15 साल बाद टूटा राजनीतिक साजिश का जाल, कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल समेत 6 नेता दोषमुक्त
पूरे 15 वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष केवल एक ही गवाह पेश कर सका और आरोपों को साबित करने में असफल रहा.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 7, 2026 at 7:10 AM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े एक 15 साल पुराने मामले में कांग्रेस को बड़ी राहत मिली है. वर्ष 2010 में भाजपा शासनकाल के दौरान दर्ज किए गए एक कथित राजनीतिक मामले में कोर्ट ने कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल समेत 6 नेताओं को दोषमुक्त करार दिया है. अदालत के इस फैसले को विपक्षी नेताओं ने “सत्य और न्याय की जीत” बताया है.
15 साल पुराने मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला
15 वर्षों तक चले इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक दंडाधिकारी सावित्री रक्सेल की अदालत ने कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल, गुलजेब अहमद, इस्माइल अहमद, डॉ. रामेश्वर सोनवानी, शाहबाज हुसैन और नदीम सलाट को सभी आरोपों से बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा.

क्या था पूरा मामला?
साल 2010 में तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान मौदहापारा स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज में 108 सेवा के निजीकरण के विरोध में कांग्रेस नेताओं द्वारा प्रदर्शन किया गया था. इसके बाद मौदहापारा पुलिस ने इन नेताओं पर अपराध क्रमांक 272/2010 के तहत धारा 147, 148, 149, 427, 452, 323 भादवि जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था.
15 साल में एक गवाह, आरोप साबित करने में नाकाम अभियोजन
पूरे 15 वर्षों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष केवल एक ही गवाह पेश कर सका और आरोपों को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भगवानू नायक ने अंतिम तर्कों में इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला बताया.
कोर्ट की टिप्पणी – आरोप सिद्ध नहीं हुए
न्यायालय ने सभी तथ्यों और सबूतों का अवलोकन करने के बाद यह स्पष्ट किया कि आरोप प्रमाणित नहीं हो सके हैं और सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया जाता है.
सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं – सुबोध हरितवाल
फैसले के बाद कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल ने कहा,"हम भारतीय न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हैं. यह न्यायिक प्रक्रिया की जीत है. भाजपा शासनकाल में हमें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया था. 15 साल बाद आज न्याय मिला है. यह साबित करता है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं."
सत्ता के दुरुपयोग पर उठे सवाल
इस फैसले ने एक बार फिर उस राजनीतिक संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है. कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वह हमेशा संविधान और कानून के शासन में विश्वास रखती है और इस फैसले से यह विश्वास और मजबूत हुआ है.

