चंडीगढ़ में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व्यवस्था की शुरुआत, जानें कैसे करेगी काम
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चंडीगढ़ से सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था की शुरुआत की.

Published : August 14, 2026 at 2:14 PM IST
चंडीगढ़: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज चंडीगढ़ दौरे पर रहें. इस दौरान उन्होंने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था की शुरुआत की. केंद्रीय कृषि मंत्री ने चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' (PMGKAY) के तहत इस व्यवस्था की देश में पहली बार पूर्ण रूप से शुरुआत की है.
क्या है CBDC आधारित DBT व्यवस्था? सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था भारत सरकार की एक अत्याधुनिक पहल है. इसके तहत सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी लाभों को सीधे लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में डिजिटल रुपया (e₹ के रूप में) भेजा जाता है. ये व्यवस्था पारंपरिक बैंक ट्रांसफर (जैसे बैंक खातों में नकद भेजना) से आगे बढ़कर "पर्पस-बाउंड" (उद्देश्य-निर्धारित) डिजिटल डिलीवरी सुनिश्चित करती है.
DBT से पैसा डालने के बाद यह चिंता रहती थी कि पैसा राशन के बजाय कहीं और न चला जाए। इसलिए ऐसा सिस्टम बनाया गया कि राशन के लिए दिया गया पैसा राशन पर ही खर्च हो। pic.twitter.com/cl6d8k5ldz
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) August 14, 2026
व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं:
- प्रोग्रामेबल टोकन (Programmable Tokens): इस व्यवस्था में जारी की गई डिजिटल मुद्रा प्रोग्रामेबल होती है. इसका मतलब है कि खाद्य सब्सिडी के लिए मिले डिजिटल रुपये का उपयोग केवल अधिकृत राशन डीलरों या सूचीबद्ध व्यापारियों से गेहूं और चावल जैसे खाद्यान्न खरीदने के लिए ही किया जा सकता है.
- बैंक खातों पर निर्भरता का खात्मा: पारंपरिक डीबीटी के विपरीत, इसमें लाभार्थियों को सब्सिडी राशि सीधे उनके CBDC डिजिटल वॉलेट में मिलती है, जिससे सामान्य बैंक खातों की कागजी कार्रवाई या तकनीकी विफलताओं की समस्या दूर होती है.
- आसान उपयोग प्रक्रिया: लाभार्थियों को सिर्फ अपने मोबाइल पर उपलब्ध डिजिटल वॉलेट ऐप का उपयोग करके राशन दुकान पर लगे QR कोड को स्कैन करना होता है और भुगतान तुरंत हो जाता है.
पारंपरिक DBT और CBDC-आधारित DBT में अंतर:
| विशेषता | पारंपरिक डीबीटी (Conventional DBT) | CBDC-आधारित डीबीटी (CBDC-DBT) |
| धनराशि का रूप | सामान्य नकद (बैंक ट्रांसफर) | डिजिटल रुपया (e-Rupee) टोकन |
| उपयोग पर नियंत्रण | लाभार्थी राशि को किसी भी काम में खर्च कर सकता है. | केवल निर्धारित उद्देश्य (जैसे खाद्यान्न खरीद) के लिए ही उपयोग संभव है. |
| बिचौलियों और लीकेज का जोखिम | बैंकों या एजेंटों के स्तर पर देरी या तकनीकी गड़बड़ी की आशंका. | शून्य जोखिम, सीधे RBI द्वारा समर्थित वॉलेट में रीयल-टाइम ट्रांसफर. |
| निगरानी (Tracking) | सरकार केवल फंड ट्रांसफर ट्रैक कर पाती है, खर्च कहां हुआ यह नहीं. | सरकार रीयल-टाइम में देख सकती है कि सब्सिडी का सही उपयोग हुआ है या नहीं. |
शिवराज चौहान ने बताया कि "इस सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज व अन्य लाभों का भुगतान और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाने का लक्ष्य है."
- इस व्यवस्था के बड़े लाभलीकेज और दुरुपयोग पर लगाम: राशि का ट्रांसफर एंड-टू-एंड ट्रैक होने के कारण फंड का डायवर्जन (गलत इस्तेमाल) या बिचौलियों द्वारा हेरफेर बिल्कुल असंभव हो जाता है.
- पारदर्शिता और जवाबदेही: सरकारी विभागों को रीयल-टाइम डेटा मिलता है कि किस लाभार्थी ने कब और कितना राशन खरीदा, जिससे देश के Direct Benefit Transfer (DBT) भारत पोर्टल पर सब्सिडी तंत्र की जवाबदेही और मजबूत होती है.
- वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): बिना पारंपरिक वाणिज्यिक बैंक खातों के भी ये डिजिटल कैश सीधे जनता तक पहुंचता है, जो देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को मजबूत करता है.
चंडीगढ़ में आयोजित हुआ कार्यक्रम: दरअसल चंडीगढ़ स्थित टैगोर थिएटर में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने की. जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था शुरू की.

