झारखंड के बजट में 9 प्रतिशत की उछाल, विकास योजनाओं पर बड़ा दांव, जल संसाधन आय में रिकॉर्ड इजाफा
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड का बजट पेश कर दिया है. इस बजट का आकार पिछले साल की तुलना में 9 फीसदी बड़ा है.

Published : February 24, 2026 at 5:32 PM IST
रांची: झारखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तुलना अगर 2025-26 से की जाए, तो यह साफ तौर पर विकास, सामाजिक न्याय और संसाधन आधारित आय बढ़ाने पर केंद्रित नजर आता है. कुल बजट आकार में सरकार ने 9 प्रतिशत की वृद्धि की है. वर्ष 2025-26 में 1 लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे 2026-27 में बढ़ाकर 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह बढ़ोतरी राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति देने और नई योजनाओं के विस्तार का संकेत देती है.
योजना मद पर सरकार का फोकस
योजना मद पर सरकार का फोकस और मजबूत हुआ है. योजना बजट 91 हजार 741 करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 891 करोड़ रुपये हो गया है, यानी लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि. वहीं स्थापना बजट में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि सरकार खर्च और संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती है.
टीएसपी पर 45% की वृद्धि
इस बजट का सबसे बड़ा आकर्षण ट्राइबल सब-प्लान यानी टीएसपी है. योजना व्यय में टीएसपी के तहत खर्च 30 हजार 259 करोड़ रुपये से बढ़कर 43 हजार 940 करोड़ रुपये कर दिया गया है. करीब 45 प्रतिशत की यह वृद्धि बताती है कि आदिवासी बहुल झारखंड में समावेशी विकास सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है.
बाल बजट में 15% की बढ़ोतरी
सामाजिक क्षेत्रों में भी निरंतर निवेश जारी है. शिक्षा के लिए आवंटन 7 प्रतिशत बढ़ाकर 18 हजार 816 करोड़ रुपये किया गया है, जबकि स्वास्थ्य बजट भी 7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7 हजार 990 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इसके अलावा बाल बजट में 15 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है, जो बच्चों के पोषण, शिक्षा और संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को मजबूती देगी. जेंडर बजट भी 2026-27 में बढ़कर 34 हजार 211 करोड़ रुपये हो गया है, जो महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता पर सरकार के बढ़ते फोकस को दर्शाता है.
खनन से 23 प्रतिशत आय में इजाफा
राजस्व के मोर्चे पर भी सरकार ने मजबूत आंकड़े पेश किए हैं. कुल राजस्व आय में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. खनन से आय 21 हजार 900 करोड़ रुपये से बढ़कर 27 हजार करोड़ रुपये हो गई है, यानी 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी. उत्पाद से आय में 50 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा जल संसाधन से आय का रहा, जो 380 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये हो गई है. यह करीब 163 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि है और राज्य के संसाधनों के बेहतर दोहन की ओर इशारा करती है.
वाणिज्य कर में गिरावट
हालांकि बजट में कुछ चिंताजनक संकेत भी हैं. वाणिज्य कर से आय में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पेंशन व्यय में 2 प्रतिशत की कमी की गई है, जिसे लेकर भविष्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस हो सकती है.
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