रिश्वत मांगना और स्वीकार करना दोनों भ्रष्टाचार, दोषी की सजा बरकरार- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिश्वतखोरी के मामले में सरकारी कर्मचारी के खिलाफ फैसला सुनाया. संजय यादव की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 29, 2026 at 10:34 PM IST
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर ने भ्रष्टाचार के करीब 24 वर्ष पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में दोषी सरकारी कर्मचारी की अपील खारिज कर दी है. कोर्ट ने विशेष न्यायालय द्वारा वर्ष 2002 में सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है. अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ अवैध रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार किए जाने को पर्याप्त एवं विश्वसनीय साक्ष्यों के द्धारा साबित किया गया है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने की.न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की अदालत ने विशेष न्यायालय द्वारा वर्ष 2002 में सुनाई गई दोष सिद्धि और सजा को बरकरार रखा.
अवकाश के लिए घूस की मांग से जुड़ा मामला
मामला वर्ष 1999 का है. अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता ने इलाज के लिए अवकाश लिया था, लेकिन उसका अवकाश स्वीकृत नहीं हुआ और फरवरी, सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर 1999 के 15 दिनों का वेतन भी रोक दिया गया था. वेतन जारी कराने और अवकाश संबंधी प्रक्रिया के लिए आरोपी से संपर्क करने पर कथित तौर पर 10 हजार रिश्वत की मांग की गई. इसमें 5 हजार तत्काल और शेष राशि बाद में देने की बात कही गई थी.
लोकायुक्त टीम की थी कार्रवाई
रिश्वत देने से इनकार करते हुए शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त में शिकायत की. जांच के दौरान बातचीत की टेप रिकॉर्डिंग कराई गई. इसके बाद लोकायुक्त ने ट्रैप की कार्रवाई की. शिकायतकर्ता ने आरोपी को बताया कि वह पूरी रकम नहीं जुटा सका और उसके पास 4 हजार हैं. अभियोजन के अनुसार आरोपी ने रकम स्वीकार कर जेब में रख ली. संकेत मिलते ही लोकायुक्त टीम ने उसे पकड़ लिया और उसकी जेब से वही चिह्नित नोट बरामद हुए. आरोपी के हाथ और कपड़ों की रासायनिक जांच में भी सकारात्मक परिणाम मिले. बचाव पक्ष ने टेप रिकॉर्डिंग की आवाज की वैज्ञानिक जांच नहीं होने और झूठा फंसाए जाने की दलील दी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन्हें स्वीकार नहीं किया.
कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन केवल टेप रिकॉर्डिंग पर निर्भर नहीं था. शिकायतकर्ता की गवाही, चिह्नित नोटों की बरामदगी, ट्रैप कार्रवाई और रासायनिक परीक्षण समेत कई साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नीरज दत्ता सहित अन्य फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रिश्वत की मांग और उसका स्वीकार किया जाना भ्रष्टाचार के मामले में महत्वपूर्ण तत्व हैं. विशेष न्यायालय ने आरोपी को धारा 7 के तहत एक वर्ष और धारा 13(1)(d) सहपठित धारा 13(2) के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. दोनों सजाएं साथ चलनी थीं. हाईकोर्ट ने सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी.

