सरगुजा के स्कूल को संवारने वाले शिक्षक की कहानी,बच्चों के लिए बना डाली सड़क, सिस्टम को दिखाया आईना
सरगुजा के एक शिक्षक ने सरकारी स्कूल को न सिर्फ चमकाया बल्कि उन्होंने स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण किया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 11, 2026 at 7:36 PM IST
सरगुजा: कहते हैं जहां चाह वहां राह, अगर आपके मन में किसी काम को पूरा करने की इच्छाशक्ति हो तो आप कोई भी काम पूरा कर सकते हैं. सरगुजा के कदमडाड़ प्रायमरी स्कूल के प्रधान पाठक सुरेन्द्र सिंह ने ऐसा कार्य किया है कि आज उनके स्कूल की तस्वीर बदल गई है. इस सरकारी स्कूल के शिक्षक ने स्कूल पहुंचने के लिए एक सड़क का निर्माण कर दिया. इन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के इसे पूरा किया और आज इस स्कूल में पहुंचने के लिए एक अच्छा और सुगम रास्ता तैयार हो गया है.
शिक्षक ने बना दिया स्कूल के लिए रोड
लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पुरकेला में कदमडाड़ प्रायमरी स्कूल स्थित है. यहां तक पहुंचने का मार्ग यानि की रोड सुगम नहीं था, बच्चे और टीचर गिरते पड़ते किसी तरह स्कूल पहुंचते थे. ऐसे स्कूल में एक प्रधान पाठक ने सुगम मार्ग के साथ साथ जर्जर स्कूल को भी बेहतर करने का कार्य किया है. आज इस स्कूल में आने पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों को स्कूल तक पहुंचने में किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं होती है.
शिक्षक कर रहे प्रधान पाठक की तारीफ
स्कूल की स्टाफ तर्शीला लकड़ा बताती हैं कि "इस स्कूल तक पहुंचने का मार्ग सुगम नहीं था, पथरीले टीलों पर चढ़ते उतरते बच्चे और शिक्षक स्कूल तक पहुंचते थे. बारिश में कई बार वापस लौटने की भी नौबत आ जाती थी. सांपों का डेरा हुआ करता था. क्लास रूम में दीमक ने ऐसा घर बनाया था की जब उसे जांचा गया तो जमीन करीब 8 फीट नीचे धंस गई"

नेशनल हाईवे से करीब 3 किलोमीटर इस स्कूल की दूरी है. हाइवे से गांव तक का मार्ग तो बना हुआ है, लेकिन करीब एक किलोमीटर तक कोई सड़क नहीं है, गांव से पथरीला रास्ता पंचायत ने निकाल दिया है. स्कूल एक गहरे गड्ढे में है, एक तरफ गहरा खेत और तीन तरफ से ऊंची पहाड़ी नुमा जमीन थी. स्कूल जाने के का कोई मार्ग नहीं था. सुरेंद्र सिंह जी ने स्कूल के लिए सड़क बनाने का काम किया-तर्शीला लकड़ा, शिक्षिका, कदमडाड़ प्रायमरी स्कूल

स्कूल की दुर्गति देख हुई तकलीफ, सड़क निर्माण का लिया फैसला
साल 2023 में इस स्कूल में प्रधान पाठक बन कर पहुंचे सुरेन्द्र सिंह बताते हैं कि वो हाई स्कूल से यहां आए तो इसकी हालत देखकर आश्चर्य हुआ. क्लास रूम में दीमक का प्रकोप था, स्कूल आने का रास्ता नहीं था. यह देखकर काफी खराब लगा. उसके बाद मैंने इस सबको बेहतर करने का मन बनाया.

साल 2023 से धीरे धीरे मैंने अपने सहयोगी और कुछ लेबर की मदद ली. क्लासरूम में दीमक के कारण बड़ा गड्ढा हो गया था उसे भरा गया और क्लासरूम व्यवस्थित की गई. स्कूल के सामने टीलों को जेसीबी से समतल कराया गया. जिससे खेल के लिए मैदान बना. उसके बाद करीब 60 मीटर तक जेसीबी से खुदाई कराकर आने जाने का मार्ग सही किया गया- सुरेंद्र सिंह, प्रधान पाठक, कदमडाड़ प्रायमरी स्कूल

खुद के पैसे से शिक्षक सुरेंद्र ने बदली स्कूल की तस्वीर
बड़ी बात ये है कि, क्लास रूम की मरम्मत हो या फिर सड़क का काम, ये सब किसी सरकारी फंड ने भी बल्कि इस प्रधान पाठक ने अपने खर्च पर कराया है. खुद भी मजदूरी की, लेबर को भी लगाया और जेसीबी की भी मदद ली गई. इन सबका खर्चा उन्होंने खुद वहन किया, हालांकि बार बार पूछने पर भी उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया कि कितना खर्च हुआ. स्कूल में अब भी शौचालय एक बड़ी समस्या है, शौचालय बनाया तो गया है लेकिन वो चालू नहीं है, अब इनके सामने अगली चुनौती शौचालय चालू कराने की है.
इस स्कूल की हालत अच्छी नहीं थी, ये जगह ऊंची नीची थी, सर ने यहां आने के बाद कई काम कराए हैं. अब यहां तक आना जाना आसान हुआ है, पहले तो गाड़ी यहां तक नहीं आ पाती थी. हमारे बच्चे भी यहां पढ़ते हैं, पढ़ाई भी अच्छी करा रहे हैं- अनिल, ग्रामीण,कदमडाड़ प्रायमरी स्कूल
शिक्षक सुरेंद्र सिंह ने पेश की मिसाल
शिक्षक सुरेंद्र के इस कार्य ने दूसरे तमाम शिक्षकों के लिए एक मिसाल पेश किया है, जो दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं. ये कहानी ये बताती है कि अगर मन में लगन हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है, प्रयास करने से छोटी मोटी समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है. हालांकि ये जिम्मेदारी प्रशासन के अन्य विभागों की है, लेकिन फिर भी जंगली पहाड़ी क्षेत्रों में कई जगह स्थिति विपरीत होती है. ऐसे में शिक्षक सुरेंद्र की यह कहानी अन्य लोगों को प्रेरणा देने का काम करेगी.

