जेईई मेंस 2026 में चंडीगढ़ का डबल धमाका: 12-12 घंटे की पढ़ाई से कपिश और आदित्य बने टॉपर
चंडीगढ़ के कपिश और आदित्य ने 12-12 घंटे पढ़ाई कर जेईई मेंस 2026 में 99.9 परसेंटाइल हासिल किया.

Published : February 18, 2026 at 11:02 AM IST
पंचकूला: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा घोषित जेईई मेंस 2026 के परिणामों में चंडीगढ़ के दो छात्रों कपिश मित्तल और आदित्य गुप्ता ने 99.9 परसेंटाइल हासिल कर संयुक्त रूप से टॉप किया है. दोनों की रैंक समान रही, जिससे शहर में खुशी की लहर है. खास बात यह है कि ये दोनों स्टूडेंट्स एक ही श्री चैतन्य कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करते थे. ईटीवी भारत से बातचीत में दोनों छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित पढ़ाई, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया.
"12-12 घंटे की पढ़ाई ने दिलाई सफलता": कपिश मित्तल ने बताया, "मैं रोजाना 12 घंटे पढ़ाई करता था. तीन-तीन या चार-चार घंटे के स्लॉट बनाकर पढ़ाई करता था ताकि फोकस बना रहे." उन्होंने कहा, " हमें श्री चैतन्य कोचिंग कोचिंग सेंटर के शिक्षक जो भी निर्देश देते थे, मैं उसे पूरी ईमानदारी से फॉलो करता था. 11वीं की क्लास के बाद तीन घंटे की सेल्फ स्टडी नियमित रूप से करता रहा." कपिश ने रिवीजन को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि, "रिवीजन बहुत जरूरी है. इससे छूटे हुए टॉपिक और बैकलॉग भी कवर हो जाते हैं और कॉन्सेप्ट क्लियर हो जाते हैं."
"प्रैक्टिस से आया टाइम मैनेजमेंट": आदित्य गुप्ता ने भी 12 घंटे की नियमित पढ़ाई को अपनी सफलता का आधार बताया. उन्होंने कहा कि, "मैं 5-4 और 3 घंटे के स्लॉट में पढ़ाई करता था. टीचर्स का लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा." टाइम मैनेजमेंट को लेकर आदित्य ने कहा कि, "परीक्षा में समय का सही उपयोग प्रैक्टिस से ही संभव है. लगातार मॉक टेस्ट और अभ्यास से समझ आ जाता है कि कौन-सा सवाल पहले करना है." आदित्य ने आगे कहा, "टीचर्स द्वारा दिया गया काम पूरा करने के बाद भी मैं सेल्फ स्टडी करता था, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता गया."
केमिस्ट्री रही चुनौतीपूर्ण विषय: दोनों छात्रों ने अपने पसंदीदा और कठिन विषयों का भी जिक्र किया. आदित्य ने कहा, "फिजिक्स मेरा मजबूत विषय है, लेकिन केमिस्ट्री में शुरुआत में परेशानी होती थी. हालांकि टीचर्स ने इसे आसान बना दिया." वहीं, कपिश ने बताया, "मुझे मैथ्स पसंद है, लेकिन केमिस्ट्री में असहज महसूस होता था. इस विषय के लिए मुझे ज्यादा मेहनत करनी पड़ी."
9वीं और 11वीं से शुरू हुई तैयारी:दोनों छात्रों के परिजनों ने बताया कि तैयारी की शुरुआत काफी पहले कर दी गई थी. आदित्य की मां ने कहा, "हमने 9वीं कक्षा से ही ग्रूमिंग शुरू कर दी थी. 11वीं में अचानक लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई नहीं की जा सकती, इसलिए पहले से लॉन्ग सीटिंग की आदत डाली." उन्होंने आगे कहा, "बच्चे की काउंसलिंग भी जरूरी है, ताकि समझा जा सके कि वह इस तरह की परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार है या नहीं." कपिश की मां ने कहा, "जब भी बेटे को मेरे भरोसे और सहयोग की जरूरत पड़ी, मैं उसके साथ खड़ी रही." उन्होंने सफलता का श्रेय चंडीगढ़ सेक्टर-34 स्थित श्री चैतन्य कोचिंग संस्थान को देते हुए कहा कि, "शिक्षकों की मेहनत का ही परिणाम है कि बच्चे ने यह मुकाम हासिल किया."
“निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी”: कोचिंग संस्थान के शिक्षकों ने कहा, "जेईई जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में निरंतर मेहनत और समय का सही उपयोग बेहद जरूरी है. लगातार अभ्यास से बैकलॉग भी साथ-साथ क्लियर होता रहता है और आत्मविश्वास बना रहता है. नियमित टेस्ट, रिवीजन और डाउट क्लियर करना ही सफलता की असली रणनीति है."
चंडीगढ़ के इन दो होनहार छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि सही रणनीति, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. उनकी सफलता आने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है.
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