नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने साय सरकार पर लगाया आरोप, कहा- नहीं लागू किया वन अधिकार कानून, राष्ट्रपति ने लिया संज्ञान
डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, वन अधिकार अधिनियम प्रभावी ढंग से लागू कराने की मांग, सचिवालय से आया जवाब

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : May 31, 2026 at 4:30 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य सरकार पर वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि कानून लागू हुए 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद हजारों आदिवासी और पारंपरिक वन निवासी परिवार अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं. इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की गई है, जिस पर राष्ट्रपति ने संज्ञान भी लिया है इस महंत ने आभार जताया है.
राष्ट्रपति को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की मांग
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति को अर्धशासकीय पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(घ) को प्रभावी ढंग से लागू कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत वन भूमि स्थित जलक्षेत्रों पर स्थानीय समुदायों को अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन राज्य में ऐसा नहीं हो रहा है.

50 हजार से अधिक परिवारों के अधिकारों का मुद्दा
महंत ने पत्र में उल्लेख किया है कि राज्य के 50 हजार से अधिक अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी परिवार मछली पालन और जल संसाधनों पर निर्भर हैं. इसके बावजूद उन्हें सामुदायिक अधिकार पत्र नहीं दिए गए हैं, जिससे वे अपने कानूनी अधिकारों से वंचित हैं.
जलाशयों पर ठेकेदारों का कब्जा होने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य की वन भूमि पर स्थित लगभग 1.58 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र को वन अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत ठेकेदारों को पट्टे और निविदा के माध्यम से सौंपा जा रहा है. इससे स्थानीय आदिवासी और वन निवासी अपने ही संसाधनों पर अधिकार पाने के बजाय मजदूर बनकर काम करने को मजबूर हैं.
राज्य सरकार की वर्तमान मछली नीति वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है. बड़े जलाशयों को ठेका प्रणाली के माध्यम से संचालित किए जाने से स्थानीय समुदायों के हित प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें कानून के तहत मिलने वाले अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं.- डॉ चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष

राज्यपाल और मुख्यमंत्री को निर्देश देने की मांग
महंत ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1) (घ) का तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके और पात्र परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार प्राप्त हो.
राष्ट्रपति के संज्ञान पर जताया आभार
राष्ट्रपति द्वारा मामले को संज्ञान में लिए जाने पर डॉ. चरणदास महंत ने आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार और प्रशासन इस मुद्दे की गंभीरता को समझेंगे और आदिवासियों तथा वन निवासियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे.
राजनीतिक और सामाजिक महत्व का मुद्दा
वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर उठे इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति के स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बाद राज्य सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है और आदिवासी समुदायों को उनके अधिकार दिलाने के लिए क्या पहल की जाती है.

