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'सेव' नाम से उड़ाते थे मजाक.. अब टमाटर बना पहचान, 'टोमेटो विलेज' में होती है बंपर पैदावार

गया का एक गांव में टमाटर की खेती कर आज 'टोमेटो विलेज' बन गया है. यहां का टमाटर यूपी-बंगाल तक जाता है. पढ़ें पूरी खबर-

TOMATO VILLAGE OF GAYA
बिहार में 'टोमैटो विलेज' (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 22, 2026 at 8:02 PM IST

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गया: बिहार के गया जिले में स्थित चकसेव गांव अब 'टोमेटो विलेज' के नाम से मशहूर है. यहां का नाम पहले 'सेव' था, जो एक फल से जुड़ा होने के कारण अक्सर भ्रम पैदा करता था. इसी भ्रम को दूर करने के लिए गांववासियों ने नाम के आगे 'चक' जोड़ दिया और यह चकसेव हो गया.

नाम से जुड़ा अनोखा इतिहास: ग्रामीणों के अनुसार, 'सेव' नाम सुनकर लोग इसे फल समझ बैठते थे या मजाक उड़ाते थे. कई दशक पहले इस समस्या से निजात पाने के लिए गांव का नाम चकसेव कर दिया गया. आज यह छोटा सा गांव वजीरगंज प्रखंड में अपनी टमाटर की खेती के लिए पहचाना जाता है.

गया में टोमैटो विलेज (ETV Bharat)

पारंपरिक खेती से तंगहाली: कुछ दशक पहले तक चकसेव के किसान सिर्फ चावल और गेहूं की खेती पर निर्भर थे. इन पारंपरिक फसलों से अच्छी कमाई नहीं हो पाती थी और परिवारों में हमेशा आर्थिक तंगी बनी रहती थी. सैकड़ों परिवार किसी तरह गुजारा चलाते थे.

TOMATO VILLAGE OF GAYA
यहां के टमाटर 8 दिनों तक नहीं होते खराब (ETV Bharat)

पंडित जी की दूरदर्शिता: गांव के एक पंडित सुनील तिवारी ने स्थिति बदलने का फैसला किया. उन्होंने लगभग 25 वर्ष पहले मात्र 5 कट्ठे जमीन में टमाटर की खेती का प्रयोग किया. पहली फसल इतनी शानदार रही कि वे मालामाल हो गए। चावल-गेहूं की तुलना में टमाटर से कई गुना ज्यादा आमदनी हुई.

TOMATO VILLAGE OF GAYA
यहां की मिट्टी है खास (ETV Bharat)

गांव वालों को प्रेरित किया: सफलता मिलने पर सुनील तिवारी ने निस्वार्थ भाव से अन्य किसानों को टमाटर की खेती के लिए प्रेरित किया. दूसरे साल कुछ किसानों ने उनकी सलाह मानी और टमाटर लगाया. जब उन्हें भी भारी मुनाफा हुआ, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा.

पूरे गांव ने अपनाई टमाटर की खेती: धीरे-धीरे पूरा गांव टमाटर की खेती में जुट गया. चावल-गेहूं की खेती कम हो गई और टमाटर को प्राथमिकता मिली. पहली बार इतना पैसा देखकर किसान झूम उठे और गांव में खुशहाली की लहर दौड़ गई.

TOMATO VILLAGE OF GAYA
टमाटर से किसान हो रहे मालामल (ETV Bharat)

टमाटर ने बदली किस्मत: आज चकसेव के किसान पलायन नहीं करते, न ही मजदूरी. वे अपने खेतों में टमाटर उगाकर आत्मनिर्भर हो गए हैं. यहां की गंगटिया केवाल मिट्टी टमाटर की खेती के लिए आदर्श है, जिससे फसल मजबूत और लंबे समय तक ताजा रहती है.

