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चंडीगढ़ में डिजिटल रुपये से राशन, 700-900 रुपये में परिवार का गुजारा मुश्किल, जानें कैसी है नई व्यवस्था की जमीनी हकीकत

चंडीगढ़ में डिजिटल रुपये से राशन व्यवस्था शुरू हुई, लेकिन लाभार्थी 700-900 रुपये की सब्सिडी को महंगाई के मुकाबले अपर्याप्त बता रहे हैं.

Chandigarh Digital Rupee Ration
जानें कैसी है नई व्यवस्था की जमीनी हकीकत (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 19, 2026 at 5:22 PM IST

7 Min Read
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चंडीगढ़: चंडीगढ़ में खाद्य सब्सिडी के लिए CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था शुरू हो गई है. इसके तहत पात्र लाभार्थियों को खाद्य सब्सिडी की राशि सीधे उनके डिजिटल रुपये वॉलेट में भेजी जा रही है. लाभार्थी अधिकृत राशन दुकानदार के यहां पहुंचकर QR कोड स्कैन कर निर्धारित खाद्यान्न खरीद सकते हैं.

कागजों से निकलकर कॉलोनियों तक पहुंची योजना: नई व्यवस्था को लेकर ईटीवी भारत की टीम ने चंडीगढ़ के सेक्टर-25 की कॉलोनी में पहुंचकर लाभार्थियों और राशन दुकानदारों से बातचीत की. बातचीत में पता चला कि डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन लाभार्थियों की सबसे बड़ी चिंता सब्सिडी की राशि को लेकर है. कई महिलाओं का कहना है कि मौजूदा महंगाई में 700 से 900 रुपये में पूरे परिवार का राशन चलाना मुश्किल है.

हर व्यक्ति को 182 रुपये, परिवार को करीब 930 रुपये: चंडीगढ़ में मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रत्येक पात्र व्यक्ति के लिए करीब 182 रुपये की राशि मिलने की बात सामने आई है. पांच सदस्यों वाले परिवार को लगभग 930 रुपये तक की राशि मिल रही है. लाभार्थियों के अनुसार यह रकम गेहूं, चावल और अन्य निर्धारित खाद्यान्न खरीदने में खर्च की जा सकती है, लेकिन इससे महीने भर की जरूरत पूरी करना चुनौती बना हुआ है.

Chandigarh Digital Rupee Ration
चंडीगढ़ में डिजिटल रुपये से राशन (ETV Bharat)

डिजिटल वॉलेट का पैसा सामान्य खर्च में नहीं: इस व्यवस्था की खास बात यह है कि डिजिटल रुपये के रूप में मिलने वाली राशि को सामान्य खर्च के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. लाभार्थी अधिकृत राशन दुकान पर जाकर अपने डिजिटल वॉलेट या QR कोड के माध्यम से भुगतान करते हैं. राशि का इस्तेमाल निर्धारित खाद्यान्न की खरीद के लिए ही किया जा सकता है.

"पांच लोगों का गुजारा मुश्किल": चंडीगढ़ के सेक्टर-25 निवासी सरोज ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि, "मेरी उम्र 80 साल से ज्यादा है. 14 तारीख को भी मेरे खाते में पैसे आए थे, लेकिन इन पैसों से घर के पांच लोगों का गुजारा होना मुश्किल है. बढ़ती महंगाई के बीच सरकार को सब्सिडी की राशि बढ़ाने पर विचार करना चाहिए."

700-900 रुपये में परिवार का गुजारा मुश्किल (ETV Bharat)

"कई बार आवेदन के बाद भी कार्ड से नाम बाहर": वहीं, स्थानीय निवासी राखी ने राशन कार्ड को लेकर अपनी परेशानी बताई. उन्होंने कहा कि, "मैं पांच बार अपना कार्ड अप्लाई कर चुकी हूं, लेकिन मुझे राशन कार्ड से निकाल दिया गया है. मैं एक बार फिर अपना राशन कार्ड बनवाने के लिए जाऊंगी. कार्ड से जुड़े काम के लिए लोगों को लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे समय बर्बाद होता है."

"जितनी राशि आई, उतने का ही सामान मिला": वहीं, सेक्टर-25 निवासी सावित्री ने बताया कि, "मेरे खाते में 700 रुपये आए थे, जिससे मैंने आटा और चावल खरीदा है. दुकान पर सामान लेने जाते हैं तो उसका भाव पैकेट वाले भाव के मुताबिक ही दिया जाता है. अगर आटे की थैली 320 रुपये की है तो हम डिजिटल करेंसी से 320 रुपये का ही आटा ले सकते हैं. हम सरकार से राशि बढ़ाने की मांग करते हैं."

