छतरपुर में रक्षाबंधन पर भाई की मौत, दुख में बहन ने नेत्रदान कर दूसरों को दी उम्मीद की किरण
छतरपुर में रक्षाबंधन के दिन नीलेश ताम्रकर की मौत, परिजन ने चित्रकूट नेत्र चिकित्सालय को किया नेत्रदान. रोशन होगी 2 जिंदगियां. मनोज सोनी की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 29, 2026 at 8:25 AM IST
|Updated : August 29, 2026 at 8:33 AM IST
छतरपुर: रक्षाबंधन की खुशियां मनाने की तैयारियों में जुटे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. यहां एक बहन की राखी बांधने की खुशी अधूरी रह गई. तमराई मोहल्ला निवासी नीलेश ताम्रकर (63) की त्योहार के दिन मौत हो गई, जिसके बाद बहन ने साहसिक कदम उठाया और भाई का नेत्रदान कर असहनीय दुख को मानव सेवा की ऐसी मिसाल में बदल दिया, जो लंबे समय तक समाज को प्रेरणा देती रहेगी.
परिवार ने किया नेत्रदान
तमराई निवासी नीलेश ताम्रकर का रक्षाबंधन के दिन लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. मौत के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई. लेकिन इसी पीड़ा के बीच नीलेश के परिजन ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने दो अंधेरी जिंदगियों में उजाले की उम्मीद जगा दी. पीड़ित परिवार ने सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट से संपर्क किया. सूचना मिलते ही चित्रकूट से चिकित्सकीय टीम छतरपुर पहुंची और डॉ. विशाल रजक एवं उनके सहयोगियों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नीलेश ताम्रकर का नेत्रदान संपन्न कराया.
दुख में भी परिजन ने जलाई उम्मीद की लौ
रक्षाबंधन के दिन जिस घर में मौत का मातम था, वहीं से दो घरों के लिए रोशनी निकली है. नीलेश ताम्रकर की आंखें अब किसी ऐसे व्यक्ति की दुनिया रोशन करेंगी, जिसने शायद वर्षों से सूरज की रोशनी, अपनों के चेहरे और दुनिया की खूबसूरती नहीं देखी है.

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समाजसेवी गिरजा पाटकर कहते हैं, '' यही तो नेत्रदान की सबसे बड़ी खूबसूरती है. इंसान चला जाता है, लेकिन उसकी आंखें किसी और की जिंदगी को देखने का मौका दे जाती हैं. दुख की घड़ी में परिवार ने हिम्मत दिखाई है.'' मृतक की बहिन शिल्पी ने भावुक होते हुए कहा, "आज मेरे लिए दुख का दिन है, लेकिन मेरे भाई ने जाते हुए भी दूसरे की जिंदगी में उजाला कर दिया. इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है. वह जाने के बाद भी दो लोगों के लिए रोशनी छोड़ गए हैं."

