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CGPSC पेपर लीक और भ्रष्टाचार मामला, ईडी ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में मारा छापा

2020-21 में आयोजित CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जांच की गई.

CGPSC IRREGULARITIES
ईडी रेड छत्तीसगढ़ (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : September 3, 2026 at 7:30 AM IST

3 Min Read
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रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय रायपुर जोनल ऑफिस ने 1 सितम्बर को छत्तीसगढ़ के चार जिलों रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर के 5 जगहों पर छापामार कार्रवाई की. यह कार्रवाई 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002' के प्रावधानों के तहत की गई. मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, प्रश्न-पत्र लीक और भ्रष्टाचार से जुड़ा है.

ED ने EOW, ACB, रायपुर और CBI, ACB, रायपुर द्वारा दर्ज 2 FIR के आधार पर जांच शुरू की थी. ये FIR CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और अन्य लोगों के खिलाफ 2020 और 2021 में आयोजित CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दर्ज की गई थीं.

जांच में ये बात सामने आई की CGPSC परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र निजी दलालों के जरिए आरोपी व्यक्तियों के रिश्तेदारों और चुने हुए उम्मीदवारों को रिश्वत के बदले दिए गए थे. इस तरह डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जैसे वरिष्ठ सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयन किया गया था. आगे की जांच में पता चला कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 परीक्षा के लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के उम्मीदवारों से नकद पैसे लिए और 3 करोड़ रुपये से ज़्यादा की 'अपराध से हुई कमाई' जमा की. इसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपये की रकम अनिल चंद्राकर को सौंपी गई थी.

उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के उम्मीदवारों को प्रभावित करने और उनसे पैसे वसूलने के लिए केके चंद्रवंशी जो छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के तत्कालीन पर्सनल असिस्टेंट और उनके मामा थे. तत्कालीन मुख्यमंत्री के कार्यालय में तत्कालीन 'विशेष कर्तव्य अधिकारी' (OSD) के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया.

ED ने पहले इस मामले में 3 जून 2026 को तलाशी ली थी. जमा किए गए सबूतों, PMLA, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, उनके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों और उनके बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण के आधार पर यह साबित हुआ कि उत्कर्ष चंद्राकर जानबूझकर अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) से जुड़ी प्रक्रियाओं और गतिविधियों में शामिल थे. इन गतिविधियों में कमाई करना, हासिल करना, कब्जा रखना, छिपाना, लेयरिंग, ट्रांसफर, इस्तेमाल और इसे साफ-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाना शामिल है. इसके बाद, उन्हें PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत 1 सितम्बर 2026 को गिरफ्तार किया गया. तलाशी के दौरान दोषी ठहराने वाले दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और जांच से जुड़े अन्य सबूत जब्त किए गए. आगे की जांच चल रही है.

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