1000 से 1500 रुपये तक सब्सिडी की मांग: एक अन्य लाभार्थी ने कहा कि, "व्यवस्था में कुछ ऐसे लोगों के नाम हटाए गए हैं जो सरकारी पद पर रहते हुए भी पहले सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे. इसे उन्होंने सकारात्मक कदम बताया, लेकिन गरीब परिवारों के लिए मौजूदा राशि को अपर्याप्त बताया. गरीब परिवारों को महज 900 रुपये देने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है. सरकार को चाहिए कि वह 1000 से 1500 रुपये प्रति महीने दे, ताकि लोग अपना कुछ खर्च चला पाएं."

दुकानदारों के यहां बढ़ी लाभार्थियों की आवाजाही: वहीं, सेक्टर-25 के मुकेश किराना स्टोर के मालिक ने बताया कि, "डिजिटल रुपये की व्यवस्था शुरू होने के बाद राशन लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. 14 तारीख से रोजाना हमारे पास 30 से 40 लोग राशन लेने के लिए पहुंच रहे हैं. हमारी दुकान पर डिजिटल करेंसी के माध्यम से लोग सामान खरीद रहे हैं."

भुगतान प्रक्रिया हुई आसान: राशन डिपो होल्डर राकेश ने बताया कि, "डिजिटल व्यवस्था के तहत लाभार्थी दुकान पर आकर QR कोड के जरिए भुगतान कर रहे हैं. अब हमारे पास रोजाना चार-पांच लोग आ रहे हैं. हमें आटा, चावल और तेल जैसी निर्धारित वस्तुओं के अनुसार ही राशन देने के लिए कहा गया है. सबसे अच्छी बात यह है कि लोगों को लंबे समय तक लाइनों में खड़ा नहीं होना पड़ता. लोग अपनी सुविधा के अनुसार राशन लेकर जा सकते हैं. इससे दुकानदारों की बिक्री पर भी सकारात्मक असर पड़ रहा है."

500 से ज्यादा दुकानदारों को जोड़ा गया: इस पूरे मामले में फूड एंड सप्लाई इंस्पेक्टर सुमित जिंदल ने बताया कि, "प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में अधिकृत दुकानदारों को व्यवस्था से जोड़ा गया है. हमारे पास 500 से ज्यादा दुकानदारों की लिस्ट है, जिन्हें राशन देने के लिए कहा गया है. फिलहाल कितने लोगों तक राशन पहुंच गया है और कितने लाभार्थियों को राशि दी गई है, इसका डाटा इकट्ठा करने में समय लगेगा."

लाभार्थियों की संख्या और पात्रता पर उठे सवाल: वहीं, बातचीत में कुछ लाभार्थियों ने राशन कार्ड से नाम हटाए जाने की शिकायत भी की. उनका कहना है कि नई व्यवस्था का लाभ उन्हीं लोगों को मिल रहा है जो मौजूदा सूची में पात्र हैं. वहीं, स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी है कि जिन परिवारों के नाम सूची से बाहर हो गए हैं, वे दोबारा पात्रता साबित कर योजना में कैसे शामिल होंगे.

पॉश इलाकों के लोगों को योजना से बाहर रखने का दावा: स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार योजना में पात्रता सूची को लेकर बदलाव किए गए हैं और शहर के कुछ संपन्न इलाकों में रहने वाले लोगों को लाभार्थी सूची से बाहर रखा गया है. वहीं, फिलहाल राशन की सुविधा मुख्य रूप से चंडीगढ़ की कॉलोनियों में रहने वाले पात्र परिवारों तक पहुंचने की बात सामने आई है. हालांकि अंतिम लाभार्थी संख्या और हटाए गए नामों का आधिकारिक आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है.

डिजिटल व्यवस्था के फायदे और चुनौतियां: नई व्यवस्था से राशन वितरण में डिजिटल भुगतान और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. लाभार्थियों को नकद राशि देने के बजाय डिजिटल वॉलेट में सब्सिडी पहुंचाई जा रही है. दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर सामने आई सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई परिवारों के लिए मौजूदा राशि महंगाई के मुकाबले कम पड़ रही है. राशन कार्ड से नाम हटने और दोबारा आवेदन की प्रक्रिया भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है.

असली परीक्षा जमीनी अमल की: चंडीगढ़ में CBDC आधारित राशन व्यवस्था को डिजिटल बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. दुकानदारों के स्तर पर QR कोड से भुगतान की प्रक्रिया चल रही है और लाभार्थियों के वॉलेट में राशि पहुंचने लगी है. लेकिन योजना की सफलता केवल डिजिटल भुगतान शुरू होने से तय नहीं होगी. लाभार्थियों को समय पर राशि मिलना, पात्र परिवारों का सूची में शामिल रहना और महंगाई के अनुरूप सब्सिडी पर्याप्त होना इस व्यवस्था की असली परीक्षा होगी.

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