कुरुक्षेत्र के पिहोवा में 17 से 19 मार्च को लगेगा चैत्र चौदस मेला, उपमंडल अधिकारी ने तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक
कुरुक्षेत्र के पिहोवा में आयोजित होने वाला चैत्र चौदस मेला का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है.

Published : February 20, 2026 at 2:58 PM IST
कुरुक्षेत्रः जिले के पिहोवा तीर्थ का सनातन धर्म में एक अलग ही महत्व है. यहां धार्मिक दृष्टि से कई ऐसे तीर्थ हैं, जहां पर भारत ही नहीं विदेशों से भी लोग आकर पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं 17-19 मार्च को चैत्र चौदस का मेला का आयोजन होने जा रहा है. मेले में लाखों श्रद्धालु पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल से यहां पर पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. वृहत स्तर पर लगने वाले मेले को लेकर अधिकारियों की ड्यूटी तय कर दी गई है.

8 सेक्टरों में मेला क्षेत्र को किया गया है विभाजित: पिहोवा उपमंडल अधिकारी अनिल कुमार ने अधिकारियों के साथ मेले को लेकर मीटिंग की, जिसमें विशेष दिशा निर्देश दिए गए. उम्मीद जताई जा रही है कि इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे और पिछले सालों का रिकॉर्ड टूटेगा. मेला क्षेत्र को 8 सेक्टर में बांटा गया है.

सीसीटीवी से मेला परिसर पर रखी जायेगी नजरः मेले परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था इत्यादि पर काम किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कोई भी सुविधा न हो. बैठक के दौरान अधिकारियों को विशेष तौर पर कहा गया है कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी. उपमंडल अधिकारी अनिल कुमार ने निर्देश दिए हैं कि ड्यूटी के दौरान सभी अधिकारियों का मोबाइल नंबर एक्टिव रहना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के तालमेल में कोई परेशानी न हो. यहां पर टेंट स्वच्छ पानी इत्यादि की व्यवस्था की जा रही है. इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि पुलिस भी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए निगरानी रखें.
लाखों की संख्या में कई राज्यों से आएंगे श्रद्धालु: उन्होंने बताया कि "यहां पर बड़े स्तर पर मेला आयोजित होता है. मेले में हरियाणा ही नहीं पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के श्रद्धालु पूजा अर्चना करने के लिए आएंगे." वहीं स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि मेले के दौरान वह भी अपना वहां पर स्वास्थ्य जांच के लिए कैंप लगाए ताकि अगर कोई समस्या होती है तो उसका स्वास्थ्य जांच वहीं पर किया जाए.
चैत्र चौदस मेले का महत्व: सनातन धर्म में चैत्र चौदस का विशेष महत्व होता है, लेकिन इसको सनातन धर्म के साथ-साथ सिख समुदाय के लोग भी मानते हैं. यहां पर पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं. इस मेले को नई फसल की कटाई के आगमन के तौर पर भी मनाया जाता है तो वहीं सनातन धर्म इस चौदस के मेले को नई विक्रमी संवत् शुरू होने के लिए मनाते हैं. मान्यता है कि यहां से हिंदू कैलेंडर के नए वर्ष की शुरुआत होती है. इसलिए उसके उपलक्ष्य में भी इसको मनाया जाता है.
महाभारत काल से जुड़ा है पिहोवा का इतिहासः चैत्र चौदस के अवसर पर सरस्वती तीर्थ पर विशेष तौर पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान तर्पण और स्नान की परंपरा है. सनातन धर्म और सिख समुदाय के लोग यहां पर विशेष तौर पर आते हैं जो पूजा अर्चना करते हैं और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान इत्यादि करके सुख समृद्धि की कामना करते हैं. आपको बता दें कि धार्मिक की मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहां पर अपने परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था. तब से ही यहां पर पिंडदान करने का महत्व है.

