कांग्रेस की राजनीति का नया बैच, बघेल की सीट पर बैज, बाबा की स्टीयरिंग भूपेश के हाथ
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में क्या परिवर्तन होने वाला है. एक तस्वीर ने नई कहानी छेड़ दी है. प्रवीण कुमार सिंह की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 25, 2026 at 11:03 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस इन दिनों प्रशिक्षण शिविर में संगठन को प्रशिक्षित कर रही है, लेकिन एक तस्वीर ने नेताओं से ज्यादा सीटों की राजनीति को चर्चा में ला दिया है. गाड़ी वही है, चेहरे भी वही हैं, लेकिन सीटों का गणित बदल गया है. जिस सीट पर कभी भूपेश बघेल बैठते थे, वहां अब दीपक बैज नजर आ रहे हैं और जिस स्टीयरिंग पर कभी बाबा टीएस सिंहदेव की मौजूदगी चर्चा बटोरती थी, वहां अब भूपेश बघेल कमान संभाले दिखाई दे रहे हैं. अब इसे संयोग कहिए, संदेश कहिए या फिर कांग्रेस की नई राजनीतिक बैच की पहली क्लास. इस तस्वीर ने सियासी गलियारों में चर्चा जरूर छेड़ दी है.
गाड़ी वही, लेकिन सीटों का सिलेबस बदल गया
21 जून को राहुल गांधी छत्तीसगढ़ आए, संगठन को नया मंत्र दिया और 2028 की तैयारी का रोडमैप भी समझाया. इसके बाद कांग्रेस की गाड़ी फिर सड़क पर निकली, लेकिन इस बार चर्चा यात्रा की नहीं, सीटिंग अरेंजमेंट की होने लगी. तस्वीर में गाड़ी वही दिखी, लेकिन सीटों का सिलेबस बदल चुका था. पुराने अध्याय की जगह नए किरदार दिखाई देने लगे.
बाबा की स्टीयरिंग पर भूपेश का कब्जा
कांग्रेस सरकार के दौर में जब भी बड़े राजनीतिक दौरे होते थे, गाड़ी में एक दृश्य अक्सर दिखाई देता था. स्टीयरिंग पर बाबा टीएस सिंहदेव और बगल वाली सीट पर भूपेश बघेल. लेकिन अब तस्वीर उलट गई है. स्टीयरिंग पर भूपेश बघेल दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सिर्फ बैठने की व्यवस्था है या फिर संगठन के भीतर बदलती भूमिका का संकेत भी?

बघेल की सीट पर बैज, क्या नई पीढ़ी की एंट्री?
तस्वीर का दूसरा पहलू भी कम दिलचस्प नहीं है. जिस सीट पर कभी भूपेश बघेल बैठा करते थे, वहां अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज दिखाई दे रहे हैं. कांग्रेस में संगठन और नेतृत्व की नई पीढ़ी को आगे लाने की चर्चा पहले से चल रही है. ऐसे में बैज का इस सीट पर नजर आना कई राजनीतिक अर्थ निकालने वालों को नया मसाला दे रहा है.

भाजपा को मिल गया नया मुद्दा?
भाजपा लंबे समय से यह कहती रही है कि कांग्रेस में बाबा टीएस सिंहदेव की अनदेखी होती रही है. अब तस्वीर में बाबा की पारंपरिक जगह बदलने के बाद भाजपा के नेताओं को नई टिप्पणी का मौका भी मिल सकता है. राजनीतिक विरोधी इसे नेतृत्व की खींचतान बताएंगे, जबकि कांग्रेस इसे सामान्य व्यवस्था कहकर खारिज करेगी. लेकिन राजनीति में तस्वीरें अक्सर बयान से ज्यादा असर छोड़ जाती हैं.
सीट का संदेश, स्टीयरिंग का संकेत
राजनीति में कुर्सी, सीट और स्टीयरिंग सिर्फ सामान नहीं होते, इनके अपने प्रतीक होते हैं. कौन आगे बैठा है, कौन पीछे है, किसके हाथ में स्टीयरिंग है और किसे साथ बैठाया गया है, इन सबकी अपनी राजनीतिक व्याख्या होती है. यही वजह है कि कांग्रेस की इस तस्वीर को लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं.
फिलहाल कांग्रेस की गाड़ी चल रही है, सड़क भी साफ दिखाई दे रही है और मंजिल 2028 बताई जा रही है. लेकिन यात्रा से ज्यादा चर्चा सीटों की हो रही है. बघेल की सीट पर बैज बैठे हैं, बाबा की स्टीयरिंग भूपेश के हाथ में है और राजनीतिक दर्शक इस नई सीटिंग व्यवस्था का मतलब निकालने में जुटे हैं. अब यह सिर्फ एक तस्वीर है या भविष्य की पटकथा का ट्रेलर, इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा.

