कभी छतरपुर में था फुटबॉल का बोलबाला, 70 से 5 पर सिमटी खिलाड़ी, मैदान को तरसी बेटियां
छतरपुर की बेटियों में फुटबॉल को लेकर गजब जज्बा, मैदान और माहौल नहीं होने से मायूस, फुटबॉल रैंकिंग में छतरपुर का था 7 वां स्थान. मनोज सोनी की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 3, 2026 at 9:02 AM IST
|Updated : July 3, 2026 at 10:17 AM IST
छतरपुर: युद्ध का मैदान हो या खेल का मैदान, हमेशा छतरपुर की मिट्टी में जन्मे लोगों ने देश-दुनिया में अपना हुनर दिखाया है. तभी तो महिला क्रिकेटर क्रांति गौड छोटे से गांव से निकल कर आज देश दुनिया में जिले का नाम रोशन कर रही हैं. छतरपुर जिले में फुटबॉल की कुछ महिला खिलाड़ी भी क्रांति गौड की तरह फुटबॉल के खेल को जिले सहित देश, विदेश में चमकाने का दम रखती हैं. लेकिन इन खिलाड़ियों को जिस माहौल और मैदान की जरूरत है, वह उनको नहीं मिल रहा.
फीफा वर्ल्ड कप के बीच छतरपुर की खिलाड़ी मायूस
छतरपुर में 70 में से सिर्फ 5 बच्चियां ही फुटबॉल के खेल को खेल रही हैं. लेकिन कोई सुविधा नहीं मिलने से हमेशा मायूस रहती हैं. दरअसल इन दिनों दुनिया भर में फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच शुरू हो गया है. चारों तरफ फुटबॉल का जुनून लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. लेकिन बुंदेलखंड के केंद्र कहे जाने वाले छतरपुर जिले में फुटबॉल की धड़कनें थमी हुई हैं. कभी देश की फुटबॉल रैंकिंग में छतरपुर का 7 वां स्थान रखता था, 70 साल पुराना गौरवशाली एसएन बनर्जी अखिल भारतीय फुटबॉल टूर्नामेंट कोरोना काल के बाद से दोबारा शुरू नहीं हो सका है.
1956 में महाराजा महाविद्यालय के जाने माने शिक्षक सुरेंद्रनाथ बनर्जी की याद में यह आयोजन शुरू हुआ था. जिसे तत्कालीन छतरपुर महाराज भवानी सिंह देव आर्थिक मदद करते थे. बाद में इसका नाम एसएन बनर्जी टूर्नामेंट कर दिया गया. देश का ये पहला ऐसा प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है, जो किसी शिक्षक के नाम पर होता था.
इस खेल के 57 सफल आयोजन हो चुके हैं, लेकिन अब 6 साल से बंद है. इस आयोजन से छतरपुर की तीन पीढ़ियों की यादें और भावनाएं जुड़ी हुई हैं. छतरपुर की बेटियों इस खेल को आगे बढ़ाना चाहती है लेकिन उनके माहौल ओर मैदान नही मिल रहा. जिस कारण आज 70 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों में से सिर्फ 5 ही बची हुई है जो धीरे धीरे इस खेल से मजबूरी बस दूर हो रही है.

महिलाओ में जुनून-जज्बा है, लेकिन एक्सपोजर का टोटा
छतरपुर जिले के जाने माने फुटबॉल खिलाड़ी बसीर खान कहते हैं, ''छतरपुर की बेटियों में फुटबॉल को लेकर जुनून है टेलेंट है, लेकिन उन्हें एक्सपोजर नहीं मिल रहा. माहौल और मैदान नहीं मिल रहा. महिला कोच और अभ्यास की सुविधा न होने से लड़कियां इस खेल से धीरे धीरे पीछे हट रही है. गर्वमेंट का कोई सपोर्ट नही है. अगर छतरपुर प्रशासन इन प्रतिभाशाली बेटियों के लिए फुटबॉल का मैदान और सुरक्षित माहौल मुहैया करा दे तो यह महिला फुटबॉल खिलाडी देश-दुनिया में बुन्देलखंड सहित जिले का नाम रोशन करेगी.''

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महिला खिलाड़ियों का छलक दर्द
छतरपुर की महिला फुटबॉल खिलाडी से ETV संवाददाता मनोज सोनी ने बात की. अदिति तिवारी कहती हैं, ''पिछले 3 सालों से खेल रही हूं. अच्छा लगता है लेकिन कोई फैसिलिटी नहीं है. ग्राउंड खराब है, हम भी इंटनेशनल खेलना चाहते हैं लेकिन कोई सपोर्ट नहीं है.'' छतरपुर की ही दूसरी महिला खिलाड़ी नेहा गुप्ता भी पिछले तीन साल से फुटबॉल खेल रही है. लेकिन माहौल और ग्राउंड अच्छा नही होने से मनोबल टूट रहा है. महिला खिलाड़ी सपना पटेल कहती हैं, ''स्टेट तक खेल चुकी हूं लेकिन अब माहौल खराब हो रहा है. लोग खेलने नहीं देते, ग्राउंड भी अच्छा नहीं है. कोई मोटिवेट करने वाला नहीं है.''

