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छतरपुर में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट पर शिक्षक कर रहा था नौकरी, मेडिकल जांच के बाद हुआ टर्मिनेट

छतरपुर में नौकरी के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र का फर्जीवाड़ा, मेडिकल बोर्ड की जांच में खुली पोल, शिक्षक को किया गया बर्खास्त.

CHHATARPUR FAKE DISABLE CERTIFICATE
छतरपुर में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट पर शिक्षक कर रहा था नौकरी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 5, 2026 at 8:45 PM IST

3 Min Read
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छतरपुर: छतरपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां लम्बे समय से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर एक शिक्षक सरकारी नौकरी कर रहा था. शिकायत के बाद जब मेडिकल बोर्ड ने जांच रिपोर्ट दी तो जांच चौंकाने वाली निकली और शिक्षक को सीधे बर्खास्त कर दिया गया.

छतरपुर जिले से 100 किलोमीटर दूर बक्सवाहा इलाके में पदस्थ एक शिक्षक को सरकारी नौकरी में दिव्यांगता के गलत इस्तेमाल का खमियाजा भुगतना पड़ा. जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, छतरपुर द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, प्राथमिक शिक्षक के पद पर कार्यरत सुरेन्द्र पटेल की नियुक्ति को लेकर दस्तावेजों में गड़बड़ी का मामला सामाने आया है.

Chhatarpur Fake disability Certificate
मेडिकल बोर्ड की जांच में खुली पोल, शिक्षक बर्खास्त (ETV Bharat)

दिव्यांगता श्रेणी 'HH' (श्रवण बाधित) के तहत हुई थी नियुक्ति

दमोह जिले के बटियागढ़ ग्राम लुकायन के रहने वाले सुरेन्द्र पटेल पिता ऋषि कुमार पटेल, रोल नंबर 22769673 को 30 मार्च 2023 को दिव्यांगता श्रेणी 'HH' (श्रवण बाधित) के अंतर्गत शासकीय केन्द्रीय प्राथमिक शाला बक्सवाहा जिला छतरपुर में प्राथमिक शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था. लेकिन नियुक्ति नियमों के तहत उनका मेडिकल बोर्ड से परीक्षण होना बाकी थी. जब मेडिकल बोर्ड ने मामले की जांच की तो 40% की जगह सिर्फ 23% दिव्यांगता साबित हुई.

मेडिकल बोर्ड ने 23 प्रतिशत ही पाया दिव्यांग

छतरपुर मेडिकल बोर्ड ने जुलाई 2024 में सुरेन्द्र पटेल को गहन जांच के लिए संभागीय मेडिकल बोर्ड, सागर रेफर किया था. 18 जून 2026 को क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं सागर संभाग द्वारा प्रस्तुत प्रमाणीकरण रिपोर्ट में पाया गया कि सुरेन्द्र पटेल की श्रवण बाधिता केवल 23 प्रतिशत है, जो नियमों का उल्लंघन है.

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दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 क्या कहता है

सरकारी नियमों और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत, दिव्यांग श्रेणी में आरक्षण या लाभ पाने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता होना अनिवार्य होता है. 23% दिव्यांगता होने के कारण उन्हें शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया.

जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया बर्खास्तगी का आदेश

छतरपुर के डिप्टी कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी कौशल सिंह से जब बात हुई तो उन्होंने बताया "जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सुरेन्द्र पटेल को पद पर बनाए रखना पूरी तरह से अवैधानिक है, अतः लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश के निर्देशों का पालन करते हुए उनकी प्राथमिक शिक्षक पद पर की गई नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है."