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चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में सीलिंग से मचा हड़कंप, छोटे उद्योगपतियों ने मांगा स्थायी समाधान

चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में अचानक सीलिंग से छोटे उद्योग प्रभावित हुए हैं.

Chandigarh Industrial Area Sealing Creates Concern Among Small Industries
चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में सीलिंग से मचा हड़कंप (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 24, 2026 at 1:20 PM IST

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चंडीगढ़: चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में इन दिनों प्रशासन की सीलिंग कार्रवाई ने छोटे और मझोले उद्योगों की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में दो औद्योगिक इकाइयों को सील किए जाने के बाद कारोबारी वर्ग में असमंजस का माहौल है. प्रशासन द्वारा कई यूनिट्स को नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे आशंका है कि आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.

तीन पीढ़ियों से नियम बदलने का इंतजार: इस बारे में ईटीवी भारत ने चंडीगढ़ स्मॉल इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अवी भसीन से बातचीत की. अवी भसीन ने कहा कि, "स्थानीय उद्योगपति पिछले तीन पीढ़ियों से बिल्डिंग बाई-लॉज में बदलाव की मांग कर रहे हैं. हर नए अधिकारी के आने के साथ आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन नियमों में कोई ठोस संशोधन नहीं होता. इसका खामियाजा वर्षों से कारोबार कर रहे कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है. कभी चंडीगढ़ ट्रैक्टर के बारीक पुर्जों के निर्माण के लिए जाना जाता था, लेकिन अब करीब 90 प्रतिशत उद्योग पड़ोसी राज्यों में शिफ्ट हो चुके हैं."

चंडीगढ़ स्मॉल इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अवी भसीन (ETV Bharat)

10 लाख से ज्यादा रोजगार पर असर: चंडीगढ़ स्मॉल इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अवी भसीन ने आगे कहा कि, "इंडस्ट्रियल एरिया के दोनों फेज में लगभग 3000 छोटे और मिड-लेवल कारोबार संचालित हो रहे हैं, जिनसे सीधे तौर पर करीब 10 लाख लोगों को रोजगार मिलता है. फर्नीचर इंडस्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, छोटे गोदाम, रिपेयर वर्कशॉप और सर्विस बेस्ड इंडस्ट्री इसका बड़ा हिस्सा हैं. अचानक की जा रही सख्त कार्रवाई से उत्पादन रुक जाता है, जिससे कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ता है."

Chandigarh Industrial Area Sealing Creates Concern Among Small Industries
Chandigarh Industrial Area Sealing Creates Concern Among Small Industries (ETV Bharat)

नियमों के खिलाफ नहीं, लेकिन समय चाहिए: अवी भसीन ने कहा कि, "उद्योगपति नियमों के खिलाफ नहीं हैं. यदि किसी यूनिट में फायर सेफ्टी, बिल्डिंग प्लान, पार्किंग या भूमि उपयोग से जुड़ी कमी है तो उसे सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए. पहले से ही छोटे उद्योग बढ़ती लागत, बिजली दरों और बाजार के बदलते नियमों से जूझ रहे हैं. ऐसे में बिना पूर्व चेतावनी के सीलिंग से हालात और बिगड़ रहे हैं."

Chandigarh Industrial Area Sealing Creates Concern Among Small Industries
अवी भसीन (ETV Bharat)

प्रशासन से राहत की मांग: लघु उद्योग भारती और स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से स्पष्ट गाइडलाइन जारी करने की मांग की है. उनका कहना है कि पहले नियमों को पारदर्शी तरीके से समझाया जाए और फिर अनुपालन के लिए समयसीमा तय की जाए. इससे कारोबारी नियमों का पालन भी कर सकेंगे और उद्योगों पर अचानक ताला लगाने की नौबत भी नहीं आएगी.

दौरे के बाद भी कार्रवाई से नाराजगी: हाल ही में गुलाब चंद कटारिया ने इंडस्ट्रियल एरिया का दौरा किया था. उद्योगपतियों का कहना है कि दौरे के दौरान उन्हें लघु उद्योगों को बढ़ावा देने का आश्वासन मिला था, लेकिन अगले ही दिन दो फर्नीचर दुकानों को सील कर दिया गया. दुकान मालिकों को इसकी जानकारी मौके पर पहुंचने के बाद ही मिली, जिससे नाराजगी और बढ़ गई.

Chandigarh Industrial Area Sealing Creates Concern Among Small Industries
Chandigarh Industrial Area Sealing Creates Concern Among Small Industries (ETV Bharat)

फर्नीचर इंडस्ट्री पर विशेष असर: फेज-1 और फेज-2 में बड़ी संख्या में फर्नीचर कारोबारी काम कर रहे हैं, जिनका कहना है कि वे पुश्तैनी तौर पर इस व्यवसाय से जुड़े हैं. प्रशासन की सख्ती के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है. उनका आरोप है कि यदि यही स्थिति रही तो चंडीगढ़ की पहचान रही यह इंडस्ट्री भी धीरे-धीरे खत्म हो सकती है.

आगे की रणनीति पर नजर: उद्योग जगत ने संकेत दिया है कि वे प्रशासन के साथ विशेष बैठक कर अपनी मांगें रखेंगे. इसमें यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि किन-किन उद्योगों पर सीधी कार्रवाई की संभावना है और समाधान का रास्ता क्या हो सकता है. फिलहाल इंडस्ट्रियल एरिया का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं.

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