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विधानसभा में गूंजा छतरपुर यूनिवर्सिटी का मामला, शासन की स्वीकृति के बिना करोड़ों के भुगतान का आरोप

छतरपुर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय को लेकर विधानसभा में घमासान, शिक्षा मंत्री और विधायक में जमकर नोकझोक. निर्माण कार्य में करोड़ों के अनियमितताओं का आरोप.

Maharaja Chhatrasal University
बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता का आरोप (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 24, 2026 at 10:47 PM IST

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छतरपुर: महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है. मंगलवार को विधानसभा में विधायक ललिता यादव ने अनिमिताओं का मुद्दा उठाया. इसे लेकर यूनिवर्सिटी में भी हलचल शुरू हो गई. आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने शासन की स्वीकृति के बिना ही करोड़ों का भुगतान कर दिया. उच्च शिक्षा मंत्री ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

कुलसचिव पर लगे अनियमितताओं के आरोप

विधायक ललिता यादव ने विधानसभा में सवाल पूछा कि महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय में निर्मित कुलपति निवास, प्रशासनिक भवन, अकादमिक भवन एवं बाउंड्रीवॉल निर्माण पर आज तक कुलसचिव द्वारा टोटल कितनी राशि का भुगतान किया गया है. साथ ही क्या निर्माण कार्य के भुगतान की कुलसचिव द्वारा उच्च शिक्षा विभाग से कितनी राशि की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त की गई? विधायक ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कुलसचिव बिना प्रशासकीय स्वीकृत लिए 40 करोड़ का भुगतान कर सकता है? वह स्वयं प्रशासकीय स्वीकृति देकर स्वयं भुगतान कर सकता है, तो आदेश प्रस्तुत करें.

विधानसभा में मंत्री और विधायक के बीच जमकर नोकझोंक (Video Credit : Madhya pradesh Vidhansabha)

उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह ने दिया लिखित जवाब

विधायक ललिता यादव ने बिना प्रशासकीय स्वीकृति के कुलसचिव द्वारा किए गए करोड़ों के भुगतान को वित्तीय अनियमितता बताया और शासन से कार्रवाई की मांग की. इस पर उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की स्वीकृति से वार्षिक बजट में प्रावधानित की गई है. विश्वविद्यालय द्वारा कुलपति निवास और प्रशासनिक भवन के लिये 17 करोड़, बाउंड्रीवाल, गेट निर्माण सहित गार्ड रूम निर्माण के लिए 10 करोड़ 50 लाख रुपए का भुगतान किया गया. इस प्रकार कुल 27 करोड़ 50 लाख का विश्वविद्यालय द्वारा लोक निर्माण विभाग पीआईयू छतरपुर को भुगतान किया गया है. अकादमिक भवन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किसी राशि का भुगतान नहीं किया गया है.

MLA Lalita Yadav
विधानसभा में गूंजा छतरपुर यूनिवर्सिटी की अनिमिताओ का मामला (ETV Bharat)

विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत भुगतान

शिक्षा मंत्री ने बताया, "मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 24 की उपधारा 14 के तहत निर्माण कार्य की स्वीकृति विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा दी गई है, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय द्वारा बजट में प्रावधानित की गई. राशि में से भुगतान की कार्रवाई की गई है."

मंत्री पर लगे सदन को गुमराह करने का आरोप

उच्च शिक्षा मंत्री के लिखित उत्तर पर विधायक ललिता यादव ने कहा, " उनके मूल प्रश्न के उत्तर में उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा जो जानकारी प्रस्तुत की गई है, वह तथ्यों के विपरीत है और सदन को गुमराह करने वाली है. मंत्री के उत्तर में बताया गया है कि उच्च शिक्षा विभाग से प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई. जबकि वास्तविकता यह है कि कुलसचिव के पत्र क्र. 428 (दिनांक 11/04/22) के संदर्भ में आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पत्र क्रमांक 554/286/आ.उ.शि./शा.-नि/2021 (दिनांक 25/07/2022) जारी किया गया था."

करोड़ों की गंभीर वित्तीय अनियमितता

विधायक ने कहा, "मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि निर्माण कार्यों पर 27 करोड़ 50 लाख रु का भुगतान किया जा चुका है. जब उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मात्र 20 करोड़ रु खर्च करने की स्पष्ट सीमा तय की गई थी, तो अतिरिक्त 7 करोड़ 50 लाख रु बिना शासन की अनुमति के किसके आदेश पर खर्च किए गए? क्या विश्वविद्यालय शासन के आदेशों से मुक्त हो गया है."