घंटों कड़ी धूप में खड़े रहने पर भी नहीं मिला टोकन, किसानों ने अपने दस्तावेजों से बना दी लाइन
शिवपुरी में खाद के लिए वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम. किसानों ने कहा, केंद्र पर न छांव की व्यवस्था न पीने के पानी की.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 12, 2026 at 1:20 PM IST
शिवपुरी: जिले में खाद वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था को समाप्त करने के लिए शासन और प्रशासन ने ई-टोकन की व्यवस्था की है, परंतु बदरवास तहसील से टोकन वितरण केंद्र की एक चौंकाने वाली तस्वीर इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रही है. इस तस्वीर में सोमवार को किसानों ने धूप और गर्मी के चलते अपने दस्तावेजों को लाइन में लगा दिया. किसानों का कहना है कि टोकन वितरण केंद्र पर न तो छांव की कोई व्यवस्था की गई है और न ही पानी की.
किसान रमेश किरार बिजरौनी के अनुसार बदरवास में बीआरसीसी कार्यालय स्थित टोकन वितरण केंद्र पर सुबह से ही किसानों की भीड़ लगना शुरू हो गई थी. लेकिन कर्मचारी सुबह 11 बजे पहुंचे. इसके बाद टोकन वितरण की प्रक्रिया इतनी धीमी रही कि लाइन में लगे-लगे दो घंटे हो गए. 11 बजे तक आसमान से बरसती आग के कारण उन्हें लाइन में से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा गया.
किसानों ने कहा, टोकन वितरण केंद्र पर न छांव की कोई व्यवस्था है न पीने के पानी का इंतजाम
रमेश किरार ने कहा, हम सुबह से धूप में टोकन लेने के लिए खड़े थे, लेकिन 11 बजे ऑफिस खुला. इसके बाद दो घंटे में धूप में खड़े रहे. वहां न तो छांव की कोई व्यवस्था है और न ही पीने के पानी का कोई इंतजाम किया गया है.
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किसान बलराम खाईखेड़ा ने कहा, हम जब खाद के कट्टे लेने के लिए गोदाम पर पहुंचे तो हमसे कहा जा रहा था कि आपको अगर एनपीके चाहिए तो पहले आप ऊपर रखे कट्टों को हटाओ, इसके बाद आपके कट्टे दिए जाएंगे. जबकि हमसे दस रुपये प्रति कट्टा लोडिंग का लिया जाता है.

काफी मशक्कत के बाद बड़ी मुश्किल से टोकन ले पाए किसान
किसानों के अनुसार उन्होंने आपसी सहमति से अपने-अपने दस्तावेजों को पत्थर से दबा कर लाइन में रख दिया ताकि धूप और गर्मी से बचा जा सके. किसी तरह धूप में बड़ी मुश्किल से टोकन ले पाए. टोकन वितरण केंद्र पर न तो किसानों को लाइन में लगाने के लिए छांव की व्यवस्था की गई और न ही वहां खाद लेने आने वाले किसानों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था की गई.
टोकन के बाद खाद गोदाम पर शाम चार बजे तक नहीं मिला खाद
किसानों का कहना है कि उनकी परेशानी सिर्फ यहीं नहीं थमीं. जब वह टोकन लेकर खाद गोदाम पहुंचे तो शाम पांच बजे तक उन्हें खाद नहीं मिला. किसानों के अनुसार गोदाम पर मौजूद कर्मचारियों का कहना था कि एनपीके के कट्टे नीचे दबे हैं. हम्मालों का कहना था कि आपको अगर एनपीके के कट्टे चाहिए तो पहले इन पांच सौ कट्टों को हटाओ, इसके बाद ही आपको खाद के कट्टे मिल पाएंगे. किसानों का कहना है कि उनसे खाद की कीमत के साथ दस रुपये प्रति कट्टा लोडिंग का भी लिया जाता है, इसके बाबजूद उनसे ही खाद के कट्टे हटाने के लिए कहा जा रहा था.
इस मामले में कृषि, उपसंचालक, पीएस करोरिया ने कहा, "मैंने वीडियो देखा है, मुझे बताया गया है कि यह वीडियो ऑफिस खुलने से पहले सुबह 9 बजे का है. हालांकि मैंने वहां कर्मचारियों को बोला है कि किसानों को छांव में बिठाया जाए और जिसका टोकन आए उसको बुलाकर टोकन दे दिया जाए. पानी का मटका रखवाने के भी निर्देश दिए हैं."

