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पेसा को लेकर पूर्व सीएम चंपाई सोरेन का सरकार पर जुबानी हमला, कहा - आदिवासियों का अस्तित्व खत्म करने की साजिश

धनबाद में चंपाई सोरेन ने पेसा नियमावली को लेकर झारखंड सरकार पर जोरदार हमला बोला.

PESA rules in Jharkhand
चंपाई सोरेन (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 8, 2026 at 8:45 PM IST

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धनबाद: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने पेसा नियमावली को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी समुदायों के अस्तित्व को खत्म करने के लिए पेसा ला रही है. चंपाई सोरेन संथाल जाते समय मैथन में रुके, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया.

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाई गई पेसा नियमावली आदिवासी लोगों के अस्तित्व को पूरी तरह से खत्म कर देंगे. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों और संविधान द्वारा उन्हें दी गई सुरक्षा को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आदिवासी समाज के नेतृत्व में बाहरी लोगों को शामिल किया है, जिससे समाज के बाहर के लोगों को कानूनी दर्जा दिया गया है. उन्होंने आगे दावा किया कि धोखेबाज लोगों और बिचौलियों को कानूनी मान्यता दी गई है, और पूरी ग्राम सभा को भंग कर दिया गया है.

चंपाई सोरेन का बयान (Etv Bharat)

उन्होंने बताया कि जहां राज्यपाल को अनुसूचित क्षेत्रों का प्रभारी होना चाहिए, वहीं डीसी को सर्वोच्च अधिकारी बना दिया गया है. उन्होंने आदिवासी परंपराओं में डीसी की भूमिका पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्राम सभा की शक्तियों को सीमित कर दिया है, और गांव का सार्वजनिक तालाब भी अब ग्राम सभा के नियंत्रण में नहीं रहा. उसे भी नीलामी के लिए रखा जाएगा.

उन्होंने आगे कहा कि पहले ग्राम सभा को सीएनटी भूमि के बारे में फैसले लेने का अधिकार था, लेकिन अब सब कुछ सरकार के नियंत्रण में आ गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने आदिवासियों को कुछ नहीं दिया है, बल्कि उनकी स्थिति और भी खराब कर दी है. उन्होंने कहा कि वे औद्योगिक विकास का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन जमीन अधिग्रहण के बाद इसका फायदा आने वाली पीढ़ियों को मिलना चाहिए. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि झामुमो, कांग्रेस और राजद सरकार ने आदिवासी समाज को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है.

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