बेमेतरा में 50 से ज्यादा गौवंश की मौत, निजी बाड़े में नहीं थी चारा पानी की व्यवस्था
बेमेतरा के निजी बाड़े में भूख और प्यास से 50 से ज्यादा गौवंश की मौत हुई है.गौसेवकों की शिकायत पर पुलिस ने कंप्लेंट दर्ज की.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 24, 2026 at 12:01 PM IST
बेमेतरा : बेमेतरा जिले के दाढ़ी थाना क्षेत्र में 50 से अधिक गौवंशों की मौत का मामला सामने आया है.बताया जा रहा है कि हेमाबंद गांव में गौवंशों की भूख प्यास से तड़पकर मौत हुई है. इसके अलावा जिस जगह पर इन गौवंशों को रखा गया था वहां कई मवेशियों की हालत गंभीर है.गौवंश की खबर फैलते ही पूरे इलाके में भारी जन-आक्रोश फैल गया है.आक्रोशित ग्रामीणों और हिंदूवादी समेत पशु संरक्षण संगठनों ने मौके पर पहुंचकर नाराजगी जाहिर की है. हिंदू संगठनों ने इस अव्यवस्था के लिए स्थानीय पंचायत प्रबंधन और पशुपालन विभाग को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं मामले को लेकर दोषियों के खिलाफ दाढ़ी थाना की पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है.
क्या है पूरा घटनाक्रम ?
आपको बता दें कि हेमाबंद निवासी दिलीप राय अपने निजी बाड़े में ग्रामीणों के गौवंशों को रखता है. इन मवेशियों की देखरेख के लिए 1200 प्रति मवेशी दिलीप राय ग्रामीणों से लेता है.लेकिन इसी बाड़े में साफ सफाई और अव्यवस्थाओं के कारण मवेशियों की मौत हुई है. ग्रामीणों के मुताबिक गौशाला के अंदर का नजारा बेहद भयावह था. चारों तरफ मवेशियों के कंकाल और शव बिखरे थे. पिछले कई दिनों से मवेशियों को खाने के लिए पैरा (चारा) का एक तिनका तक नहीं दिया गया था. भीषण गर्मी और उमस के बीच पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं थी.कई गायों की भूख प्यास से कीचड़ में ही मौत हो गई.वहीं जीवित बचे मवेशी इतने कमजोर हो चुके हैं कि वे अपने पैरों पर खड़े होने की स्थिति में भी नहीं हैं.

हेमाबंद गांव गौ हत्या का बाजार बन चुका है.यहां पर दिलीप राय नाम का शख्स गौवंशों को पैसा लेकर एक कमरें में रखता है.उसकी सोच है कि गौवंशों को दाना पानी की जरुरत नहीं पड़ती,उन्हें बिना पानी और चारे के कीचड़ नुमा कमरे में ठूंस-ठूस कर रखा जाता है. हम ऐसे हत्यारे के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं- हरीश चौहान,गौसेवक
इस गौहत्या का जिम्मेदार कौन है इसे समझना होगा. अभी भी 50 से अधिक गौवंश और नंदी बाबा के शव पड़े हुए हैं.जिन्हें गिद्ध और श्वान नोच रहे हैं.ऐसी निर्ममता के साथ तो मुर्गा और बकरी को भी नहीं रखा जाता है.लेकिन इस बार गौवंशों की हत्या का जिम्मेदार कौन है.यदि छत्तीसगढ़ में ऐसी दुर्दशा सामने आई तो आने वाले दिनों में ऐसा महाप्रलय आएगा,जिसकी किसी ने कोई कल्पना ना की होगी-आदेश सोनी, गौसेवक
जांच टीम गठित, पशु चिकित्सा विभाग ने संभाला मोर्चा
वहीं मामले में हंगामे को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों की एक विशेष टीम तुरंत मौके पर भेजी गई.डॉक्टरों ने जीवित बचे बीमार मवेशियों का तत्काल उपचार शुरू कर दिया है. वहीं मृत गौवंशों का पंचनामा कर उनके शवों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. वहीं प्रार्थी कारेसरा निवासी गौसेवक हरीश कुमार चौहान की शिकायत के आधार पर दाढ़ी थाना की पुलिस ने आरोपी दिलीप राय के खिलाफ बीएनएस की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 (1) (क) एवं 11 (1)(ज) के तहत अपराध दर्ज किया गया है.
हमें सूचना मिलने के बाद हमारी टीम आई तो हमने देखा कि कुछ मवेशी खड़े हैं और कुछ मवेशी कमजोर हैं.जिनका इलाज किया गया. यहां बाड़े के मालिक ने हमें इसकी जानकारी दी.लेकिन वो पैसा लेकर मवेशियों को बाड़े में रखते हैं,इसकी सूचना पहले हमें नहीं दी गई थी.हमनें अपने उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी है.जो भी निर्देश होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी- कर्मचारी, पशु विभाग
गौ सेवा आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की सूचना के बाद गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन दास महाराज ने भी संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
पहले भी हो चुकी है गौवंशों की मौत
आपको बता दें कि बेमेतरा के उसलापुर-झिरिया में मई माह में भी 300 से ज्यादा गौवंश की दर्दनाक मौत हुई थी.इस मामले में भी गौसेवकों समेत कांग्रेस ने काफी हंगामा किया था.लेकिन इस घटना के बाद भी स्थिति में किसी तरह का सुधार होता नहीं दिख रहा है.इस बार निजी बाड़े में गौवंशों की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं.
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