नक्सली बनते तो नौकरी मिलती, सरकारी नौकरी के लिए तरसते CAF अभ्यर्थियों का फूटा दर्द
छत्तीसगढ़ में सीएएफ परीक्षा के कैंडिडेट ने नाराजगी जताई है. पढ़िए पूरी खबर

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 29, 2025 at 8:23 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सली समाप्त होने का दावा कर रही है, लेकिन इसी बीच राजधानी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करती है.
सात साल से इंतजार जारी
छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) भर्ती 2018 की वेटिंग लिस्ट में शामिल सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी बीते 7 सालों से नौकरी की आस में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब वे कहने लगे हैं कि “हमसे अच्छे तो नक्सली हैं, आत्मसमर्पण के बाद उन्हें नौकरी मिल जाती है".
नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे CAF वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों ने बेहद तल्ख बयान दिया. उनका कहना है कि अगर वे नक्सली बनकर आत्मसमर्पण करते, तो शायद आज सरकारी नौकरी मिल चुकी होती. साल 2018 में CAF भर्ती की सभी प्रक्रियाएं पूरी की. इसमें दौड़, परीक्षा और चयन पूरी करने के बावजूद 417 योग्य अभ्यर्थियों को सिर्फ वेटिंग लिस्ट में डालकर छोड़ दिया गया.
सात साल का लंबा समय, कर रहे हैं इंतजार
अभ्यर्थियों का कहना है कि 2018 से अब तक उन्होंने शासन, प्रशासन, मंत्री और अधिकारियों का हर दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन नतीजा शून्य रहा. जब मेरिट लिस्ट के अभ्यर्थियों को एक साल से ज्यादा समय बाद भी नियुक्ति दी गई, तो फिर वेटिंग लिस्ट वालों का अधिकार क्यों छीना गया?
उम्र निकल गई, सपने टूट गए
CAF वेटिंग अभ्यर्थियों का दर्द यहीं खत्म नहीं होता।अब हालात ऐसे हैं कि कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं. न तो दूसरी सरकारी नौकरी का मौका बचा है और न ही किसी नई परीक्षा में बैठने की पात्रता. सरकारी नौकरी का सपना देखते-देखते जीवन की सबसे कीमती उम्र इंतज़ार में गुजर गई.

अमित शाह तक लगाई गुहार
अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखा था. जवाब में नियुक्ति पर विचार का आश्वासन भी मिला, लेकिन ज़मीन पर आज तक कुछ नहीं बदला. अब अभ्यर्थी पत्नी-बच्चों के साथ धरने पर बैठे हैं, जहां सब्र की आख़िरी दीवार भी टूटने लगी है.
इंसाफ नहीं मिला तो होगा आंदोलन
22 दिसंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने साफ कहा है कि अगर अब भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वे जल समाधि और आत्मदाह जैसे घातक कदम उठाने को मजबूर होंगे.यह चेतावनी सिर्फ आक्रोश नहीं, बल्कि टूटते विश्वास की चीख है.
परिवार भी सड़क पर, रोजी-रोटी का संकट
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों के परिजन भी बेहद परेशान हैं. उनका कहना है कि घर चलाना मुश्किल हो गया है. रोजी-रोटी का संकट खड़ा है और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना असंभव होता जा रहा है. नौकरी सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद है.
नियम भी कहते हैं नियुक्ति होनी चाहिए
अभ्यर्थियों का तर्क है कि राजपत्र नियम 13(2) के अनुसार पदोन्नति, मेडिकल आउट, सेवानिवृत्ति, मृत्यु, बर्खास्तगी से रिक्त पदों पर 1 वर्ष के भीतर वेटिंग सूची से नियुक्ति अनिवार्य है. उसके बाद भी CAF वेटिंग अभ्यर्थियों को क्यों वंचित रखा गया?
कांग्रेस से BJP तक, सवाल वही
अभ्यर्थियों का आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने “पिछली सरकार की भर्ती” कहकर 5 साल तक नियुक्ति रोकी. अब BJP सरकार में भी CAF वेटिंग पर चुप्पी क्यों है?. जब अन्य भर्तियों में सरकार ने न्याय दिया, तो यहां भेदभाव क्यों?
आश्वासन नहीं, अब लिखित आदेश चाहिए-प्रदर्शनकारी
CAF वेटिंग अभ्यर्थियों की मांग साफ है कि वेटिंग सूची का सम्मान किया जाये. लिखित आदेश जारी हो,417 योग्य अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति दी जाए. अभ्यर्थियों का कहना है कि हम सिर्फ अभ्यर्थी नहीं, हमारे साथ हमारे माता-पिता, पत्नी और बच्चे भी न्याय मांग रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की बात हो रही है, लेकिन सिस्टम के इस अंधेरे कोने में CAF के 417 अभ्यर्थी आज भी न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं. अब सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि विश्वास और संवेदनशीलता का है. क्या सरकार इन टूटती उम्मीदों की आवाज़ सुनेगी, या कोई बड़ा हादसा जवाब बनकर सामने आएगा?

