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छतरपुर में बुंदेली होली की हुड़दंग शुरू, कलाकार नीतू चौरसिया ने फाग गाकर मचाई धूम

छतरपुर की चौपालों और मंदिरों में जमती हैं फाग की महफिलें, बुंदेलखंड में 5 दिन तक मनाया जाता है होली का त्योहार.

CHHATARPUR HOLI FESTIVAL
कलाकार नीतू चौरसिया ने फाग गाकर मचाई धूम (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 3, 2026 at 10:30 PM IST

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Updated : March 3, 2026 at 10:41 PM IST

3 Min Read
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रिपोर्ट: मनोज सोनी

छतरपुर: होली की हुड़दंग लीला शुरू हो चुकी है. बुंदेलखंड इलाके में फागुन के महीने में गांव की चौपालों और मंदिरों में बुंदेली फाग की अनोखी महफिलें जमती हैं. रंगों की बौछार के बीच गुलाल-अबीर से सने चेहरों वाले फगुआरों के होली गीत (फाग) जब फिजा में गूंजते हैं, तो ऐसा लगता है कि श्रृंगार रस की बारिश हो रही है. बुंदेली लोक गायिका नीतू चौरसिया ने पेड़ की छांव के नीचे होली की फाग गाकर धूम मचा दी.

बुदेंलखंड में 5 दिन तक होली

बुंदेलखंड में होली का त्योहार अलग ही अंदाज और ढंग में मनाया जाता है. जिसकी तैयारियां 2 दिन पहले शुरू हो जाती है. शहर सहित गांव-गांव में गोबर के कंडे और बरूला बनाए जाते हैं. होली पर इन्हीं कंडों को जलाकर लोग परंपरागत रूप से होली का पर्व मानते हैं. बुदेंलखंड में 5 दिनों तक होली का पर्व चलता रहता है. होलिका दहन से लेकर रंग पंचमी तक बुंदेलखंड के गांवों की चौपालों में फाग गायन, मंदिरों में बुंदेली गीत गाकर भगवान कृष्ण की भक्ति और होली मिलन समारोह से लेकर अन्य कार्यक्रम होते हैं.

छतरपुर के चौपालों और मंदिरों में जमती हैं फाग के महफिलें (ETV Bharat)

चौपालों में ढोल, मंजीरे के बीच उड़ते हैं गुलला

सुबह हो या शाम गांव की चौपालों में सजने वाली फाग की महफिलों में ढोलक की थाप और मंजीरे की झंकार के साथ उड़ते हुए अबीर-गुलाल का अंदाज भी अलग रहता है. छतरपुर जिले के पठापुर रोड पर रहने बाली बुदेंली लोक गायिका नीतू चौरसिया ने पेड़ की छांव के नीचे बैठकर होली पर बुंदेली में गीत गाकर होली की हुड़दंग में चार चांद लगा दिया.

बुदेंली गायिका नीतू चौरसिया ने बताया, "बुंदेलखंड में होली का त्योहार अलग ही अंदाज में मनाया जाता है. यहां पर कई कवि हुए जिन्होंने होली पर बहुत गीत बनाए हैं, जो आज भी लोगों के दिलो-दिमाग पर बसे हुए हैं. पुराने समय में लोग हिलमिल कर गीत गाते थे और पूरी होली संगीतमय होती थी."

Chhatarpur Phaag gatherings
छतरपुर में बुंदेली होली की हुड़दंग शुरू (ETV Bharat)

कवि ईश्वरी हैं बुन्देली फाग के जनक

बुंदेलखंडी फाग के जनकवि ईश्वरी को माना जाता है. उन्होंने फाग की 32 विधायों को इजाद किया था. जनकवि ईश्वरी की गाई हुई फाग आज भी बुंदेली कवि, गायक इस्तेमाल कर लोगों को रोमांचित करते हैं. जिसमें जंगला, पारकी फाग, चौकड़िया, दहक्वा, अधर की फाग, सिंघाव्लोकन और छंददार फाग शामिल है. इन फागों में हंसी ठिठोली के गीत, कृष्ण और राधा के प्रसंग, राम के गीतों को भी गाया जाता है, जो सैकड़ों साल पुरानी परंपरा है.

Last Updated : March 3, 2026 at 10:41 PM IST