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हरियाणा के वैज्ञानिक का कमाल, मधुमक्खी के छत्तों के लिए बनाया मल्टीपर्पस डिस्पेंसर, केंद्र सरकार से मिला पेटेंट

केंद्र सरकार ने CCSHAU के वैज्ञानिक ओपी चौधरी को मधुमक्खी के छत्तों के लिए एक मल्टीपर्पस डिस्पेंसर बनाने के लिए डिज़ाइन पेटेंट दिया है.

CCSHAU scientist OP Choudhary has been granted a patent by the Central Government for developing a multipurpose dispenser for beehives
मधुमक्खी के छत्तों के लिए बनाया मल्टीपर्पस डिस्पेंसर (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : January 4, 2026 at 10:46 PM IST

3 Min Read
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हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU) के एक वैज्ञानिक को केंद्र सरकार ने मधुमक्खी के छत्तों के लिए एक मल्टीपर्पस डिस्पेंसर बनाने के लिए डिज़ाइन पेटेंट दिया है.

मल्टीपर्पस डिस्पेंसर के लिए मिला पेटेंट : ये डिवाइस मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों और बीमारियों को रोकने में मदद करता है, इसे कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. ओ.पी.चौधरी ने डिज़ाइन किया है. इसे डिज़ाइन पेटेंट नंबर 320896-00 दिया गया है. CCSHAU के वाइस-चांसलर प्रो. बलदेव राज कंबोज ने डॉ. ओ.पी.चौधरी को बधाई दी और कहा कि ये डिस्पेंसर एक अनोखा आविष्कार है, जो मधुमक्खियों को कीटों और बीमारियों से बचाती है. ये मधुमक्खियों की सुरक्षा और मधुमक्खी उत्पादों की गुणवत्ता को भी बनाए रखती है.

मधुमक्खियों को कीड़ों और बीमारियों से बचाएगा : इस डिस्पेंसर का उपयोग कीटनाशक, एकारिसाइड, रसायन और दवा फॉर्मूलेशन को ठोस, तरल, पाउडर और जेल रूपों में लगाने के लिए किया जा सकता है ताकि वरोआ माइट्स, एकारैपिस माइट्स, पैरासिटिक माइट सिंड्रोम, यूरोपीय फाउलब्रूड और वैक्स मॉथ जैसे कीटों और बीमारियों को नियंत्रित किया जा सके. इसे मधुमक्खी के छत्ते के अंदर अलग-अलग जगहों पर रखा जा सकता है, जिसमें बॉटम बोर्ड, फ्रेम के टॉप बार या फ्रेम के बीच वाली जगहें शामिल हैं, जिससे ये बहुमुखी और उपयोग में आसान हो जाता है.

हर मौसम में किया जा सकेगा इस्तेमाल : ये डिवाइस शहद, पराग और रॉयल जेली जैसे अन्य उत्पादों में हानिकारक रासायनिक अवशेषों को रोकने में मदद करता है. ये डिस्पेंसर एपिस मेलिफेरा और एपिस सेराना दोनों प्रजातियों के लिए उपयुक्त है और इसे मधुमक्खियों की सामान्य गतिविधि को परेशान किए बिना सभी मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है. ये मधुमक्खी पालकों के लिए श्रम को भी कम करता है और दक्षता में सुधार करता है.

1.12 लाख करोड़ का फायदा : डॉ. ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मधुमक्खियां पॉलिनेशन के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 1.12 लाख करोड़ रुपये का योगदान देती हैं, लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ते कीट हमलों, विशेष रूप से वरोआ माइट के संक्रमण के कारण मधुमक्खी कॉलोनियों को भारी नुकसान हुआ है.

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