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चंडीगढ़ में ईएमआरएस परीक्षा में सॉल्वर बैठाने के केस में अदालत ने सुनाई सज़ा, दो दोषियों को 3-3 साल की कैद

चंडीगढ़ के सेक्टर-40 के निजी स्कूल में ईएमआरएस भर्ती परीक्षा में सॉल्वर बैठाने के मामले में दो दोषियों को 3-3 साल की सजा हुई है.

Case of using a proxy examinee for the EMRS exam in Chandigarh Two convicts sentenced to 3 years in prison each
चंडीगढ़ में ईएमआरएस परीक्षा में सॉल्वर बैठाने के केस में अदालत ने सुनाई सज़ा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 16, 2026 at 10:54 PM IST

3 Min Read
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चंडीगढ़ : सेक्टर-40 के एक निजी स्कूल में आयोजित ईएमआरएस भर्ती परीक्षा में उम्मीदवार की जगह दूसरे कैंडिडेट के परीक्षा देने के मामले में अदालत ने हिसार के विक्रम लोहान और फतेहाबाद के बलविंदर सिंह को दोषी ठहराते हुए दोनों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है. दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

साल 2023 का मामला : मामला 17 दिसंबर 2023 का है. उस दिन सेक्टर-40 स्थित स्कूल में ईएमआरएस परीक्षा चल रही थी. परीक्षा केंद्र पर उम्मीदवारों की बायोमीट्रिक जांच की जा रही थी. इसी दौरान बलविंदर सिंह के नाम से परीक्षा दे रहे युवक के फिंगरप्रिंट का रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ. यहीं से पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया.

क्या है ईएमआरएस परीक्षा? : ईएमआरएस यानी एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल देश के अलग-अलग हिस्सों में चलाए जाने वाले आवासीय स्कूल हैं. इनमें खासतौर पर जनजातीय समुदाय के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की व्यवस्था है. इन स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती के लिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं. इस मामले में परीक्षा के दौरान हुई बायोमीट्रिक जांच ने दूसरे व्यक्ति को बैठाकर परीक्षा देने की कोशिश को पकड़ लिया. अदालत के फैसले के बाद परीक्षा में नकल या फर्जी उम्मीदवार बैठाने की कोशिश करने वालों के लिए भी ये मामला एक सख्त संदेश माना जा रहा है.

बायोमैट्रिक ने खोली पोल : मामले की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली से आई परीक्षा टीम ने युवक से पूछताछ की. जांच में पता चला कि परीक्षा केंद्र में बैठा युवक असल में विक्रम लोहान था और वो बलविंदर सिंह की जगह परीक्षा देने आया था. फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुलिस ने विक्रम को परीक्षा केंद्र से ही पकड़ लिया. उसके पास से आधार कार्ड, एडमिट कार्ड, प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट और अटेंडेंस शीट समेत परीक्षा से जुड़े दूसरे दस्तावेज भी बरामद किए गए. पुलिस की पूछताछ और जांच के बाद बलविंदर सिंह को भी गिरफ्तार किया गया. जांच में दोनों की भूमिका सामने आने पर पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया.

दोनों की भूमिका अलग-अलग थी : मामले में विक्रम लोहान सॉल्वर बनकर परीक्षा देने पहुंचा था, जबकि बलविंदर सिंह वह उम्मीदवार था जिसके नाम पर परीक्षा दी जा रही थी. अदालत ने दोनों को IPC की धारा 419, 420 और 120बी के तहत दोषी माना. करीब तीन साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने दोनों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है.

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