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हाईकोर्ट पहुंचा CBSE स्कूल में अध्यापक नियुक्ति मामला, 12 मार्च से पहले सरकार से मांगा जवाब

CBSE स्कूल में प्रदेश के सरकारी विद्यालय में तैनात शिक्षकों को नियुक्त किया जाना है.

Himachal Pradesh High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा CBSE स्कूल में अध्यापक नियुक्ति मामला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : March 3, 2026 at 7:41 PM IST

3 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में CBSE एफिलिएटिड स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया को हिमाचल उच्च न्यायालय में चुनौती मिली है. हिमाचल प्रदेश में विभिन्न अध्यापक संगठनों के ज्वाइंट फ्रंट की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. इस मामले में मंगलवार को हिमाचल हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र नेगी की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की. मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिए हैं. अदालत ने प्रतिवादियों को 12 मार्च से पहले जवाब दाखिल करने को कहा है.

अध्यापकों के सिलेक्शन प्रोसेस को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

राज्य में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश में 134 सरकारी पाठशालाओं को CBSE एफिलिएटिड करने का फैसला लिया है. इन CBSE स्कूल में राज्य के सरकारी विद्यालय में तैनात शिक्षकों को नियुक्त किया जाना है. इसके लिए शिक्षकों को एक नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें अध्यापकों को ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट देना होगा. 22 मार्च को CBSE एफिलेटेड स्कूल में नियुक्ति के लिए ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा होनी निर्धारित है. अब इससे पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए शिक्षकों ने हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है. मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को होनी है. इस मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड और CBSE को भी पार्टी बनाया गया है.

वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव भूषण (ETV Bharat)

मामले में टीचर्स ज्वाइंट फ्रंट का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव भूषण ने कहा कि, "राज्य सरकार ने 134 स्कूलों को SBCE एफिलिएटिड करने का फैसला लिया है. यह सरकार का नीतिगत फैसला है और शिक्षकों को इस पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन, शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जो प्रक्रिया तय की गई है, उससे राज्य में अरेस्ट की स्थिति पैदा होगी. कमिशन से चयनित अध्यापक कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वर्षों के अनुभव के बाद उन्हें दोबारा चयन प्रक्रिया से गुजरना उचित नहीं है. एक ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट के आधार पर चयन किया जाना गलत है और इससे अध्यापकों के मनोबल को नुकसान होगा."

HPBOSE से शिक्षकों की ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा

याचिका में आरोप है कि, सरकार की एक तरफ राज्य सरकार HPBOSE को कमतर बताते हुए स्कूलों का CBSE एफिलिएशन करवा रही है. साथ ही HPBOSE से ही शिक्षकों की ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा करवाई जा रही है, जो उचित नहीं है. मामले में अदालत ने याचिका पर मंगलवार 3 मार्च को सुनवाई हुई. 22 तारीख को चयन परीक्षा निर्धारित है ऐसे में अदालत ने राज्य सरकार को 12 तारीख से पहले जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.

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