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JDU विधायक की बढ़ी मुश्किलें, फायरिंग मामले में आरोप गठित

सात साल पूर्व फायरिंग मामले में कुचायकोट विधायक पप्पू पांडेय समेत तीन पर आरोप गठित हुआ है. रिपोर्ट- अटल बिहारी पांडेय.

GOPALGANJ COURT
जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 20, 2026 at 5:36 PM IST

2 Min Read
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गोपालगंज : जेडीयू के विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय की मुश्किलें बढ़ने वाली है? दरअसल गोपालगंज के चर्चित सात साल पुराने फायरिंग मामले में एक अहम मोड़ आया है.

विधायक सहित तीन लोगों पर आरोप गठित : सिविल कोर्ट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश 3 सह एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट के न्यायाधीश राजेंद्र कुमार पाण्डेय की अदालत ने सुनवाई की है. कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड के विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय समेत तीन आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित (चार्ज फ्रेम) कर दिया है.

जानलेवा हमला और साजिश का मामला : अदालत में जिन तीन प्रमुख आरोपितों पर आरोप तय किए गए हैं, उनमें विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय के अलावा उनके बड़े भाई सतीश पांडेय तथा उनके भतीजे व पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष मुकेश पांडेय शामिल हैं. इन तीनों पर जानलेवा हमला करने और आपराधिक साजिश रचने से जुड़ी धाराओं के तहत मामला चलाया जा रहा है.

JDU MLA Pappu Pandey
गोपालगंज व्यवहार न्यायालय (ETV Bharat)

क्या है पूरा मामला? : दरअसल, यह पूरा मामला वर्ष 2019 में दर्ज कराई गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है. मीरगंज थाना क्षेत्र के नयागांव तुलसिया सिंगहा टोला निवासी स्वर्गीय वशिष्ठ तिवारी की पत्नी फूलमती कुंवर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

FIR में क्या कहा गया था? : दर्ज प्राथमिकी में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उनके बेटे अभिमन्यु तिवारी को निशाना बनाते हुए जान से मारने की नीयत से अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस घटना के बाद क्षेत्र में काफी दहशत और राजनीतिक सरगर्मी फैल गई थी.

मामले की संवेदनशीलता और जनप्रतिनिधि से जुड़े होने के कारण इसकी सुनवाई एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में चल रही है. अदालत द्वारा आरोप गठित किए जाने के बाद अब इस मामले में गवाहों के बयान और साक्ष्यों का परीक्षण शुरू होगा.

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज : कानून विशेषज्ञों का कहना है कि चार्ज फ्रेम होना, ट्रायल (विचारण) की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है. जिससे अब सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा. इस फैसले के बाद क्षेत्र की राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.

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