देवशयनी एकादशी की तारीख, योग निद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु, चातुर्मास में क्या करें, क्या न करें
विवाह समेत कई मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक, भगवान विष्णु होंगे योग निद्रा में, सावन में भोलेनाथ संभालेंगे कार्यभार

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 9, 2026 at 10:30 AM IST
|Updated : July 9, 2026 at 11:07 AM IST
शहडोल : जुलाई के अंतिम सप्ताह में चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है, जिसके बाद विवाह, गृह प्रवेश समेत कई मांगलिक कार्यों पर पाबंदी होगी. चातुर्मास से तात्पर्य है वो चार महीने जिस दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान महादेव संसार का कार्यभार संभालते हैं और इसके बाद सावन मास की भी शुरुआत होती है.
कब से शुरू हो रहा चातुर्मास?
ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री बताते हैं, '' शुक्ल पक्ष एकादशी जिसे देवशयनी एकादशी भी कहते हैं, इसकी शुरुआत 25 जुलाई 2026 से हो रही है और इसका समापन 20 नवंबर 2026 देवउठनी एकादशी को होगा.'' ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री कहते हैं, '' धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु 4 महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं, और इस दौरान ब्रह्मांड का संचालन भगवान शिव के हाथों में होता है.''
चातुर्मास में इन मांगलिक कार्यों पर लग जाता है ब्रेक
ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री बताते हैं, ''चातुर्मास की शुरुआत के साथ ही नर्मदा परिक्रमा में भी चार महीने के लिए ब्रेक लग जाता है. इसके अलावा शादी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, दुकान का उद्घाटन, मकान का उद्घाटन, जैसे मांगलिक कार्यों पर भी पूरी तरह से पाबंदी होती है. या यूं कहें कि इस दौरान इस तरह के मांगलिक कार्यों को करने से पूरा या शुभ फल नहीं मिलता. दीपावली के बाद भगवान विष्णु जब योग निद्र से उठते हैं, तब देवउठनी एकादशी मनाई जाती है और फिर सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है.''
चातुर्मास में करें शिव भक्ति
ज्योतिष आचार्य कहते हैं कि जैसे ही चातुर्मास की शुरुआत होगी, उसी के साथ ही ब्रह्मांड की कमान भगवान भोलेनाथ के हाथ में आ जाएगी. इस समय शिव भक्ति करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. इस दौरान शिव भक्त रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप करते नजर आएंगे. सोमवार के दिन शिव मंदिर जाकर जल, दूध, दही, गंगा जल, शहद, शक्कर, फूल, बेलपत्र चढ़ाकर महादेव को प्रसन्न करते हैं, शिव जी को इस अवधि में प्रसन्न करने से घर में शांति बनी रहती है, भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद बना रहता है.
चातुर्मास तप तपस्या और योग का समय
ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि चातुर्मास के जो 4 महीने होते हैं, ये तपस्या योग का महीना भी होता है. इस दौरान संत महात्मा किसी जंगल या कहीं एकांत स्थान में जाकर धुनी रमाते हैं, चार माह तक लकड़ी जलती रहती है, वहां धुनी रमाते हैं, और एक टाइम ही आहार लेते हैं और अपनी तपस्या या ध्यान में मग्न रहते हैं, जिससे विश्व का कल्याण होता है, और यही वजह है कि चातुर्मास विशेष रूप से तपस्या तप और पूजा पाठ के लिए प्रसिद्ध है.
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चातुर्मास एक तरह से सभी तरह के भौतिक सुखों को छोड़कर जप तप और दान करने का समय होता है. इस दौरान लोग सात्विक जीवन जीते हैं, और कई तरह के व्रत जैसे केवल एक समय भोजन करना, बिस्तर का त्याग करना, सुबह उठकर स्नान करना इस तरह पालन करते हैं.

