छतरपुर में तेरहवीं के पैसों से अनाथ बेटी के हाथ पीले, परंपराओं की बेड़ियों को सर्राफा व्यापारी ने तोड़ा
बुंदेलखंड के छतरपुर में व्यवसायी परिवार ने तोड़ी समाज की परंपराएं, तेरहवी का कार्यक्रम के बजाए कराए अनाथ बेटी के हाथ पीले.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 20, 2026 at 5:10 PM IST
छतरपुर: आज भी समाज में कई ऐसे लोग हैं, जो अपने साथ दूसरों के बारे में सोचते हैं, उनकी परेशानियां और दुख को महसूस करते हैं. कई लोग अपनी तरह से मदद करने की कोशिश भी करते हैं. ऐसा ही कुछ छतरपुर में एक सर्राफा व्यवसायी के परिवार ने भी किया. हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु के बाद मृत्यु भोज कराने की परंपरा है. जिसमें ब्राह्मणों सहित आस-पास परिचतों को बुलाकर पूजा-पाठ करके भोज कराया जाता है. जिसमें काफी पैसे खर्च भी होते हैं, लेकिन छतरपुर के व्यवसायी कठेल परिवार ने मृत्यु भोज कराने के बजाए किसी गरीब की बेटी की शादी कराना ज्यादा सही समझा.
हार्ट अटैक से हो गई थी गोपाल कठेल की मौत
छतरपुर से 25 किलोमीटर दूर नौगांव के रहने वाले प्रतिष्ठित व्यापारी गोपाल कठेल की मौत के बाद मृत्यु भोज कराना था, लेकिन परिवार ने मृत्यू भोज नहीं कराने का फैसला लिया. बताया जा रहा है कि 13 दिन पहले झांसी में हार्ट अटैक आने से गोपाल कठेल का निधन हो गया था. घर में कोहराम मचा था. तीनों बहनों ने अपना भाई और एक छोटे बेटे ने पिता को खो दिया था.
परिवार ने नहीं की तेरहवीं, अनाथ बेटी के कराए हाथ पीले
शुक्रवार को उनकी तेरहवीं का कार्यक्रम था, आमतौर पर ऐसे मौकों पर भव्य भोज का आयोजन होता है, लेकिन गोपाल की बहन तृप्ति कठेल और मासूम बेटे कान्हा ने इस परंपरा को सिरे से नकार दिया. उन्होंने समाज को संदेश दिया कि किसी के जाने के बाद दिखावे के भोजन से बेहतर है, किसी जीवित इंसान के जीवन में खुशियां लाई जाए. तभी उन्होंने एक अनाथ बच्ची के हाथ पीले करने का फऐसला लिया. साथ ही समाज को एक अच्छा संदेश भी दिया.

गृहस्थी के सामान के साथ 20 हजार की कराई एफडी
जिस घर से पिता की अर्थी उठी थी, उसी घर के आंगन में 22 फरवरी को शहनाई गूंजेगी. 21 वर्षीय अनाथ लक्ष्मी अनुरागी, जिसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं थे. उसका विवाह कठेल परिवार ने अपने खर्च पर शादी कराने का फैसला लिया. 6 साल के मासूम कान्हा ने अपनी मासूम उम्र में पिता की तेरहवीं पर दुल्हन लक्ष्मी को खुशियां दी. वहीं मृतक की बहन तृप्ति कठेल ने उसे बेटी की तरह करीब 40 प्रकार की गृहस्थी सामग्री भेंट की. उसके नाम 20 हजार रुपए की एफडी भी कराई.

अनाथ लक्ष्मी का 'भाई' बना 6 साल का कान्हा
लक्ष्मी अनुरागी की शादी में भाई की रस्मों में मासूम कान्हा निभाएगा. कठेल परिवार की इस पहल ने पूरे जिले में चर्चा छेड़ दी है. मृतक की बहन तृप्ति कठेल का कहना है कि "वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामाजिक सुधार के संदेशों से प्रेरित हैं. उन्होंने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं में कर्ज लेकर पैसा बर्बाद करने से अच्छा है कि उस धन का उपयोग किसी जरूरतमंद की शिक्षा या शादी में किया जाए. स्वर्गीय गोपाल कठेल को यह नौगांव की सबसे सच्ची और भावुक श्रद्धांजलि थी.
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वहीं दुल्हन की मौसी सोमवती अनुरागी ने बताया "22 तारीख को बेटी की शादी है. तृप्ति कठेल ने अपने भाई की तेरहवीं ना कराकर मेरी बहन की बेटी के हाथ पीले किए हैं, दहेज के समान के साथ 20 हजार की एफडी भी दी है." वहीं मृतक की बहन तृप्ति कठेल ने कहा कि "सभी से निवेदन है, मृत्यू भोज बंद कर असहाय और गरीब की मदद की जाए. इससे मृत आत्मा को शांति मिलेगी और किसी का भला भी होगा."

