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4 महीने नहीं बजेगी शहनाई, 25 जुलाई से थम जाएंगे मांगलिक कार्य, योगनिद्रा में जा रहे भगवान

चार महीने तक शादी, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे नहीं होंगे शुभ कार्य, योगनिद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु,25 जुलाई से शुरू हो रहा चातुर्मास. उज्जैन से राहुल सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

CHATURMAS MANGALIK WORK STOP
25 जुलाई से थम जाएंगे मांगलिक कार्य (Getty Image)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 7, 2026 at 8:06 PM IST

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Updated : July 7, 2026 at 8:19 PM IST

4 Min Read
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उज्जैन: यदि आप विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी अन्य मांगलिक कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए जरूरी है. 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं. ऐसे में अब 21 नवंबर के बाद ही विवाह सहित अन्य शुभ कार्यों के मुहूर्त उपलब्ध होंगे. वहीं, इससे पहले 15 जुलाई से आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के साथ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा. जिसे साधना और देवी उपासना के लिए विशेष महत्व का समय माना जाता है.

25 जुलाई से योगनिद्रा में चले जाते हैं भगवान विष्णु

25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे. इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के 4 महीनों के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत, चौलकर्म सहित सभी मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी. अब ऐसे शुभ कार्य 21 नवंबर को देव प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी के बाद ही दोबारा शुरू होंगे. इससे पहले 15 जुलाई से आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के साथ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होगी, जो 23 जुलाई तक चलेगी.

ज्योतिषाचार्य ने दी जानकारी (ETV Bharat)

बंद हो जाएंगे शुभ कार्य और शादी-विवाह

ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार इस अवधि में भडल्या नवमी का शुभ संयोग भी बनेगा, लेकिन 16 जुलाई से गुरु तारा अस्त होने के कारण विवाह के मुहूर्त प्रभावी नहीं रहेंगे. इसलिए इस दौरान भी वैवाहिक आयोजन संभव नहीं होंगे. हालांकि चातुर्मास के समय विवाह और अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते, लेकिन पूजा-पाठ, जप-तप, धार्मिक अनुष्ठान और तीर्थ यात्राओं का विशेष महत्व रहता है. इस अवधि को भगवान विष्णु की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

12 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कई दुर्लभ और शुभ ज्योतिषीय संयोगों के बीच होगा. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर कर्क राशि में चंद्रमा और गुरु की युति से शक्तिशाली गजकेसरी योग का निर्माण होगा. इसके साथ ही बुधवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग बनने से बुध-पुष्य योग भी रहेगा. ज्योतिषाचार्य का कहना है कि करीब 12 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है. धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह योग नए कार्यों की शुरुआत, धन निवेश, व्यापार में विस्तार व मंत्र-साधना और देवी आराधना के लिए बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है.

CHATURMAS VIVAH GRAH PRAVESH STOP
4 महीने नहीं होंगे शादी और मांगलिक कार्य (Getty Image)

साल में 4 बार मनाई जाती है नवरात्रि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में 4 नवरात्रि मनाई जाती है. इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि को सार्वजनिक रूप से मनाया जाता है. जबकि आषाढ़ और माघ में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. शाक्त परंपरा में इस पर्व का विशेष महत्व है. यह समय देवी उपासना, तंत्र-मंत्र साधना, जप-तप और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे श्रद्धा और विधि-विधान से की गई साधना शीघ्र फल प्रदान करती है.

चातुर्मास के 4 महीने में कई प्रमुख पर्व, 21 नवंबर को उठेंगे भगवान

चातुर्मास के 4 महीनों में कई प्रमुख धार्मिक पर्व और उत्सव मनाए जाएंगे. इस अवधि में गुरु पूर्णिमा, हरियाली तीज, नाग पंचमी, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी, पितृपक्ष, शारदीय नवरात्रि, विजयादशमी (दशहरा), शरद पूर्णिमा, करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ महापर्व, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाएंगे. इसके बाद 21 नवंबर को देव प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागृत होने के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और अन्य सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत फिर से हो जाएगी.

Last Updated : July 7, 2026 at 8:19 PM IST