ETV Bharat / state

NEET पीजी 2026 में किए गए बड़े बदलाव, 30 अगस्त को होगी परीक्षा

नीट पीजी परीक्षा 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए है. सवालों की संख्या को कम किया गया है. आगे पढ़ें पूरी खबर.

NEET PG 2026
कॉसेप्ट फोटो (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 4, 2026 at 2:25 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

पटना : मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिले की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इस वर्ष कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज यानी एनबीईएमएस (NBEMS) ने नीट पीजी-2026 का शेड्यूल और नई गाइडलाइन जारी कर दी है. परीक्षा 30 अगस्त को कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित होगी, जबकि आवेदन प्रक्रिया 21 जुलाई तक चलेगी. इस बार परीक्षा पैटर्न से लेकर सेंटर आवंटन और बायोमेट्रिक सत्यापन तक कई नए नियम लागू किए गए हैं.

NBEMS के मुताबिक आवेदन करने के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है. हालांकि उम्मीदवारों के पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग या राज्य चिकित्सा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस की डिग्री, प्रोविजनल या स्थायी पंजीकरण और निर्धारित अवधि की रोटेटरी इंटर्नशिप पूरी होना जरूरी है.

200 की जगह अब होंगे 180 प्रश्न : इस वर्ष नीट पीजी परीक्षा के प्रारूप में सबसे बड़ा बदलाव प्रश्नों की संख्या को लेकर किया गया है. पहले जहां परीक्षा में 200 प्रश्न पूछे जाते थे, वहीं अब अभ्यर्थियों को 180 सवालों का जवाब देना होगा. परीक्षा पांच खंडों में आयोजित होगी और प्रत्येक खंड में 36 प्रश्न होंगे. हर सेक्शन के लिए 42 मिनट का समय निर्धारित किया गया है. एक बार निर्धारित समय होने के बाद अभ्यर्थी उस सेक्शन के प्रश्नों को दोबारा नहीं देख सकेंगे.

'पहले आओ-पहले पाओ' व्यवस्था समाप्त :इस बार परीक्षा केंद्रों के आवंटन में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. पहले आवेदन जल्दी करने वाले उम्मीदवारों को पसंदीदा शहर मिलने की संभावना अधिक रहती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है. अभ्यर्थी अपनी पसंद के परीक्षा शहरों का चयन करेंगे, जबकि अंतिम केंद्र का आवंटन कंप्यूटर आधारित रैंडम प्रक्रिया के तहत किया जाएगा. इस कदम को सेंटर फिक्सिंग और अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. इससे सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलने की उम्मीद है.

तीन राज्यों का विकल्प देना होगा : नई गाइडलाइन के तहत उम्मीदवारों को अपने स्थायी निवास वाले राज्य को पहली प्राथमिकता के रूप में चुनना होगा. इसके अलावा दो अन्य राज्यों का विकल्प भी देना अनिवार्य किया गया है. परीक्षा केंद्रों के बेहतर प्रबंधन और सीटों के संतुलित वितरण के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है. आवेदन के दौरान पिछले तीन महीनों के भीतर खिंचवाई गई पासपोर्ट आकार टी तस्वीर अपलोड करनी होगी. गलत या पुराने फोटोग्राफ के कारण आवेदन निरस्त होने की संभावना भी रहेगी.

आधार आधारित बायोमेट्रिक जांच होगी अनिवार्य : फर्जी अभ्यर्थियों और डमी कैंडिडेट की घटनाओं को रोकने के लिए इस बार आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल फेस रिकग्निशन की व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. अंगूठे के निशान, चेहरे की पहचान और अन्य डिजिटल माध्यमों से अभ्यर्थियों की जांच की जाएगी. एक बार आवेदन जमा होने के बाद उम्मीदवार अपने नाम, जन्मतिथि, श्रेणी और संपर्क संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियों में बदलाव नहीं कर सकेंगे. इसलिए आवेदन पत्र भरते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

देश में 50 हजार से अधिक मेडिकल पीजी सीटें : देशभर में मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएशन की कुल सीटों की संख्या 80 हजार से अधिक हो चुकी है, जिनमें एमडी, एमएस, पीजी डिप्लोमा और डीएनबी कार्यक्रम शामिल हैं. केवल एमडी, एमएस और पीजी डिप्लोमा की सीटें ही करीब 50 से 52 हजार के बीच हैं. देश के 450 से अधिक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 30 हजार सीटें उपलब्ध हैं, जबकि निजी मेडिकल संस्थानों में 22 से 25 हजार सीटों पर प्रवेश दिया जाता है. सरकारी कॉलेजों की 50 प्रतिशत सीटों पर ऑल इंडिया कोटा लागू होता है, जबकि शेष सीटों पर राज्य सरकारों के नियमों के अनुसार दाखिला किया जाता है.

ये भी पढ़ें :-

NEET और JEE के आधार पर होने वाले एडमिशन में बोर्ड परीक्षाओं के नंबर को भी मिलेगा वेटेज