सैकड़ों देवलुओं संग मंडी शिवरात्रि के लिए रवाना हुए देव मगरू महादेव, छोटी काशी तक करेंगे 107 किमी का पैदल सफर
महाशिवरात्रि के दिन सुबह करीब सवा 11 बजे देव मगरू महादेव मंडी पहुंचेंगे और मेले की पहली जलेब में शामिल होंगे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 12, 2026 at 8:47 PM IST
सराज: सराज विधानसभा क्षेत्र के छतरी में विराजमान देव मगरू महादेव और देव नाग चपलादूं महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होने के लिए छोटी काशी मंडी की ओर रवाना हो गए हैं. सैकड़ों देवलू, बजंत्री और कारकून देव यात्रा में शामिल हैं. ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच यह यात्रा शुरू हुई. यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और संस्कृति का प्रतीक मानी जाती हैय
107 किलोमीटर की पदयात्रा
देव मगरू महादेव करीब 107 किलोमीटर और देव नाग चपलादूं लगभग 150 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करेंगे. यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर रात्रि ठहराव रखा गया है. रास्ते भर श्रद्धालु देवताओं का स्वागत कर आशीर्वाद ले रहे हैं. देवता कमेटी के अध्यक्ष ओमचंद ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन सुबह करीब सवा 11 बजे देव मगरू महादेव मंडी पहुंचेंगे और मेले की पहली जलेब में शामिल होंगे. मंडी महाशिवरात्रि मेले में देव मगरू महादेव का विशेष स्थान है. उन्हें शिव स्वरूप माना जाता है और राज दरबार के प्रमुख देवताओं में उनकी गिनती होती है.
मगरू महादेव का देव माधोराय के समान रुतबा
लोक मान्यताओं के अनुसार, मंडी रियासत के समय देव मगरू महादेव का रुतबा देव माधोराय के समान था. महाशिवरात्रि के अवसर पर राज देवता माधोराय के साथ मगरू महादेव का चित्र भी लगाया जाता था. शहर में पहुंचने पर राज परिवार स्वयं उनका स्वागत करता था. राजबेहड़े में देवता का रात्रि ठहराव होता था और दुर्लभ जड़ी-बूटियों से हवन किया जाता था. आज भी यह परंपरा श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है.
छतरी के अरुण वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष देवता के मूल स्थान पर महायज्ञ आयोजित किया गया था, जिसके कारण वे मंडी नहीं आ सके. लेकिन इस बार देवता पूरे उत्साह के साथ यात्रा पर निकले हैं और मेले की पहली जलेब में शामिल होंगे. देव मगरू महादेव ही मंडी महाशिवरात्रि मेले में 'साईं' या 'चंदों' लगाते हैं. सैकड़ों वर्षों बाद भी उनका वही सम्मान और रुतबा कायम है. यह यात्रा हिमाचल की देव संस्कृति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अनोखा उदाहरण है.
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