसके बाद उसे रायपुर से नगर पालिक निगम रिसाली और बाद में रिसाली से नगर पालिक निगम भिलाई-चरौदा स्थानांतरित किया गया. कर्मचारी का दावा था कि दोनों स्थानों पर उसे स्वीकृत पदों की तुलना में अतिरिक्त यानी सरप्लस कर्मचारी माना गया. इसी आधार पर उसने अपने मूल संस्थान रायपुर नगर निगम में प्रत्यावर्तन की मांग की.


अभ्यावेदन और न्यायिक कार्यवाही के बाद भी नहीं मिली रायपुर पोस्टिंग
कर्मचारी ने अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया.न्यायालय के निर्देश के बाद उसने विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं होने पर अवमानना कार्यवाही भी प्रारंभ हुई. कार्यवाही लंबित रहने के दौरान कर्मचारी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया. इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने उसे रायपुर वापस भेजने के बजाय भिलाई-चरौदा से नगर पालिक निगम राजनांदगांव ट्रांसफर कर दिया.कर्मचारी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए रायपुर में पदस्थापना की मांग की.उसकी ओर से यह भी तर्क दिया गया कि अधिकता की स्थिति में उससे सहमति लेकर डिपुटेशन के माध्यम से समायोजित किया जा सकता था.

पोस्टिंग का स्थान तय करना प्रशासनिक विषय

प्रार्थी की दलीलों पर विचार करते हुए जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि कर्मचारी का वर्तमान पदस्थापन यदि सरप्लस है और उसे दूसरे निगम में स्थानांतरित किया गया है, तो केवल अपनी पसंद के स्थान के आधार पर वह किसी विशेष निगम में पोस्टिंग का दावा नहीं कर सकता. कोर्ट ने कहा कि सरप्लस कर्मचारी को किस स्थान पर समायोजित किया जाए, यह मूलतः प्रशासनिक निर्णय है.न्यायालय सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के निर्णय के स्थान पर अपनी पसंद की पोस्टिंग निर्धारित नहीं कर सकता.

बार-बार स्थानांतरण अपने आप में अवैधता नहीं

कोर्ट ने कर्मचारी के इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया कि लगातार स्थानांतरण के कारण वर्तमान आदेश अवैध हो जाता है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी का एक से अधिक बार स्थानांतरण होना, अपने आप में, बाद के स्थानांतरण आदेश को अवैध नहीं बनाता. रायपुर से रिसाली, रिसाली से भिलाई-चरौदा और फिर राजनांदगांव स्थानांतरण होने के बावजूद, केवल लगातार ट्रांसफर के आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का किया गया उल्लेख

हाईकोर्ट ने नम्रता वर्मा बनाम राज्य शासन उत्तर प्रदेश एवं अन्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारी यह आग्रह नहीं कर सकता कि उसे किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित किया जाए. वहां से स्थानांतरित न किया जाए. स्थानांतरण का निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता के अनुरूप नियोक्ता द्वारा लिया जाना है.


स्थानांतरण आदेश में हस्तक्षेप से इनकार

कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी ऐसा कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे संबंधित स्थानांतरण आदेश को कानूनी रूप से अस्थिर, मनमाना या अवैध माना जा सके.इस आधार पर जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने याचिका खारिज करते हुए राजनांदगांव स्थानांतरण आदेश को बरकरार रखा.


फैसले का महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत
हाईकोर्ट के इस AFR निर्णय का सार यह है कि स्थानांतरण कर्मचारी का अधिकार नहीं, बल्कि प्रशासनिक आवश्यकता से जुड़ा विषय है.कर्मचारी अपनी पसंद के स्थान पर पोस्टिंग की मांग नहीं कर सकता और केवल लगातार स्थानांतरण होने के आधार पर भी न्यायालय प्रशासनिक आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगा, जब तक कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि, मनमानी या अन्य हस्तक्षेप योग्य आधार स्थापित न हो.

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