छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने गृहमंत्री को सौंपा गणेशोत्सव के लिए गाइडलाइन, लागू कराने की मांग
अश्लील गानों और फूहड़ नृत्य पर कार्रवाई की मांग, पर्यावरण संरक्षण से लेकर विसर्जन की समयसीमा तक सुझाए कड़े नियम.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 28, 2026 at 9:21 PM IST
रायपुर: गणेशोत्सव को सुरक्षित, अनुशासित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने पहल की है. सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा को ज्ञापन दिया है. उन्होंने गणेशोत्सव और खासकर गणेश विसर्जन के दौरान लागू किए जाने वाले दिशा-निर्देशों की मांग की है. गाइडलाइन में पर्यावरण संरक्षण, पंडालों की सुरक्षा, नशामुक्त आयोजन, अश्लीलता पर रोक, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण और विसर्जन की समय-सीमा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं.
पर्यावरण संरक्षण पर जोर,पीओपी और प्लास्टिक की मूर्तियों पर रोक की मांग
गाइडलाइन में प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी और प्लास्टिक से बनी गणेश प्रतिमाओं के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई है. सिविल सोसायटी ने सुझाव दिया है कि बाजार में केवल प्राकृतिक मिट्टी, पारंपरिक शिल्पकला और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से बनी प्रतिमाओं की बिक्री की अनुमति हो.
नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर 10 हजार से 50 हजार रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान करने की मांग की गई है. जब्त की गई मूर्तियों के निस्तारण का खर्च भी दोषी विक्रेताओं से वसूलने का सुझाव दिया गया है.
अश्लीलता पर सख्ती की मांग
गाइडलाइन के मुताबिक नशे की अवस्था में किसी भी व्यक्ति को गणेश पंडाल में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए. आयोजन समिति, सुरक्षाकर्मियों और स्वयंसेवकों को संदिग्ध लोगों की जांच कर उन्हें आवश्यकता पड़ने पर पुलिस के सुपुर्द करने का सुझाव दिया गया है. वहीं पंडालों में अश्लील गानों और फूहड़ नृत्यों पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है. ऐसी गतिविधियां सामने आने पर आयोजन समिति को जिम्मेदार मानते हुए कानूनी कार्रवाई का सुझाव दिया गया है.

सीसीटीवी और अग्निशमन यंत्र लगाने की मांग
गणेश पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी लगाने का सुझाव दिया गया है.इसके साथ ही प्रत्येक पंडाल में चालू हालत में पर्याप्त अग्नि शामक रखना अनिवार्य किए जाने की मांग की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके.
अल्कोहल टेस्ट और कानून के तहत कार्रवाई का सुझाव
गणेश विसर्जन और स्वागत जुलूस के दौरान नशे में शामिल होने वाले लोगों पर विशेष निगरानी रखने की बात गाइडलाइन में कही गई है.सिविल सोसायटी ने पुलिस को संदिग्ध लोगों का मौके पर ही अल्कोहल टेस्ट करने का अधिकार दिए जाने का सुझाव दिया है. नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर अनुचित आचरण करने वालों और अश्लीलता या फूहड़ प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस 2023 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है.
डीजे और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण
गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित डेसिबल स्तर और समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने की मांग की गई है. जुलूस और विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे या अन्य ध्वनि उपकरणों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रशासन को प्रभावी निगरानी करने का सुझाव दिया गया है.
विसर्जन की व्यवस्था पर सुझाव
गाइडलाइन में बड़ी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी को एकल विसर्जन दिवस निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है. वहीं छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन स्थानीय परंपरा के अनुसार किए जाने की बात कही गई है. सिविल सोसायटी का सुझाव है कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन केवल स्थानीय प्रशासन और नगर निगम द्वारा चिन्हित एवं अधिसूचित विसर्जन स्थलों पर ही किया जाए.
विसर्जन जुलूस की समयसीमा
गाइडलाइन में विसर्जन शोभायात्रा के लिए समय-सीमा तय करने की मांग की गई है।इसके अनुसार विसर्जन शोभायात्रा शाम 6 बजे से शुरू होकर रात 12 बजे तक अनिवार्य रूप से समाप्त हो जानी चाहिए।समय-सीमा और अनुशासन का पालन कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी आयोजन समिति की तय करने का सुझाव दिया गया है.
नियमित पेट्रोलिंग और कानून-व्यवस्था
सिविल सोसायटी ने पुलिस और प्रशासन से गणेशोत्सव के दौरान नियमित गश्त करने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है.इसके साथ ही स्वयंसेवक दलों को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है.
जिम्मेदारी निभाने की अपील
गणेशोत्सव केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का अवसर भी है, इसलिए आयोजन समितियों से अपील है कि वे पंडालों में सुरक्षा मानकों का पालन करें, अश्लीलता और नशे से दूर रहें, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित रखें और विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थलों और समय का पालन करें. श्रद्धालुओं से भी अपील है कि वे पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं का उपयोग करें और सुरक्षित एवं व्यवस्थित विसर्जन में सहयोग दें.
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने उम्मीद जताई है कि इन सुझावों को प्रदेशभर में प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो गणेशोत्सव अधिक सुरक्षित, अनुशासित, पर्यावरण-अनुकूल और जनहितकारी वातावरण में संपन्न होगा. अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन प्रस्तावित दिशा-निर्देशों पर क्या निर्णय लेती है और गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कानून-व्यवस्था को लेकर किस तरह की व्यवस्था लागू की जाती है.

