चंडीगढ़ में आज से सजेगा "दिव्य कला मेला", दिव्यांग प्रतिभाओं के रंगारंग उत्सव की हुई शुरुआत
चंडीगढ़ में आज से "दिव्य कला मेला" शुरू हो चुका है. दिव्यांग शिल्पकार अपनी कला और उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं.

Published : February 13, 2026 at 11:23 AM IST
चंडीगढ़: चंडीगढ़ में आज 13 फरवरी से बहुप्रतीक्षित "दिव्य कला मेला" का आगाज हो गया है. सेक्टर-34 ग्राउंड (गुरुद्वारा साहिब के सामने) में 21 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस मेले में देशभर से आए दिव्यांग शिल्पकार और उद्यमी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. मेले का आयोजन नेशनल दिव्यांगजन फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन द्वारा किया जा रहा है. उद्घाटन 14 फरवरी को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री द्वारा सुबह 11 बजे किया जाएगा, जबकि मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहेगा.
20 राज्यों से आए 100 से अधिक प्रतिभागी: मेले में करीब 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए लगभग 100 दिव्यांग शिल्पकार और उद्यमी हिस्सा ले रहे हैं. यूटी गेस्ट हाउस, सेक्टर-6 में आयोजित प्रेस वार्ता में एनडीएफडीसी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने बताया कि यह मंच दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की पहल के तहत किया जा रहा है.
हस्तशिल्प से ऑर्गेनिक उत्पाद तक सब कुछ उपलब्ध: "दिव्य कला मेला" में हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, कढ़ाई कार्य, ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री, होम डेकोर आइटम, कपड़े, स्टेशनरी, पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद, खिलौने, गिफ्ट आइटम और आकर्षक आभूषण उपलब्ध हैं. आगंतुक यहां न केवल खरीदारी कर सकते हैं, बल्कि सीधे कारीगरों से बातचीत कर उनकी प्रेरणादायक कहानियां भी जान सकते हैं.
सांस्कृतिक रंग और विशेष आकर्षण: खरीदारी के साथ-साथ मेले में विशेष अनुभव क्षेत्र, दिव्यांग खेल गतिविधियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. 21 फरवरी को “दिव्य कला शक्ति” नामक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति में विभिन्न राज्यों के दिव्यांग कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे.
समावेशन और सशक्तिकरण की दिशा में कदम: आयोजकों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में देशभर में आयोजित 28 मेलों में दिव्यांग कारीगरों ने 23 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है. चंडीगढ़ में शुरू हुआ यह मेला न केवल आर्थिक अवसर प्रदान करेगा, बल्कि समाज में समावेशन और दिव्यांगजनों की प्रतिभा को सम्मान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा.

