मानसून से पहले चंडीगढ़ के सुखना झील की मेगा सफाई, बारिश से पहले तेज हुआ डी-सिल्टिंग अभियान, हटाई गई 34 हजार घनमीटर गाद
मानसून से पहले सुखना झील से 34 हजार घनमीटर गाद हटाई गई. जल क्षमता बढ़ाने और जलभराव रोकने के लिए अभियान जारी है.

Published : July 1, 2026 at 12:00 PM IST
चंडीगढ़: मानसून से पहले सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और संभावित जलभराव से निपटने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़े स्तर पर डी-सिल्टिंग और सफाई अभियान तेज कर दिया है. इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार अब तक झील से करीब 34 हजार घनमीटर गाद निकाली जा चुकी है. मौसम अनुकूल रहा तो बारिश शुरू होने तक यह अभियान जारी रहेगा.
80 फीसदी डी-सिल्टिंग का काम पूरा: करीब 565 एकड़ में फैली सुखना झील वर्ष 1988 से राष्ट्रीय वेटलैंड का दर्जा प्राप्त है. शहर की पहचान मानी जाने वाली इस झील में लंबे समय से जमा हो रही गाद जल भंडारण क्षमता को प्रभावित कर रही थी. प्रशासन ने विशेषज्ञ संस्थानों की सलाह पर झील के उस हिस्से में डी-सिल्टिंग शुरू की, जहां गर्मियों में पानी सूख जाने से मशीनों के जरिए खुदाई करना आसान होता है. अधिकारियों के अनुसार अब तक करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है.
34 हजार घनमीटर गाद हटाई गई: इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने बताया कि झील के रेगुलेटरी एंड से करीब 34 हजार घनमीटर गाद निकाली जा चुकी है. यह चार वर्षों बाद इतने बड़े स्तर पर चलाया जा रहा डी-सिल्टिंग अभियान है. विभाग का मानना है कि गाद हटने से झील में अधिक वर्षा जल संग्रहित हो सकेगा और मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था भी बेहतर बनी रहेगी.

निकाली गई मिट्टी का हो रहा उपयोग: डी-सिल्टिंग के दौरान निकाली गई मिट्टी को फेंका नहीं जा रहा है. प्रशासन इसका उपयोग झील के किनारों और पैदल मार्गों को मजबूत करने में कर रहा है. एक्सकेवेटर, जेसीबी और टिप्परों की मदद से लगातार काम चल रहा है. इससे बरसात के दौरान कटाव रोकने के साथ-साथ झील के आसपास के क्षेत्र को भी सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी.
सुखना चो की भी हो रही सफाई: इंजीनियरिंग विभाग के साथ वन विभाग ने भी सुखना चो की सफाई शुरू कर दी है. चो के तल और किनारों से प्लास्टिक कचरा, झाड़ियां और खरपतवार हटाए जा रहे हैं ताकि बारिश का पानी बिना किसी बाधा के बह सके. अधिकारियों का कहना है कि समय पर सफाई नहीं होने पर भारी बारिश के दौरान पानी छोड़े जाने की स्थिति में मोहाली के बलटाना और आसपास के इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है.
दो लाख वर्गमीटर क्षेत्र में विशेष अभियान: झील के करीब दो लाख वर्गमीटर क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है. इसके तहत अतिरिक्त कमल के पौधे, खरपतवार और अन्य कचरे को हटाया जा रहा है. प्रशासन का उद्देश्य पानी की गुणवत्ता में सुधार करना, जलीय जीवों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना और पर्यटकों को स्वच्छ एवं आकर्षक झील उपलब्ध कराना है.

पांच वर्षीय योजना पर भी काम जारी: पिछले वर्ष चंडीगढ़ प्रशासन ने सुखना झील के संरक्षण और विकास के लिए पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान तैयार किया था. इसमें जल संरक्षण, झील की नियमित सफाई, जलीय जीवों की सुरक्षा, पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार और सोलर बोट्स को बढ़ावा देने जैसे कई प्रावधान शामिल हैं. डी-सिल्टिंग अभियान इसी व्यापक योजना का हिस्सा है.
एक महीने से डी-सिल्टिंग का अभियान जारी: मामले में इंजीनियरिंग विभाग के चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने कहा कि, "पिछले एक महीने से डी-सिल्टिंग का अभियान लगातार चल रहा है. हमने 34 हजार घनमीटर गाद हटाने का लक्ष्य रखा था, जो लगभग पूरा हो चुका है. यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है तो अभियान जारी रहेगा और अधिक गाद निकाली जाएगी, ताकि मानसून के दौरान सुखना झील में जलभराव जैसी स्थिति पैदा न हो."
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