300 साल पुरानी मान्यता आज भी, होलिका दहन की आग से निगेटिव इनर्जी का खात्मा
होलिका दहन के बाद इसके आग के अवशेष लोग अपने घरों पर ले गए. मान्यता है कि इससे भूत-प्रेत की बाधाएं खत्म हो जाती हैं.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 1:14 PM IST
रिपोर्ट : मनोज सोनी
छतरपुर : छतरपुर शहर में इस बार करीब 600 जगहों पर होलिका दहन किया गया. चंद्रग्रहण के कारण इस बार होली 3 मार्च की जगह 4 मार्च को मनाई जाएगी. सोमवार शाम से होलिका दहन को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया. आसपास के जंगलों से एक दिन पहले होली की लकड़ी काटकर लाई गई. गोबर के कंडे, ओपल और बरूला बनाए इकट्ठे किए गए. इन्हीं कंडों को जलाकर लोग परंपरागत रूप से होली पर्व का शुभारंभ हुआ.
प्रेत बाधा दूर करने की मान्यता
छतरपुर जिले में आज भी होलिका दहन की अलग परंपरा कायम है. होलिका दहन से पहले महिलाओं ने पूजा-अर्चना की. छतरपुर में हर साल की भांति सबसे पहले होलिका दहन सारनी दरवाजे के बाहर से किया गया. यहां छतरपुर के राज वंशज, पृथ्वीराज चौहान के वंशज होलिका दहन करने आए. इसके बाद होलिका दहन का उत्सव शुरू हुआ. होलिका दहन के बाद लोग इसकी आग अपनी घर ले गए. इसे घर ले जाकर घर परिवार की नजर उतरी गई. मान्यता है कि इससे प्रेत-बाधाएं दूर होती हैं. सिर से काला नमक, मिर्ची, राई को उतारकर नकारात्मक ऊर्जा नष्ट करने की भी परंपरा है.

बागेश्वर धाम में होलिका दहन
पृथ्वीराज चौहान के वंशज द्रगेन्द्र सिंह चौहान बताते हैं "छतरपुर की पहली होली मेरे वंशज द्वारा जलाई जाती है. जब से छतरपुर बसा है, तभी से पहली होली सारनी दरवाजे पर जलती है. हमारे पूर्वज महाराजा छत्रसाल के साथ आये थे. वहीं, बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर होली की पूजा को लेकर कहा "खड़ाऊ ओर चमिटा रखकर, सात मालपुआ, मीठी पूड़ी का प्रसाद, रात्रि काल में संन्यासी बाबा का पूजन किया गया. ग्रहण के दौरान भगवान का नामजप का बड़ा प्रभाव है."
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भगवान की कृपा से बच गए भक्त प्रह्लाद
पंडित सौरभ तिवारी बताते हैं "होलिका भक्त प्रहलाद की बुआ थी. हिरण्यकश्यप कई तरीकों से भक्त प्रहलाद को नहीं मार पाया. अपने भाई असुर हिरण्यकश्यप के आदेश पर होलिका ने चाल चली. वह आग में प्रहलाद को लेकर बैठ गयी. होलिका के पास एक ऐसा वस्त्र था, जिससे वह आग में नहीं जल सकती थी. वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से वह स्वयं जलकर राख हो गई और प्रहलाद सुरक्षित बच गए."

