छतरपुर में दूसरे दिन मनता है रक्षाबंधन, पृथ्वीराज की सेना से युद्ध और कजलियां से जुड़ा है इतिहास
छतरपुर जिले के महाराजपुर, गौरिहार और बारीगढ़ में दूसरे दिन मनेगा रक्षाबंधन, आल्हा-ऊदल से जुड़ी प्राचीन परंपरा आज भी कायम. मनोज सोनी की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 28, 2026 at 4:56 PM IST
|Updated : August 28, 2026 at 5:18 PM IST
छतरपुर: पूरे देश में रक्षा बंधन का पावन त्योहार 28 अगस्त को मनाया जा रहा है. भाई की कलाई पर बहने राखी बांध रही हैं. वहीं, छतरपुर जिले के कुछ इलाके ऐसे हैं जो दूसरे दिन रक्षाबंधन का उत्सव मानते हैं. दूसरे ही दिन बहनें भाई को राखी बांधती हैं. यह परंपरा आल्हा-ऊदल के समय से जुड़ी है, जो आज भी कायम है.
छतरपुर जिले में सालों पुरानी इस परंपरा को आज भी क्षेत्र के लोग पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं. दरसल छतरपुर के यूपी से लगे हुए महाराजपुर, गौरिहार, बारीगढ़ में रक्षा बंधन का पर्व दूसरे दिन मनाया जाता है. बुंदेलखंड के महोबा यूपी और छतरपुर समेत कई इलाकों में रक्षाबंधन तय तिथि के एक दिन बाद मनाने की परंपरा महोबा युद्ध और आल्हा-ऊदल की ऐतिहासिक वीरगाथा से जुड़ी हुई है.
रक्षाबंधन पर पृथ्वीराज की सेना ने राजकुमारी को घेरा
छतरपुर के महाराजा छत्रसाल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बहादुर सिंह परमार बताते हैं, ''1182 में राजा परमाल की पुत्री राजकुमारी चंद्रावलि 1400 सखियों के साथ कजलियां विसर्जित करने कीरत सागर तालाब जा रही थीं. तभी रास्ते में पृथ्वीराज चौहान के सेनापति चामुंडा राय ने हमला कर दिया. पृथ्वीराज की योजना चंद्रावलि का विवाह अपने पुत्र सूरज सिंह से कराने की थी. रक्षाबंधन के दिन पृथ्वीराज की सेना ने राजकुमारी को घेर लिया. महारानी मल्हना ने सेना का मुकाबला किया, जिसमें राजकुमार अभय मारे गए.''

इसके बाद आल्हा-ऊदल ने अपने मित्र मलखान के साथ मोर्चा संभाल कर चंद्रावलि को बचाया. राजकुमारी और उनकी सखियों ने आल्हा ऊदल समेत वीरों को राखी बांधी और कजलियां विसर्जित कीं. कुछ किवदंतियां भी इसी अनुसार हैं. छतरपुर जिले से लगा उत्तर प्रदेश महोबा के साथ जिले के गौरिहार, महराजपुर और बारीगढ़ क्षेत्र में रक्षाबंधन के एक दिन बाद पर्व मनाने और कजलियां विसर्जित करने की परंपरा चली आ रही है, जो आज भी जीवित है.

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शुक्रवार को सुकर्मा योग का संयोग उत्तम
छतरपुर पंडित सौरव तिवारी बताते हैं, ''इस बार रक्षाबंधन शुक्रवार को पड़ा है और इसी दिन सुकर्मा योग का संयोग भी है. ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है, जो प्रेम, सौंदर्य, संबंध, सुख-सुविधा और पारिवारिक सौहार्द का कारक है. ऐसे में शुक्रवार और सुकर्मा योग का संयोग भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और आपसी सामंजस्य बढ़ाने वाला माना जा रहा है. 28 अगस्त को चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और रात तक शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. ज्योतिषीय दृष्टि से कुंभ राशि विचार, स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना से जुड़ी मानी जाती है. इस कारण रक्षाबंधन का पर्व पारिवारिक एकता, स्नेह और सौहार्द बना रहेगा.''
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
गौरिहार निवासी वीरेंद्र पटेल कहते हैं, ''आज हमारे यहां राखी नहीं होती है, हमारे गांव में 29 अगस्त को राखी बांधेंगी. यही पुरानी परंपरा है, आल्हा ऊदल के समय से चली आ रही गए.'' वहीं, बारीगढ़ निवासी राजा राजपूत बताते हैं, ''जब हमारे यहां कजलियां निकलती हैं तभी राखी बधवाई जाती है. इस बार 29 को राखी होगी.''