TOMATO VILLAGE OF GAYA
टमाटर की खेती से अच्छी पैदावार (ETV Bharat)

खास किस्म का टमाटर: चकसेव का टमाटर अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है. यह कई दिनों तक खराब नहीं होता, लाली बरकरार रहती है. इसी कारण यूपी, पश्चिम बंगाल, झारखंड समेत अन्य राज्यों के व्यापारी यहां से खरीदने आते हैं.

TOMATO VILLAGE OF GAYA
चकसेव गांव (ETV Bharat)

कई महीनो तक निकलता है टमाटर: इस संबंध में किसान अंकुश कुमार बताते हैं, कि इस गांव का नाम सेव था. बाद में चकसेव हो गया. वो लोग किसान परिवार से हैं. अपने परिवार के साथ मिलकर टमाटर की खेती करते हैं. टमाटर की खेती काफी फायदे वाली है. गांव के तकरीबन हर किसान इसकी खेती कर रहे हैं. अंकुश कुमार बताते हैं, कि टमाटर की खेती से चकसेव गांव काफी खुशहाल है.

"यहां हम लोग किसान परिवार से हैं. अपने परिवार के साथ मिलकर टमाटर की खेती करते हैं. टमाटर की खेती काफी फायदेमंद वाली है. गांव के तकरीबन हर किसान इसकी खेती कर रहे हैं. टमाटर की खेती से चकसेव गांव काफी खुशहाल है." -अंकुश कुमार, किसान

TOMATO VILLAGE OF GAYA
टोमेटो विलेज की नई पहचान (ETV Bharat)

सीजन में करोड़ों का कारोबार: किसान राजेंद्र यादव ने बताया कि हर सीजन में यहां करोड़ों का टमाटर का व्यापार होता है. महीने में एक करोड़ से ज्यादा का कारोबार आम है. रोजाना कई 407 ट्रक और पिकअप वाहन टमाटर लेकर जाते हैं. एक एकड़ में खर्च महज 3 हजार रुपये आता है, लेकिन आमदनी 50 गुना तक हो सकती है.

"सीजन में करोड़ों का कारोबार हो जाता है. महीने में तो करोड़ से अधिक का कारोबार होता है. सितंबर महीने में हम लोग इसका बीज लगते हैं. फिर 15 दिन छोड़ देते हैं. इसके बाद टमाटर की उगाने की प्रक्रिया से जुड़ा काम करते हैं. कुल मिलाकर एक एकड़ में 3 हजार का खर्च किसान को आता है. चावल-गेहूं से काफी ज्यादा फायदेमंद है."-राजेंद्र यादव, किसान

TOMATO VILLAGE OF GAYA
खेत में मौजूद किसान (ETV Bharat)

इस साल की चुनौतियां: इस वर्ष टमाटर की खेती पिछले साल के 100 एकड़ से घटकर 75 एकड़ रह गई. फसल देर से लगी और कुछ किसानों को फूल आने के बावजूद फल कम मिल रहे हैं। संभवत बीज में कोई गड़बड़ी रही. फिर भी किसानों में उत्साह है.

टोमेटो विलेज की नई पहचान: किसान संजीत कुमार बताते हैं कि टमाटर ने गांव की तकदीर पलट दी. सितंबर से शुरू होकर मार्च-अप्रैल तक चलने वाली यह खेती अब चकसेव की मुख्य पहचान है. 'टोमैटो विलेज' के रूप में यह गांव बिहार के कृषि मानचित्र पर चमक रहा है.

TOMATO VILLAGE OF GAYA
टमाटर की अच्छी खेती (ETV Bharat)

"इस वर्ष कुछ किसानों ने टमाटर की खेती कम या फिर नहीं लगाई है. अलग-अलग कारणों से कुछ किसानों ने टमाटर की खेती नहीं लगाई है, जबकि 100 के करीब किसानों ने फिर से व्यापक तौर पर इस वर्ष भी टमाटर की खेती लगाई है और वह फल दे रहा है. टमाटर की खेती लगाने की प्रक्रिया सितंबर महीने से शुरू होती है और यह मार्च -अप्रैल तक चलती है. टमाटर से इस गांव के किसान खुशहाल है."-संजीत कुमार, किसान

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