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टिहरी में शराब की दुकान ने बढ़ाई टेंशन, NGT के आदेश से दुविधा में अफसर

टिहरी जिले में शराब की दुकान का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ये पूरा मामला एनजीटी तक पहुंच गया है.

Uttarakhand Excise Commissioner Office
उत्तराखंड आबकारी आयुक्त कार्यालय (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : December 28, 2025 at 8:04 AM IST

4 Min Read
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देहरादून: टिहरी जिले में शराब की एक दुकान जी का जंजाल बन चुकी है. यहां कभी हंगामा, कभी धरना प्रदर्शन तो कभी जमीन विवाद लगातार सिरदर्द बने हुए हैं. स्थिति ये है कि मामला अब NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) तक भी पहुंच चुका है. उधर हैरानी की बात यह है कि जमीन विवाद पर संयुक्त जांच भी अफसरो को किसी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंचा पा रही है. ऐसे में NGT ने नए आदेश से अफसर दुविधा में फंसते नजर आ रहे हैं.

उत्तराखंड में अंग्रेजी शराब की दुकानें आमतौर पर सरकारी राजस्व का बड़ा जरिया मानी जाती हैं, लेकिन मुनि की रेती में स्थित एक अंग्रेजी शराब की दुकान इन दिनों सरकार और प्रशासन के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. बीते कई महीनों से यह ठेका लगातार विवादों में घिरा हुआ है. हत्या की घटना से लेकर वन भूमि अतिक्रमण तक, एक के बाद एक मामले सामने आने से अब यह प्रकरण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंच गया है.

इस शराब के ठेके से जुड़ा विवाद अक्टूबर 2025 में उस समय गंभीर हो गया, जब एक युवक अजेंद्र कंडारी की हत्या कर दी गई. बताया गया कि अजेंद्र अपने एक दोस्त के साथ मुनि की रेती स्थित इसी अंग्रेजी शराब की दुकान पर शराब खरीदने और पीने पहुंचा था. शराब पीने के बाद दोनों के बीच किसी मामूली बात को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई. आरोप है कि इसी दौरान अजेंद्र के दोस्त ने उसकी हत्या कर दी, इस जघन्य घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया.

स्थानीय लोगों ने हत्या के लिए शराब के ठेके को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की. गुस्साए लोगों ने कई दिनों तक प्रदर्शन किया, जिसके चलते प्रशासन को ठेका अस्थायी रूप से बंद रखना पड़ा. हालांकि बाद में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाकर ठेके को दोबारा खोल दिया गया, जो आज भी संचालित हो रहा है. इसके बावजूद स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई है.

यह पहला मौका नहीं है जब मुनि की रेती का यह शराब ठेका विवादों में आया हो. साल 2018 में जब इसे खोला गया था, तब भी इसका भारी विरोध हुआ था. यह ठेका ऋषिकेश के राम झूला से लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर और गंगा नदी से करीब 900 मीटर दूर स्थित है. धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र के इतने निकट शराब की दुकान खोले जाने को लेकर तब भी सवाल उठे थे, जो अब एक बार फिर तेज हो गए हैं.

ताजा विवाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से जुड़ा है, जहां यह याचिका दाखिल की गई है कि शराब का यह ठेका आरक्षित वन क्षेत्र की भूमि पर अतिक्रमण कर संचालित किया जा रहा है. इस पर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाते हुए टिहरी जिलाधिकारी, प्रमुख वन संरक्षक (PCCF फॉरेस्ट) और आबकारी आयुक्त को एक संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं. समिति को मौके का निरीक्षण कर यह जांच करनी है कि क्या वास्तव में ठेका वन भूमि पर संचालित हो रहा है.

इस संयुक्त समिति को 18 मार्च 2026 से करीब एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल करनी होगी. प्रशासन की दुविधा इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पहले की जांच में जमीन को लेकर विरोधाभास सामने आ चुका है. वन विभाग के रिकॉर्ड में यह भूमि वन क्षेत्र दर्शाई गई है, जबकि राजस्व विभाग के दस्तावेजों में इसे राजस्व भूमि बताया गया है.

ईटीवी भारत से बातचीत में टिहरी जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने बताया कि इस मामले में पहले ही जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है और अब आगे का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है. उधर शासन स्तर पर प्रस्तावित बैठक में सर्वे ऑफ इंडिया से भी जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने पर विचार किया जा सकता है. फिलहाल मुनि की रेती का यह अंग्रेजी शराब ठेका लगातार विवादों में बना हुआ है और प्रशासन के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है.

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